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कुल्लू में आज से देव महाकुंभ, अंतरराष्ट्रीय दशहरा महोत्सव में 366 साल से निभाई जा रही देव परंपरा

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Wed, 21 Oct 2026 11:36 AM (IST)

हिमाचल प्रदेश का अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव बुधवार से शुरू हो रहा है, जिसमें देव आस्था, लोक परंपराएं और वैश्विक संस्कृति का अनूठा संगम होगा।

कुल्लू दहशरा में भगवान रघुनाथ जी का रथ व अन्य देवता और जनता। जागरण आर्काइव

कुल्लू दहशरा में भगवान रघुनाथ जी का रथ व अन्य देवता और जनता। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. आज से शुरू हुआ सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव।

  2. भगवान रघुनाथ की रथयात्रा, 347 देवी-देवताओं का मिलन।

  3. राज्यपाल मुख्य अतिथि, अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक दल भी शामिल।

संवाद सहयोगी, कुल्लू। हिमाचल प्रदेश के अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में बुधवार से देव आस्था, लोक परंपराओं और वैश्विक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। सात दिवसीय उत्सव में राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता मुख्य अतिथि होंगे। पहले दिन भगवान रघुनाथ जी की भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। इस दौरान देव मिलन आकर्षण होगा।

इस बार 347 देवी-देवताओं को निमंत्रण दिया गया है। वर्ष 2025 में दशहरा उत्सव समिति ने 332 देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा गया था। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू 26 अक्टूबर को उत्सव में शामिल होंगे। 

1660 में राजा ने शुरू की थी देव निमंत्रण की परंपरा

कुल्लू दशहरा में देवी-देवताओं के आगमन की शुरुआत वर्ष 1660 में 366 साल पहले हुई थी। तब राजा की ओर से देवी-देवताओं को निमंत्रण दिया जाता था। अब यह जिम्मेदारी प्रशासन निभा रहा है। वर्ष 2022 में 304, वर्ष 2023 में 315, वर्ष 2024 में 317 और वर्ष 2025 में 274 देवी-देवताओं ने दशहरा उत्सव में उपस्थिति दर्ज करवाई थी।

347 देवी-देवता को है निमंत्रण

पिछले वर्ष प्रशासन की जांच में 347 देवी-देवता पंजीकृत पाए गए। देवी-देवताओं की सूची में बदलाव का अधिकार देवी-देवता कारदार संघ के पास है। संघ की स्वीकृति मिलने के बाद ही प्रशासन नए देवी-देवताओं के पंजीकरण पर विचार होता है। पंजीकृत देवी-देवताओं को ही नजराना राशि दी जाती है। कुछ देवी-देवता लंबे समय से नहीं आते लेकिन उन्हें भी निर्धारित राशि भेजी जाती है। 

देवी-देवताओं की दो श्रेणियां

देवी-देवताओं को ऐतिहासिक राजस्व व्यवस्था के आधार पर माफीदार और गैर माफीदार श्रेणी में बांटा गया है। जिन देवी-देवताओं के नाम पर भूमि थी और उसके राजस्व कर में छूट मिलती थी, उन्हें माफीदार कहा जाता था। जिनकी भूमि पर राजस्व कर लिया जाता था, वे गैर माफीदार श्रेणी में आते थे।

1265 जवानों ने संभाली सुरक्षा व्यवस्था

कुल्लू दशहरा में सुरक्षा का जिम्मा 1265 जवान संभाल रहे हैं। पूरे मेला क्षेत्र की 155 सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से निगरानी हो रही है। सांस्कृतिक संध्याओं में इंडोनेशिया, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, अमेरिका, रूस, थाईलैंड, मलेशिया, मिस्र, श्रीलंका और नेपाल के सांस्कृतिक दल भाग लेंगे।

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