मानसून सत्र 2026: पंद्रह दिनों में पूरी हो सकती है परिसीमन पारित कराने की रणनीति, महिला आरक्षण को लेकर क्या है सरकार का प्लान?
मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन को पारित कराने की रणनीति अगले 15 दिनों में पूरी हो सकती ...और पढ़ें
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महिला आरक्षण और परिसीमन पर सरकार का प्लान (फोटो-पीटीआई)
HighLights
महिला आरक्षण विधेयक मानसून सत्र में पारित कराने की तैयारी।
परिसीमन 2011 जनगणना के आधार पर, 2029 से लागू होगा।
एनडीए विपक्षी समर्थन से दो-तिहाई बहुमत जुटाने में जुटा।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन और 2029 के चुनाव से ही लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण से संबंधित संशोधन विधेयक को मानसून सत्र में पारित कराने की रणनीति अगले पंद्रह दिनों के अंदर पूरी हो जाएगी।
एक तरफ जहां तृणमूल कांग्रेस में टूट और शिवसेना (यूबीटी) में संभावित टूट के कारण राजग का आंकड़ा बढ़ गया है। वहीं सूत्रों के अनुसार कुछ क्षेत्रीय विपक्षी दलों के साथ वार्ता भी सकारात्मक चल रही है। सब सही रहा तो जुलाई मध्य के आसपास शुरू होने वाले मानसून सत्र की शुरूआत में ही विधेयक पारित कराया जा सकता है।
गौरतलब है कि बजट सत्र के विस्तारित भाग में पेश संशोधन विधेयक दो तिहाई बहुमत के अभाव में गिर गया था। लेकिन गृहमंत्री अमित शाह ने विधेयक सदन से वापस नहीं लिया है।
मानसून सत्र में फिर आएगा महिला आरक्षण बिल
सूत्रों के अनुसार बदले माहौल में विपक्षी दलों और सदस्यों के भाव बदल रहे हैं। व्यक्तिगत रूप से हर सदस्य हर राज्य में बढ़ने वाले 50 फीसद सीट को लेकर उत्साहित है क्योंकि तभी उनकी खुद की सीट सुरक्षित रहेगी।
दक्षिण के राज्यों को खासतौर पर यह उत्साहित करता है। उस वक्त द्रमुक ने केवल विधानसभा चुनाव के कारण इसका विरोध किया था। अब जबकि पार्टी चुनाव हार चुकी है और विपक्ष के आइएनडीआइए से बाहर आ चुकी है तो केवल इसका आकलन किया जा रहा है कि अब रुख बदलने से पार्टी पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव तो नहीं पड़ेगा।
लोगों के विचार भी लिए जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में अगर द्रमुक के 22, तृणमूल बागी खेमे के 20 और शिवसेना के बागी 6 को जोड़ लिया जाए तो राजग 540 के सदन में 346 तक पहुंच चुका है। पिछली बार राजग को 298 वोट मिले थे।
सूत्रों का कहना है कि आगामी चुनाव को देखते हुए सपा के सीधे समर्थन की आशा कम है लेकिन सपा समेत कांग्रेस और दूसरे दलों के भी कई सदस्य ऐसे हैं जो वोटिंग के लिए मौजूद ही न हों।
गणित के हिसाब से अगर 21 सदस्य गैर हाजिर रहे 360 की बजाय 346 ही दो तिहाई बहुमत हो जाएगा। हालांकि वोटिंग के लिए व्हिप जारी होता है लेकिन पिछली बार भी 12 सदस्य गैर हाजिर थे।
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