NHAI का बड़ा फैसला: हाइवे पर वीडियो निगरानी सिस्टम में हुई लापरवाही तो लगेगा 1 लाख तक का जुर्माना
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने नेशनल हाईवे पर एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) की निष्क्रियता पर सख्त रुख अपनाया है।
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(यह तस्वीर AI से बनाई गई है)

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। नेशनल हाईवे की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण चरणबद्ध तरीके से पूरे हाईवे नेटवर्क को एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएमएस) से लैस कर रहा है।
इसका प्रमुख उद्देश्य सड़क सुरक्षा ही है, लेकिन विडंबना है कि जहां यह लागू हो चुका है, उनमें से कई परियोजनाओं पर एटीएमएस के उपकरण निष्क्रिय हैं।
ऑडिट और निरीक्षण में ऐसी कमियां सामने आने के बाद खुद NHAI चिंतित है और इसे सड़क सुरक्षा से समझौता मानते हुए नियमों को सख्त करने का निर्णय किया है।
प्राधिकरण ने एटीएमएस में कमियां पाए जाने पर नेशनल हाईवे परियोजनाओं के सभी मोड बिल्ट, आपरेट ट्रांसफर (बीओटी), इंजीनयिरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) और हाइब्रिड एन्युटी माडल (एचएएम) में अर्थदंड का प्रविधान शामिल किया है।
सड़क सुरक्षा से समझौता नहीं: NHAI
एनएचएआई ने नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि यातायात निगरानी और प्रवर्तन को सख्त बनाने के लिए बड़ी संख्या में नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं पर एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को लागू किया गया है।
हालांकि, निरीक्षण और आडिट के माध्यम से यह देखा गया है कि ऐसी कई परियोजनाओं पर एटीएमएस के आपरेशन एंड मेंटिनेंस (ओ एंड एम) की पर्याप्त निगरानी नहीं की जा रही है। इसके कारण महत्वपूर्ण एटीएमएस उपकरणों की गंभीर निष्क्रियता सामने आई है।
एनएचएआई ने पाया है कि इस लापरवाही के कारण अपेक्षा के अनुरूप परिणाम नहीं मिले हैं, जिसके लिए एटीएमएस लागू किया गया था। यह सड़क सुरक्षा से समझौता है।
एनएचएआई ने निर्णय किया है कि जिन परियोजनाओं में के सर्विस लेवल रिक्वायरमेंट (एसएलआर) या सर्विस लेवल एग्रीमेंट (एसएलए) में एटीएमएस के संचालन व रखरखाव के संबंध में पैनाल्टी का प्रविधान नहीं है, उन पर भी इन्हीं दरों से जुर्माना लागू होगा।
स्पष्ट किया गया है कि प्रोजेक्ट में भुगतान की अविध कभी की भी निर्धारित हो, लेकिन एटीएमएस उपकरणों में कमी पाए जाने पर अर्थदंड की कटौती हर तिमाही में होगी।
यह होगा दंड प्रविधान
- कैमरा, आटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्नीजिशन, वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन, व्हीकल स्पीड डिटेक्शन सिस्टम आदि समय पर न चलने पर पांच हजार रुपये प्रति दिन प्रति उपकरण।
- कंट्रोल रूम में वीडिया वाल उपलब्ध न होने पर 50 हजार रुपये प्रति सप्ताह प्रति कंट्रोल रूम।
- कैमरा फीड दिखाई न देने पर पांच हजार रुपये प्रति कैमरा प्रति दिन।
- एक्सीडेंट जोन वीडिया रिकार्डिंग उपलब्ध न होने पर 25 हजार रुपये प्रति घटना।
- साफ्टवेयर का लाइसेंस एक्सपायर पाए जाने पर 25 हजार रुपये प्रति सप्ताह।
- वीडियो स्टोरेज निर्धारित क्षमता से कम मिलने पर एक लाख रुपये प्रति सप्ताह।
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