नई दिल्ली [अतुल पटैरिया]। अहमद पठान और उनके परिजनों के लिए इससे बड़ी ईदी शायद कुछ और न हो। छह माह से बिछुड़ा उनका बेटा नजीर उन्हें ठीक ईद से एक दिन पहले मिल गया। मानसिक तौर पर कमजोर नजीर को उसके घरवालों तक पहुंचाने के लिए पुणे की संस्था स्माइल प्लस फाउंडेशन ने एक वीडियो फेसबुक पर पोस्ट किया था। माहे रमजान में इस वीडियो को 46 लाख लोगों ने देखा। 46 हजार लोगों ने शेयर किया। 82 हजार लोगों ने कमेंट कर दुआ की और डेढ़ लाख लोगों ने लाइक किया। नतीजा यह रहा कि ईद से ठीक एक दिन पहले नजीर अपने घर वालों तक सकुशल पहुंच गया।

बुलढाणा, महाराष्ट्र के पिप्पलगांव निवासी अहमद पठान का 25 साल का बेटा नजीर छह माह से लापता था। मंदबुद्धि होने के कारण उसे घर के एक कमरे में जंजीर से बांध कर रखा जाता था। दो माह पहले नजीर को पुणे की स्वयंसेवी संस्था स्माइल प्लस सोशल फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं ने महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के जालना नगर में सड़कों पर घूमते हुए देखा। यह संस्था महाराष्ट्र में बेसहारा विक्षिप्तों के हितों के लिए संघर्षरत है।

संस्था के प्रमुख पुणे निवासी योगेश मालखारे ने दैनिक जागरण को बताया कि पिछले माह उनके सहयोगियों को जालना में यह युवक सड़कों पर भटकते हुए मिला। संस्था ने उसे रेस्क्यू करते हुए स्थानीय अदालत में पेश किया और वहां से मेंटल हॉस्पिटल में उसे भर्ती कराने की अनुमति हासिल की। युवक को पुणे स्थित मेंटल हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया गया। इस बीच युवक का एक वीडियो संस्था ने फेसबुक पर पोस्ट किया और नजीर की पहचान का पता लगाने के लिए लोगों से अपील की।

योगेश बताते हैं कि फेसबुक पर यह पोस्ट वायरल हो गया। रमजान माह में लोगों ने नजीर के लिए दुआएं कीं और पोस्ट को शेयर किया। एक माह के अंदर नजीर की पहचान पुख्ता हो गई। बुलढाणा के एक ऑटो ड्राइवर ने संस्था को फोन किया। बताया कि फेसबुक पोस्ट में दिख रहा मंदबुद्धि युवक बुलढाणा के पिप्पलगांव का है। फेसबुक पर यह जानकारी शेयर की गई।

नजीर के घरवालों का पता चल गया। उन्हें नजीर के बारे में जानकारी दे दी गई। ईद से ठीक एक दिन पहले यानी शुक्रवार को नजीर के पिता अहमद पठान नजीर तक पहुंच गए। योगेश ने बताया कि अस्पताल से सप्ताह भर की छुट्टी दिलाकर नजीर को उसके परिजनों के हवाले कर दिया गया है। ईद के बाद वे उसे वापस अस्पताल में ले आएंगे, जहां उसका इलाज चलेगा।

नजीर के पिता अहमद ने बताया कि वे बहुत गरीब हैं। नजीर का इलाज कराना उनके बूते की बात नहीं थी, लिहाजा पिछले छह साल से उसे जंजीर से बांध कर रखते थे। नजीर को वापस पाकर उसका पूरा परिवार बेहद खुश है। उन्हें उम्मीद है कि अब अस्पताल में इलाज के बाद नजीर पूरी तरह ठीक हो जाएगा और हमेशा के लिए उनके पास वापस लौट आएगा। 

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Posted By: Sanjay Pokhriyal