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एनर्जी स्टोरेज के लिए ₹14,500 करोड़ की VGF स्कीम मंजूर; मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला

Published: Wed, 04 Nov 2026 10:36 PM (IST)

केंद्रीय कैबिनेट ने नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण के लिए ₹14,500 करोड़ की VGF स्कीम को मंजूरी दी, जिससे 92 गीगावाट घंटा ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज क्षमता विकसित होगी।

एनर्जी स्टोरेज के लिए 14,500 करोड़ रुपये की स्कीम को मंजूरी

एनर्जी स्टोरेज के लिए 14,500 करोड़ रुपये की स्कीम को मंजूरी

HighLights

  1. ₹14,500 करोड़ की VGF स्कीम को कैबिनेट की मंजूरी।

  2. 92 गीगावाट घंटा एनर्जी स्टोरेज क्षमता का विकास होगा।

  3. दुर्लभ खनिजों के प्रसंस्करण को भी मिली स्वीकृति।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में देश में नवीकरणीय ऊर्जा के बड़े पैमाने पर एकीकरण को गति देने के लिए 14,500 करोड़ रुपये की वाइबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) स्कीम को मंजूरी दे दी गई।

इस स्कीम के तहत 92 गीगावाट घंटा (जीडब्लूएच) की ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज सिस्टम क्षमता विकसित की जाएगी।यानी इस स्टोरेज को राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ा जाएगा।

यह पांच वर्षीय स्कीम वित्त वर्ष 2030-31 तक चलेगी। इसके तहत 30 जीडब्लूएच बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस), 60 जीडब्लूएच पंपड स्टोरेज प्रोजेक्ट्स और 2 जीडब्लूएच उभरती हुई स्टोरेज तकनीकों को समर्थन दिया जाएगा।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि स्कीम का उद्देश्य अभी तक कमीशन न हुई 92 जीडब्लूएच एनर्जी स्टोरेज क्षमता का विकास करना है।

इससे देश में मौजूदा ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज क्षमता के 170 फीसद के बराबर नई क्षमता सृजित होगी और 2031-32 तक आवश्यक 411 जीडब्लूएच की ग्रिड-स्केल स्टोरेज जरूरत को पूरा करने में मदद मिलेगी।

वैष्णव ने बताया कि स्कीम से बिजली क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी, नवीकरणीय ऊर्जा का बड़े पैमाने पर एकीकरण आसान होगा और विश्वसनीय, सस्ती तथा चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

सरकार की तरफ से बताया गया है कि स्कीम के तहत कुल 97,600 करोड़ रुपये का अनुमानित निवेश होगा। एनर्जी स्टोरेज क्षमता का आवंटन टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा।

सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियां बीईएसएस व हाइड्रो पीएसपी प्रोजेक्ट्स के लिए वीजीएफ सहायता हासिल कर सकेंगी।

जबकि वैकल्पिक तकनीकों पर आधारित परियोजनाएं सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की इकाइयां लागू कर सकेंगी। स्कीम का एक प्रमुख उद्देश्य घरेलू एनर्जी स्टोरेज मैन्यूफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करना भी है ताकि इस क्षेत्र में आयातित उपकरणों पर निर्भरता कम हो सके।

स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने के लिए बीईएसएस प्रोजेक्ट्स में न्यूनतम 40 फीसद घरेलू उपकरण की बाध्यता लागू होगा। इससे भारतीय उद्योग को अवसर मिलेंगे और बैटरी निर्माण के लिए पहले से चल रही सप्लाई-साइड प्रोत्साहन योजनाओं को भी बल मिलेगा।

कैबिनेट ने एक अन्य फैसले के तहत 2814 करोड़ रुपये की लागत से दुर्लभ खनिजों के प्रसंस्करण की व्यवस्था से संबंधी एक प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है।

क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग दुनिया के कुछ चुनिंदा स्थानों पर केंद्रित है। इससे सप्लाई चेन को भू-राजनीतिक व्यवधान, मूल्य अस्थिरता और संभावित आपूर्ति प्रतिबंधों का खतरा रहता है जो राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक संप्रभुता पर गंभीर असर डाल सकता है।

कैबिनेट का फैसला भारतीय हितों की रक्षा करने में काफी प्रभावी भूमिका निभा सकता है। पीएम नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया साइट एक्स पर कैबिनेट के फैसले के संदर्भ में लिखा है कि, 'क्या आप महसूस करते हैं कि भारत को उन क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना चाहिए जो हमारे भविष्य को शक्ति देते हैं? मुझे तो ऐसा बिल्कुल नहीं लगता।'

पीएम मोदी ने आगे लिखा है कि लिथियम, निकेल और कोबाल्ट इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र के लिए जरूरी हैं लेकिन भारत अभी भी रिफाइंड सामग्री के आयात पर काफी निर्भर है।

कैबिनेट के उक्त फैसले के मुताबिक नई क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग प्लांट्स लगाई जाएंगी, निवेश को बढ़ावा देने के लिए पूंजी सब्सिडी दी जाएगी, घरेलू वैल्यू एडिशन बढ़ाया जाएगा और सप्लाई चेन मजबूत की जाएंगी।

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