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NHAI प्रोजेक्ट्स में ठेकेदारों की मनमानी बंद, हाईवे निर्माण की गुणवत्ता सुधारने के लिए बदला एग्रीमेंट

By Jitendra SharmaEdited By: Garima Singh
Published: Tue, 20 Oct 2026 09:30 PM (IST)

सड़क परिवहन मंत्रालय ने हाईवे परियोजनाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए नए नियम जारी किए हैं।

हाईवे परियोजनाओं की गुणवत्ता सुधारने को नए नियम

हाईवे परियोजनाओं की गुणवत्ता सुधारने को नए नियम

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जितेंद्र शर्मा, नई दिल्ली। हाईवे और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की गुणवत्ता पर जब-जब सवाल उठा, तब-तब कई बिंदुओं पर चिंतन-मनन हुआ।

प्रोजेक्ट की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) से लेकर बड़ी ठेकेदार फर्मों द्वारा मनमाने ढंग से अधिक सब-कांट्रैक्ट यानी उप-अनुबंध किए जाने को भी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी एक कारण के रूप में गिनाते रहे हैं।

सब-कांट्रैक्ट की सीमा 30% तक घटाई गई

बीते कई दिनों से हाईवे निर्माण के मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट में बदलाव को लेकर चल रही प्रक्रिया के तहत केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड की परियोजनाओं के लिए नियम-शर्तों में प्रमुख बदलाव करते हुए तय किया है कि अब ठेकेदार प्रोजेक्ट के 30 प्रतिशत से अधिक भाग का सब-कांट्रैक्ट नहीं कर सकेंगे।

हाईवे परियोजनाओं की गुणवत्ता बनाए रखने की चिंता में ही लगातार नियमों में बदलाव किया जा रहा है। कुछ बदलाव बिल्ड, ऑपरेट, ट्रांसफर (बीओटी), हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) और टोल, आपरेट, टांसफर (टीओटी) में भी किए गए हैं।

चूंकि, अनुबंधों के इन तीनों ही मॉडल में ठेकेदार फर्मों के पास कुछ समय के लिए हाईवे के रखरखाव का भी दायित्व होता है, इसलिए इनसे अधिक चिंता उन परियोजनाओं को लेकर है, ईपीसी के तहत बनती हैं।

ठेकेदारों को 70% काम करना होगा

कारण यह है कि इसमें शत-प्रतिशत लागत सरकार लगाती है। डिजाइन और निर्माण करने वाली ठेकेदार फर्म के पास रखरखाव भी दायित्व नहीं रहता, इसलिए इसकी गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए इसके मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है।

दरअसल, ईपीसी मोड में अभी तक ठेकेदार फर्म 49 प्रतिशत तक प्रोजेक्ट का उप-अनुबंध यानी सब-कांट्रैक्ट कर सकती थी, लेकिन नए एग्रीमेंट में इसे घटाकर मात्र 30 प्रतिशत कर दिया गया है।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने नए एग्रीमेंट में स्पष्ट किया है कि ठेकेदार चाहे संयुक्त उद्यम यानी ज्वाइंट वेंचर में हो या अकेला, अनुबंध मूल्य के तीस प्रतिशत से अधिक हिस्से के लिए किसी भी कार्य का उप-अनुबंध नहीं करेगा।

उसे अनुबंध मूल्य के कम से कम सत्तर प्रतिशत हिस्से का काम सीधे अपनी देखरेख में, अपने कर्मचारियों और उपकरणों के माध्यम से पूरा करना होगा।

इसके अलावा यदि ठेकेदार एक संयुक्त उद्यम है, तो 'लीड मेंबर' (मुख्य सदस्य) को प्रोजेक्ट की कुल लंबाई के कम से कम 51 प्रतिशत हिस्से पर सीधे अपने संसाधनों (जैसे मानव संसाधन, सामग्री, मशीनें आदि) के माध्यम से काम करना होगा।

हाईवे परियोजनाओं की गुणवत्ता सुधारने को नए नियम

यह न सिर्फ लंबाई, बल्कि अनुबंध मूल्य का भी कम से कम 51 प्रतिशत होना चाहिए। हालांकि, ठेकेदार द्वारा सीधे किए जाने वाले कार्यों के लिए वह सामग्री, संयंत्र, उपकरण, फर्नीचर, सुरक्षा उपकरणों और श्रम की आपूर्ति आदि के लिए अनुबंध कर सकता है।

एग्रीमेंट में पुराने इस नियम को यथावत रखा गया है कि यदि काम के लिए किसी उप-ठेका की कुल राशि अनुबंध मूल्य के पांच प्रतिशत से अधिक हो जाती है तो ठेकेदार को ऐसा कोई भी उप-ठेका करने से पहले उप-ठेकेदार का नाम और विवरण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को बताना होगा।

प्राधिकरण अपनी शर्तों और नियमों के संदर्भ में उसकी जांच करने के बाद अनुमति देगा। यह भी स्पष्ट किया गया है कि मुख्य ठेकेदार फर्म ने उप-ठेकेदार के साथ कोई भी समझौता किया हो, लेकिन कोई भी कमी पाए जाने पर ठेकेदार उप-ठेके के समझौते को आधार बनाकर अपने दायित्वों से छुटकारा नहीं पा सकता।

इसके अलावा यदि ठेकेदार स्वीकृत उप-ठेकेदारों को भुगतान सही से नहीं करता है और उससे काम की प्रगति पर असर पड़ने की आशंका हो तो प्राधिकरण इसमें हस्तक्षेप करेगा।

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