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NHAI टेंडर में गड़बड़ी करने वालों पर एक्शन, स्पेशल 39 की बनाई टीम; ठेकेदारों और कंपनियों पर लगेगा 2 साल का बैन

Published: Wed, 30 Sep 2026 06:54 PM (IST)

राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एनएचएआई ने 17 लो-बिड प्रोजेक्ट्स की विशेष निगरानी शुरू की है।

एनएचएआई ने 17 लो-बिड राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की निगरानी शुरू की

एनएचएआई ने 17 लो-बिड राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की निगरानी शुरू की

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अब खास तौर पर अधिक गंभीर और सतर्क दिखाई दे रहा है। प्राधिकरण ने ऐसे 17 प्रोजेक्ट की विशेष निगरानी शुरू कराई है, जिनके निर्माण के लिए ठेकेदार कंपनियों ने निविदा के आधार मूल्य के सापेक्ष 15 प्रतिशत या उससे भी अधिक कम दर पर बोली लगाई थी।

निगरानी के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की अगुआई में स्पेशल टीम बनाई गई है, जिसमें रेल मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और राज्य लोक निर्माण विभागों जैसे विभिन्न सरकारी संगठनों के 39 अनुभवी और रिटायर्ड इंजीनियर शामिल किए गए हैं। निरीक्षण के दौरान तकनीकी विशेषज्ञ भी इन टीमों की मदद करेंगे।

17 लो-बिड राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की निगरानी शुरू

एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार, नेशनल हाईवे परियोजनाओं के निर्माण के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण और उच्च स्तरीय गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए 17 निर्माणाधीन नेशनल हाईवे परियोजनाओं की खास गुणवत्ता जांच कराई जा रही है। ये जांच एनएचएआइ की नियमित गुणवत्ता जांच से अलग है।

इसका उद्देश्य गुणवत्ता से जुड़ी समस्याओं की शुरुआती चरण में ही पहचान करना है, ताकि समय पर सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। जांच का पहला चरण दिसंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। छह महीने बाद विशेषज्ञों की एक अलग टीम के साथ इन परियोजनाओं की दोबारा जांच की जाएगी।

इन 17 परियोजनाओं को तीन मापदंडों के आधार पर चुना गया है, वह हैं 500 करोड़ रुपये से अधिक की निर्माण लागत, 15 प्रतिशत से अधिक का टेंडर डिस्काउंट और 35 से 80 प्रतिशत के बीच भौतिक प्रगति।

इनमें कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा, गुजरात और उत्तर प्रदेश की ग्रीनफील्ड, एक्सेस-कंट्रोल्ड कारिडोर, बाईपास और सड़कों को चार या छह लेन का बनाने का काम शामिल है।

विशेषज्ञों की टीम इन परियोजनाओं में स्वीकृत ड्राइंग, टेक्निकल स्पेसिफिकेशन, कान्ट्रैक्ट की शर्तों और प्रोजेक्ट-स्पेसिफिक क्वालिटी प्लान के आधार पर निर्माण कार्य की जांच करेंगी। वे निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, काम करने के तरीके, निर्माण की विधियों, सैंपलिंग व टेस्टिंग के रिकार्ड की जांच भी करेंगी।

साथ ही निरीक्षण में सड़क सुरक्षा के उपाय, ट्रैफिक मैनेजमेंट और पर्यावरण से जुड़े सुरक्षा उपाय भी शामिल होंगे। जो काम तय मानकों के अनुसार नहीं होगा, उसकी पहचान की जाएगी और लागू अनुबंध प्रविधानों के अनुसार सुधार के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

NHAI ने एई, आइई और सुपरविजन कंसल्टेंट पर भी कसा शिकंजा

राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के निर्माण में कैटेस्ट्राफिक फेल्योर यानी सुधारी न जा सकने वाली बड़ी खामी के मामले में ठेकेदार फर्म की तरह ही अथारिटी इंजीनियर, इंडिपेंडेंट इंजीनियर और सुपरविजन कंसल्टेंट की भी जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई का प्रविधान एनएचएआइ ने किया है।

बुधवार को इस संबंध में प्राधिकरण ने दिशा-निर्देश जारी कर दिए। इसमें कहा गया है कि इन एजेंसियों या व्यक्तियों पर डिजाइन और ड्राइंग की समीक्षा, नियमित निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण लागू कराने और सुरक्षा मानकों की निगरानी का जिम्मा होता है, इसलिए अब किसी भी परियोजना में बड़ी खामी होने पर इनके सुपरविजन में कमी होने की आशंका को भी देखा जाएगा।

एनएचएआई ने खामियों की श्रेणियों को तय करते हुए प्रविधान किया है कि ऐसे मामले पाए जाने पर टीम लीडर और संबंधित व्यक्ति को प्रोजेक्ट से हटाया जा सकता है। उन्हें अधिकतम दो वर्ष के लिए प्रतिबंधित किया जा सकता है। कंसल्टेंट फर्म को मंत्रालय और उसके अधीन एजेंसियों के एई, आइई और एससी निविदाओं में दो वर्ष तक भाग लेने से रोका जा सकता है।

इसके अलावा यह प्रविधान भी पहली बार शामिल किया है कि परफार्मेंस बैंक सिक्योरिटी से 50 प्रतिशत तक की कटौती की जाएगी। वहीं, प्राधिकरण अपने विवेक से अनुबंध को निरस्त भी कर सकता है और संबंधित की रेटिंग में नेगेटिव मार्किंग की जाएगी।

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