यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 24, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सरकार चलाने को केजरीवाल के पांच फार्मूले
दिल्ली में सत्ता संभालने जा रहे अरविंद केजरीवाल ने यहां की सरकार चलाने का खाका पहले ही तैयार कर लिया ...और पढ़ें

नई दिल्ली [मुकेश केजरीवाल]। दिल्ली में सत्ता संभालने जा रहे अरविंद केजरीवाल ने यहां की सरकार चलाने का खाका पहले ही तैयार कर लिया है। सस्ती बिजली की चुनौती पूरा करने के लिए वह सरकार में आते ही एक साथ दो ऑडिट एजेंसियों को बिजली कंपनियों के खातों की जांच पूरी करने का आदेश देने का मन बना चुके हैं। इसी तरह दिल्ली के लोगों को फौरी राहत देने के लिए नई सरकार प्राइवेट स्कूलों में दाखिले और फीस की प्रक्रिया की भी तत्काल समीक्षा करेगी।
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आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को अपनी पार्टी के विधायकों के साथ भी अपनी कार्ययोजना को न सिर्फ साझा किया, बल्कि उसे आगे बढ़ाने की ट्रेनिंग भी दी। इनमें अधिकांश को सरकार के स्तर पर पूरा किया जाना है, लेकिन विभिन्न मामलों पर जनता की राय और भागीदारी के लिए पार्टी अपने विधायकों का लगातार उपयोग करेगी।
सरकार चलाने के इस फार्मूले को अंतिम रूप देने में टीम केजरीवाल पिछले सोमवार से ही जुटी हुई थी। इसने तय किया है कि सरकार बनते ही एक साथ दो ऑडिट संस्थानों से बिजली कंपनियों के खातों की जांच करवाएगी। जरूरत पड़ी तो कैग से दो महीने में ऑडिट पूरा करवाने के लिए खुद केजरीवाल अपने स्तर पर प्रयास करेंगे। इसके समांतर एक प्राइवेट ऑडिट एजेंसी से भी यह जांच करवाई जाएगी। इसी तरह दिल्ली में तुरंत असर दिखाने के लिए पार्टी ने प्राइवेट स्कूलों में दाखिले में होने वाली मनमानी को भी नियंत्रित करने का फैसला किया है। इसके लिए सरकार दाखिला प्रक्रिया की समीक्षा तो करेगी ही, साथ ही फीस निर्धारण व्यवस्था की भी तुरंत समीक्षा कर स्कूलों की मनमानी रोकने की कोशिश करेगी।
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इसी तरह अरविंद केजरीवाल ने स्वराज के अपने सिद्धांत के मुताबिक विधायकों को मोहल्ला सभा का पाठ पढ़ाना भी शुरू कर दिया है। इसके तहत सड़क या नाली बनवाने जैसे स्थानीय विकास के काम का हर फैसला उस मोहल्ले के सभी लोग मिलकर ही लेंगे। विधायक निधि का भी इस्तेमाल इसी तरह होगा। इनके अलावा प्रमुख नीतियों को लेकर मोहल्ला सभा में चर्चा करवा कर राय मंगवाई जाएगी। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि हर परिवार को रोजाना सात सौ लीटर पानी मुफ्त देने या जन लोकायुक्त बिल पास करवाने को लेकर पार्टी को महज सरकारी औपचारिकताओं और तकनीकी जरूरतों को पूरा करना होगा। जबकि दिल्ली में सस्ती बिजली मुहैया करवाने और प्राइवेट स्कूलों पर नकेल कसने के लिए इसे हर तरह से तैयार रहना होगा। सस्ती बिजली को विरोधी पार्टियां तो असंभव बता कर चुनौती देती ही आ रही हैं, 'आप' को भी लग रहा है कि अगर इस चुनौती को पूरा कर दिखाया तो देशभर में एक झटके में इसकी रोशनी बिखर सकती है।
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सुशासन के पांच केजरी-मंत्र :
1. सस्ती बिजली : दो महीने के अंदर बिजली कंपनियों की विशेष आडिट पूरी करवा कर दरें घटाना।
2. जन लोकायुक्त बिल : प्रस्तावित जन लोकपाल कानून में बताए गए लोकायुक्त बिल को पास करवाना।
3. मुफ्त पानी : दिल्ली जल बोर्ड के मुनाफे को मुफ्त पानी मुहैया करवाने में उपयोग करना।
4. स्कूल फीस कम करवाना : प्राइवेट स्कूलों में दाखिले और फीस निर्धारण की प्रक्रिया को समीक्षा कर दुरुस्त करना।
5. मोहल्ला सभा को सक्रिय करना : मोहल्ले में विकास के सभी काम स्थानीय जनता की भागीदारी से ही तय करने के लिए मोहल्ला सभा को सक्रिय करना।
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