'जेल में बीमार, बाहर आते ही विदेश में नौकरी के लिए फिट?', पूर्व DGP थाचनकारी की अर्जी पर केरलम हाई कोर्ट सख्त
केरल हाई कोर्ट ने पूर्व डीजीपी टॉमिन जे. थाचनकारी की विदेश में नौकरी करने की अर्जी पर सवाल उठाए हैं।

पूर्व DGP थाचनकारी की अर्जी पर केरलम हाई कोर्ट सख्त।
HighLights
हाई कोर्ट ने पूर्व DGP थाचनकारी की विदेश अर्जी पर सवाल उठाए।
जेल में बीमारी और बाहर विदेश जाने के दावे में विरोधाभास।
कोर्ट ने जेल अधीक्षक से थाचनकारी की मेडिकल रिपोर्ट मांगी।
डिजिटल डेस्क, तिरुवंतपुरम। केरलम हाई कोर्ट ने सोमवार को राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक टॉमिन जे . थाचनकारी की विदेश जाकर काम करने की अर्जी पर सवाल उठाए।
कोर्ट ने जेल में उनके द्वारा बताई गई बीमारियों और अब विदेश में नौकरी करने के लिए फिट होने के दावे के बीच विरोधाभास की ओर इशारा किया।
जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा, 'जब ये लोग जेल जाते हैं, तो गंभीर बीमारियों से घिर जाते हैं। लेकिन जैसे ही जेल से बाहर आते हैं, इन्हें सऊदी अरब या अमेरिका जाने में कोई समस्या नहीं होती। यह कैसे संभव है? लोग यही सोचेंगे कि न्यायपालिका ऐसे हाथों में है जिनके पास समझ ही नहीं है।'
जेल से बाहर आते ही UAE में नौकरी की अनुमति मांगी
कोट्टायम विजिलेंस कोर्ट ने 17 सितंबर को थाचनकारी को ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में 4 साल के कठोर कारावास और 30.84 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
हालांकि 15 अक्टूबर को केरल हाई कोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगाते हुए जुर्माने का 75 प्रतिशत हिस्सा जमा करने और 5 लाख रुपये के मुचलके पर उन्हें जमानत दे दी थी। जमानत की शर्तों के अनुसार वे बिना पूर्व अनुमति के देश नहीं छोड़ सकते थे।
जमानत मिलने के बाद थाचनकारी ने अदालतों में अर्जी देकर संयुक्त अरब अमीरात जाने की अनुमति मांगी। उन्होंने दलील दी कि वे शारजाह स्थित एक ज्वेलरी ग्रुप में ऑपरेशन्स मैनेजर के रूप में काम करते हैं और यदि वे तुरंत नहीं लौटे, तो उनकी नौकरी चली जाएगी।
इसके अलावा उन्होंने दुबई की एक आईटी कंसल्टेंसी में अपनी पार्टनरशिप का भी हवाला दिया और विदेश जाने को वित्तीय कारणों से जरूरी बताया।
विरोधाभास को नजरअंदाज नहीं कर सकती अदालत: हाई कोर्ट
जस्टिस बदरुद्दीन ने थाचनकारी के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जेल जाते ही तुरंत अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत महसूस होती है और रिहाई मिलते ही विदेश में कामकाज संभालने के लिए फिट हो जाते हैं। अदालत इस तरह के खुले विरोधाभास को नजर अंदाज नहीं कर सकती।
अदालत ने कहा कि यह परखना जरूरी है कि क्या वित्तीय कारणों का हवाला देकर विदेश में रोजगार की मांग वास्तव में उचित है या यह केवल एक बहाना है।
जेल अधीक्षक ने मांगी मेडिकल रिपोर्ट
हाई कोर्ट ने जेल अधीक्षक को निर्देश दिया है कि वे हिरासत के लगभग 4 हफ्तों के दौरान थाचनकारी के अस्पताल में भर्ती रहने का पूरा ब्यौरा पेश करें।
अदालत ने रिपोर्ट में स्पष्ट करने को कहा है कि पूर्व डीजीपी कुल कितने दिन जेल के अस्पताल में भर्ती रहे? उनका किन-किन बीमारियों के लिए इलाज किया गया? वे कितने दिन सामान्य बैरक में रहे और कितने दिन अस्पताल में?
अदालत ने फिलहाल थाचनकारी की विदेश जाने की अर्जी पर कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है और जेल अधीक्षक की रिपोर्ट मिलने के बाद ही इस पर विचार किया जाएगा।
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