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उत्तर भारत की जेलें बन रहीं खालिस्तानी आतंकियों का भर्ती केंद्र, खुफिया एजेंसियों की रडार पर ISI मॉड्यूल के 'डेड ड्रॉप'

Published: Tue, 29 Sep 2026 08:28 AM (IST)

खुफिया एजेंसियों ने खालिस्तानी संगठन SFJ द्वारा उत्तर भारत की जेलों में नए गुर्गों की भर्ती की चेतावनी दी है, जिसमें ISI के 'डेड-ड्रॉप' तरीके का इस्तेमाल सामने आया है।

(यह तस्वीर एआई द्वारा जनरेट की गई है)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। खुफिया एजेंसियों ने एक बड़े खतरे को लेकर चेतावनी जारी की है, जिसमें प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ) द्वारा उत्तर भारत की जेलों को निशाना बनाने की बात सामने आई है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, यह संगठन जेलों में सेंध लगाकर नए गुर्गों की भर्ती करने की कोशिश कर रहा है।

यह मामला हाल ही में गिरफ्तार किए गए एक गुर्गे से पूछताछ के बाद खुला। उसने बताया कि जब वह पटियाला जेल में सजा काट रहा था, तभी उसे इस नेटवर्क में शामिल किया गया था। इतना ही नहीं, जेल के अंदर ही उसे आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू का संपर्क नंबर भी दिया गया था।

क्या है जासूसी का डेड-ड्रॉप तरीका?

जांच में सामने आया है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के मॉड्यूल से नकदी पहुंचाने, हथियार मुहैया कराने और साजिशों को अंजाम देने के लिए क्लासिक जासूसी पद्धति यानी डेड-ड्रॉप का तेजी से सहारा ले रहे हैं।

इसके तहत सीधे हाथों-हाथ लेन-देन करने के बजाय सुनसान हाईवे, सीमावर्ती क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में पहले से तय गुप्त ठिकानों पर सामान या पैसा छिपा दिया जाता है।

सीमा पार से ड्रोन या खुफिया कोरियर के जरिए भेजे गए हथियार और बेहिसाब नकदी की सटीक लोकेशन स्थानीय गुर्गों को सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए भेजी जाती है, जिससे विदेशों में बैठे मास्टरमाइंड जमीन पर काम करने वाले प्यादों से पूरी तरह सुरक्षित और अनजान बने रहते हैं।

कैदियों को निशाना बनाने की साजिश

जेलों का इस्तेमाल कर नेटवर्क फैलाने का यह तरीका 2016 के चर्चित नाभा जेलब्रेक की याद दिलाता है, जिसने आतंकी गुटों और जेल में बंद अपराधियों की साठगांठ की पोल खोली थी।

सलाखों के पीछे मौजूद कट्टरपंथी तत्व और उनके हैंडलर मुख्य रूप से उन बंदियों को अपना शिकार बनाते हैं जो आर्थिक रूप से बेहद कमजोर होते हैं या पहली बार छोटे-मोटे अपराधों में जेल पहुंचे होते हैं।

कानूनी पैरवी और आर्थिक मदद के अभाव में बेबस पड़े ऐसे कैदियों को पैसों और मदद का लालच देकर आसानी से अपने जाल में फंसा लिया जाता है और उनका ब्रेनवॉश कर देशविरोधी गतिविधियों के लिए तैयार किया जाता है।

दिल्ली-पंजाब में ग्रैफिटी मॉड्यूल का भंडाफोड़

हालिया कार्रवाई में सुरक्षा एजेंसियों ने SFJ समर्थित एक मॉड्यूल का पर्दाफाश करते हुए प्रीतपाल सिंह नामक ऑपरेटिव को गिरफ्तार किया, जिसका साल 2023 से ही खालिस्तानी गतिविधियों का इतिहास रहा है।

प्रीतपाल और उसके साथियों ने दिल्ली और पंजाब में कई सार्वजनिक स्थानों पर ब्रिक्स विरोधी और खालिस्तान समर्थक नारे लिखे थे और उसका वीडियो बनाकर पन्नू को भेजा था।

जेल में रहते हुए पन्नू का नंबर पाने वाले प्रीतपाल ने रिहाई के बाद तुरंत उससे संपर्क साधा और फरीदकोट-अमृतसर हाईवे पर बनाए गए एक डेड-ड्रॉप पॉइंट से 1.5 लाख की रकम हासिल की।

इस पैसे के दम पर उसने जेल में साथ रहे और जमानत पर बाहर आए एक अन्य कैदी को भी दिल्ली में देशविरोधी वारदातों को अंजाम देने के लिए अपने साथ जोड़ लिया।

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