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मैसुरु दशहरा के दौरान दलित मंत्रियों को पूजा से रोकने पर गहराया विवाद, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दिए जांच के आदेश

Published: Thu, 22 Oct 2026 06:37 PM (IST)

मैसुरु दशहरा के दौरान तीन दलित मंत्रियों को 'नंदी ध्वज पूजा' में शामिल होने से रोकने का आरोप पुलिस अधीक्षक पर लगा है।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने घटना की उच्च-स्तरीय जांच का निर्देश दिया

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने घटना की उच्च-स्तरीय जांच का निर्देश दिया

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जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। विश्व प्रसिद्ध मैसुरु दशहरा के ऐतिहासिक पर्व पर एक दुर्भाग्यपूर्ण और संवेदनशील घटना ने तूल पकड़ लिया है, जिससे कर्नाटक के राजनीतिक हलकों और सामाजिक संगठनों के बीच आक्रोश देखा जा रहा है।

मैसुरु पैलेस परिसर में स्थित कोट आंजनेय स्वामी मंदिर के पास तैनात पुलिस अधीक्षक सी.बी. ऋष्यांत पर तीन दलित मंत्रियों को 'नंदी ध्वज पूजा' में शामिल होने से कथित तौर पर रोकने का गंभीर आरोप लगा है।

इस घटना ने जनप्रतिनिधियों के सम्मान और सामाजिक न्याय के प्रति प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को घटना की उच्च-स्तरीय जांच करने का निर्देश दिया है।

उधर, इस पूरे प्रकरण पर भाजपा नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया कि सामाजिक न्याय को लेकर राज्य सरकार का पाखंड उजागर हो गया है।

दलित मंत्रियों को पूजा से रोकने का आरोप

मंत्रियों के साथ तीखी बहस और सीएम का हस्तक्षेप प्रोटोकाल के अनुसार, मुख्यमंत्री के साथ आने वाले मंत्रियों और विधायकों को इस पारंपरिक अनुष्ठान में भाग लेने की अनुमति होती है।

लेकिन, बुधवार को जब संस्कृति मंत्री शिवराज तंगदगी, कृषि मंत्री पी.एम. नरेंद्र स्वामी और मुजराई मंत्री के.एस. बसावन्तेप्पा पूजा स्थल की ओर बढ़ रहे थे, तो पुलिस अधीक्षक ने उन्हें रोक दिया।

आईएएनएस के अनुसार, इस दौरान मंत्रियों और पुलिस अधिकारी के बीच तीखी बहस हुई, जिसके वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने के बाद जनता में भी खासी नाराजगी है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अंततः मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने खुद हस्तक्षेप किया और अधिकारियों को मंत्रियों को पूजा में शामिल होने की अनुमति देने का निर्देश दिया।

सीएम शिवकुमार बोले, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई प्रेट्र के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम से आहत सरकार ने इसे बेहद गंभीरता से लिया है।

मंत्रियों और पुलिस अधिकारी के बीच तीखी बहस

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई है कि मंत्रियों को उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास किया गया। मुख्यमंत्री कार्यालय के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने और जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इस वाकये ने एक बार फिर निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकारों, पिछड़ा वर्ग के नेताओं के साथ व्यवहार और प्रशासनिक मर्यादाओं को लेकर राज्य में एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

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