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'नीट विवाद पर सरकार चर्चा के लिए तैयार, छात्र हमारी प्राथमिकता'; पेपर लीक पर बोले रिजिजू

Published: Wed, 22 Jul 2026 01:00 PM (IST)Updated: Wed, 22 Jul 2026 01:08 PM (IST)

नीट पेपर लीक और छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों पर विपक्ष के हमलों के बाद सरकार संसद में इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार हो गई है।

HighLights

  1. सरकार नीट पेपर लीक पर संसद में बहस को तैयार।

  2. किरेन रिजिजू ने लोकसभा में की घोषणा, विपक्ष के हमले तेज।

  3. छात्रों को सर्वोच्च प्राथमिकता, विस्तृत चर्चा की मांग।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। NEET पेपर लीक और छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों पर कार्रवाई को लेकर विपक्ष के केंद्र सरकार पर हमले तेज होने के बाद सरकार बुधवार को इस मुद्दे पर संसद में बहस के लिए तैयार हो गई।

विपक्ष की नारेबाजी और विरोध-प्रदर्शन के बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में घोषणा की कि सरकार नीट पेपर लीक के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। रिजिजू ने विपक्ष के हंगामे के बीच कहा, "छात्र हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। हम नीट पेपर लीक के मुद्दे पर सदन में विस्तृत चर्चा चाहते हैं।"

विपक्ष ने की प्रधानमंत्री के बयान की मांग

हालांकि, विपक्ष ने प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की बर्बरता का मुद्दा उठाया और प्रधानमंत्री से बयान की मांग की। विपक्ष का नेतृत्व कर रहे समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को प्रधानमंत्री के घर के बाहर हुए धरने का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री के घर पर धरना देने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि वह संसद में नहीं बोलते हैं।

अखिलेश ने पूछा, "पीएम युवाओं के मुद्दे पर संसद के बाहर बोलते हैं। वह सदन में बयान क्यों नहीं दे सकते?" उन्होंने कहा कि राजधानी की सड़कों पर सरकार के आदेश पर पुलिस ने छात्रों के साथ बेरहमी से मारपीट की और सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा विपक्ष

सरकार के बहस के लिए सहमत होने के बावजूद विपक्ष संसद में किसी भी चर्चा से पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की अपनी मांग पर अड़ा रहा। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा, "पहले जवाबदेही तय होनी चाहिए उसके बाद ही बहस हो सकती है। धर्मेंद्र प्रधान को सबसे पहले इस्तीफा देना चाहिए।"

स्पीकर ओम बिरला ने चर्चा शुरू करने की कोशिश करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही बहस चाहते थे, लेकिन विपक्ष के इस्तीफे की मांग पर अड़े रहने के कारण उन्हें सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

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