भारत विश्व की आत्मा, आध्यात्मिक ज्ञान ने भौतिकवाद के तूफानों से बचाया- मोहन भागवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने नागपुर में 'पंचकल्याणक प्रतिष्ठा गजरथ महोत्सव' में कहा कि भारत 'विश्व की आत्मा' है।
HighLights
भारत 'विश्व की आत्मा' है, मोहन भागवत ने कहा।
आध्यात्मिक ज्ञान ने भारत को भौतिकवाद से बचाया।
संतों का ज्ञान भारत की असली ताकत है।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने नागपुर में आयोजित 'पंचकल्याणक प्रतिष्ठा गजरथ महोत्सव' में संतों की एक सभा को संबोधित करते हुए भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक श्रेष्ठता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत ''विश्व की आत्मा'' है और जब तक भारत का अस्तित्व है, तब तक पूरी दुनिया सुरक्षित रहेगी।
दुनिया भर में भौतिकवाद और उपभोक्तावाद के तूफानों ने कई समाजों को नष्ट कर दिया है, लेकिन भारत इन चुनौतियों के बीच भी अडिग रहा है। भागवत के अनुसार, भारत के पास वह आध्यात्मिक ज्ञान और बुद्धिमत्ता है जो अन्य देशों के पास नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि विश्व को एक शरीर माना जाए, तो भारत उसकी आत्मा के रूप में कार्य करता है।
इतिहास का हवाला देते हुए सरसंघचालक ने कहा कि ग्रीस, मिस्त्र और रोम जैसी प्राचीन सभ्यताएं समय के साथ लुप्त हो गईं, लेकिन भारत के अस्तित्व में कुछ ऐसा विशेष है कि इसे कभी मिटाया नहीं जा सका। उन्होंने इस निरंतरता का श्रेय हमारे पूर्वजों, संतों और महापुरुषों से प्राप्त ज्ञान को दिया।
उन्होंने कहा, '''हमारे अस्तित्व का रहस्य वह ज्ञान है जो हमें अपने संतों से मिला है। जब भी विश्व किसी संकट का सामना करता है, भारत ही आगे का रास्ता दिखाता है।''' उन्होंने संतों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उनके द्वारा फैलाया गया आध्यात्मिक ज्ञान ही भारत की असली ताकत है, जो देश को बाहरी प्रभावों से बचाए रखती है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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