राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। रात्रि भत्ता और अन्य मांगों को लेकर देशभर में स्टेशन मास्टर आंदोलन कर रहे हैं। रेलवे बोर्ड ने रात्रि भत्ता के लिए वेतन की सीमा निर्धारित कर दी है जिसका स्टेशन मास्टर विरोध कर रहे हैं। रेल परिचालन में किसी तरह की बाधा पहुंचाए उनका आंदोलन चल रहा है।

इसी कड़ी में 20 से 26 अक्टूबर तक काला सप्ताह मनाया जा रहा है जिसमें स्टेशन मास्टर बांहों पर काली पट्टी बांधकर ड्यूटी कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो आने वाले दिनों में आंदोलन तेज कर दिया जाएगा।

ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन (आइस्मा) के दिल्ली मंडल अध्यक्ष नरेंद्र कुमार का कहना है कि रेलवे बोर्ड के आदेश के अनुसार 43600 रुपये तक मूल वेतन वालों को ही रात्रि भत्ता दिया जाएगा। बोर्ड के इस आदेश का देशभर के 39000 स्टेशन मास्टर विरोध कर रहे हैं।

सबसे पहले आइस्मा के पदाधिकारियों ने रेलवे बोर्ड के अधिकारियों को ईमेल भेजकर विरोध जताया था। दूसरे चरण में रात की ड्यूटी के दौरान में मोमबत्ती जलाकर विरोध जताया गया था। अब तीसरे चरण में काला सप्ताह मनाया जा रहा है। यदि रेल प्रशासन ने अपना आदेश वापस नहीं लिया तो स्टेशन मास्टर 31 अक्टूबर को 12 घंटे की भूख हड़ताल करेंगे।

आंदोलनकारियों का कहना है कि स्टेशन मास्टर विपरीत परिस्थितियों में काम करते हैं। कोरोना काल में भी स्टेशन मास्टर अपनी जान जोखिम में डालकर जिम्मेदारी ईमानदारी पूर्वक निभा रहे हैं जिससे कि रेल परिचालन में किसी तरह की दिक्कत नहीं हो। इस स्थिति में रात्रि भत्ता से उन्हें वंचित करना अनुचित है। उन्होंने स्टेशन मास्टर को 50 लाख रुपये का बीमा देने और रेलवे के निजीकरण व निगमीकरण बंद करने की भी मांग की है। 

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