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NHAI पर दिखा सुप्रीम कोर्ट का असर, हर सौ किलोमीटर पर बनेगा एक 'पशु आश्रय स्थल'; SOP जारी

Published: Thu, 17 Sep 2026 08:14 PM (IST)Updated: Thu, 17 Sep 2026 08:18 PM (IST)

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राष्ट्रीय राजमार्गों से बेसहारा पशुओं को हटाने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है।

बेसहारा पशुओं को राष्ट्रीय राजमार्गों से हटाने की नई SOP जारी

बेसहारा पशुओं को राष्ट्रीय राजमार्गों से हटाने की नई SOP जारी

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजमार्गों पर बेसहारा पशुओं की समस्या देश के कई राज्यों में है। इनके कारण होने वाले हादसों पर स्वत: संज्ञान लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का पालन करते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) बनाकर राष्ट्रीय राजमार्गों से बेसहारा पशुओं को हटाने और उन्हें आश्रय स्थल तक पहुंचाने व पालन तक की जिम्मेदारी तय कर दी है।

हाईवे के संचालन से संबंधित एजेंसियों का जिम्मा इन पशुओं को हाईवे से सुरक्षित हटाने का होगा। राज्य सरकार व जिला प्रशासन का जिम्मा प्रति सौ किलोमीटर (संवेदनशील हिस्सों में 50 किलोमीटर) के दायरे में आश्रय स्थल, पशु बाड़ा या गौशाला स्थापित करने व संचालित करने का होगा।

बेसहारा पशुओं को राष्ट्रीय राजमार्गों से हटाने की तैयारी 

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा राज्यों को भेजी गई एसओपी के अनुसार भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) या नेशनल हाईवे के संचालन व रखरखाव से संबंधित एजेंसी द्वारा नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर उन स्थलों को चिह्नित किया जाएगा, जहां बेसहारा पशु अधिक पाए जाते हैं। ऐसे स्थलों को पीएम गति-शक्ति प्लेटफार्म पर चिह्नित किया जाएगा।

हाईवे से इन पशुओं को सुरक्षित हटाकर आश्रय स्थल, पशु बाड़ा या गौशाला तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी इन एजेंसियों की होगी और परिवहन खर्च भी यही वहन करेंगी। वहीं राज्य सरकारों के माध्यम से जिला प्रशासन, स्थानीय निकाय या अन्य संबंधित विभाग प्रति सौ किलोमीटर पर एक आश्रय स्थल या गौशाला चिह्नित करेंगे या स्थापित करेंगे।

हाईवे एजेंसियों और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी तय

इनके संचालन व रखरखाव की जिम्मेदारी राज्य या जिला प्रशासन के पास होगी। जहां बेसहारा पशु अधिक पाए जाते हैं, वहां 50 किलोमीटर के दायरे में आश्रय स्थल बनाने होंगे। राज्य सरकारों को परिवहन की व्यवस्था करनी होगी।

नेशनल हाईवे द्वारा इस व्यवस्था का इस्तेमाल करते हुए जितने भी पशु आश्रय स्थल भेजे जाएंगे, उनका परिवहन भाड़ा प्रति पशु के हिसाब से राज्य तय करेंगे और एनएच से संबंधित एजेंसी उसका भुगतान करेगी।

समन्वय और निगरानी की भी होगी व्यवस्था

  • रूट पेट्रोल वाहन या उपलब्धता पर एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से चौबीसों घंटे ऐसे क्षेत्र की निगरानी की जाएगी। कहीं भी पशु दिखाई देते ही तुरंत जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) लोकेशन सहित उसकी जानकारी नोडल अधिकारी को दी जाएगी।
  • फील्ड आफिसर हाईवे के खंडवार स्थान, समय और पशु के प्रकार की जानकारी सहित हाटस्पाट की मैपिंग करेंगे। इन स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे, बैरियर, प्रकाश व्यवस्था, साइनेज, तार फेंसिंग आदि के सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। हर छह माह में इन हाटस्पाट की समीक्षा होगी।
  • एनएच एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन, जिला हाईवे सुरक्षा टास्क फोर्स के साथ मासिक समन्वय बैठक होगी।
  • राज्यों को स्टेट लेवल नोडल अथारिटी बनानी होगी, जो कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय व एनएचएआइ के साथ नीतिगत समन्वय करेगी।
  • राज्यों को आश्रय स्थल का रिकार्ड रखने के साथ ही इन पशुओं के मालिकों का पता लगाकर राज्यों में लागू कानून के अनुरूप उन पर जुर्माना लगाना होगा।

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