सुपौल के सिमरी में दशहरा मेले का अखाड़ा बना रोमांच का केंद्र, देशभर के पहलवानों के दांव-पेच देखने उमड़ी भीड़
सरायगढ़-भपटियाही प्रखंड के सिमरी गांव में शारदीय दशहरा मेले के अवसर पर तीन दिवसीय कुश्ती प्रतियोगिता आयोजित हुई।

सुपौल के सिमरी गांव में आयोजित कुश्ती प्रतियोगिता के दौरान अखाड़े में दांव-पेच दिखाते पहलवान और जुटी भीड़
HighLights
तीन दिवसीय कुश्ती प्रतियोगिता सिमरी गांव में आयोजित।
देशभर के पहलवानों ने दिखाए पारंपरिक दांव-पेच।
दशहरा मेले में उमड़ी भारी भीड़ ने उठाया आनंद।
संवाद सूत्र, सरायगढ़ (सुपौल)। सरायगढ़-भपटियाही प्रखंड क्षेत्र के सिमरी गांव में शारदीय दशहरा मेला के पावन अवसर पर तीन दिवसीय रोमांचक कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में देश के विभिन्न हिस्सों से आए मंझे हुए पहलवानों ने हिस्सा लिया और अपने पारंपरिक दांव-पेच तथा जबरदस्त शारीरिक कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। अखाड़े में पहलवानों के बीच हुए एक से बढ़कर एक मुकाबलों को देखने के लिए आसपास के ग्रामीण इलाकों से भारी संख्या में दर्शक पहुंचे थे।
दशहरा मेला के दौरान आयोजित इस कुश्ती प्रतियोगिता ने ग्रामीण आंचल में खेल और पारंपरिक मनोरंजन के प्रति लोगों की गहरी रुचि को एक बार फिर जीवंत कर दिया।
मुकाबले के दौरान जब पहलवानों ने एक-दूसरे को अखाड़े में चुनौती दी, तो पूरा माहौल तालियों की गड़गड़ाहट और उत्साह से गूंज उठा। दर्शकों ने भी पूरे जोश के साथ पहलवानों का हौसला बढ़ाया।
पारंपरिक खेलों से मिलती है नई पीढ़ी को प्रेरणा
सिमरी गांव में दशहरा पर्व पर कुश्ती का यह आयोजन हमेशा से स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा है। मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के दर्शन-पूजन के साथ-साथ इस पारंपरिक कुश्ती मुकाबले का भी जमकर आनंद उठाया।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के पारंपरिक खेलों का आयोजन हमारी खेल संस्कृति को जीवित रखने और नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध परंपराओं से परिचित कराने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ऐसे आयोजनों से न केवल स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी क्षमता दिखाने का सुनहरा अवसर मिलता है, बल्कि दूर-दराज से आने वाले पहलवानों के बीच भाईचारा और खेल भावना को भी बढ़ावा मिलता है। लगातार तीन दिनों तक चले इस सफल आयोजन ने इस बार के दशहरा मेला की रौनक में चार चांद लगा दिए।
