कर्नाटक: 'पीरियड लीव' के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचीं 15 महिला मैनेजर, सरकारी आदेश को बताया समानता के खिलाफ
बेंगलुरु की 15 महिला प्रबंधकों ने कर्नाटक सरकार के 20 नवंबर, 2025 को जारी मासिक धर्म अवकाश आदेश के खिलाफ ...और पढ़ें

'पीरियड लीव' के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचीं 15 महिला मैनेजर। (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बेंगलुरु में अलग-अलग प्राइवेट ऑर्गनाइजेशन में मैनेजर के पदों पर काम करने वाली 15 महिलाओं के एक ग्रुप ने 23 मार्च को कर्नाटक हाईकोर्ट में राज्य सरकार के मासिक धर्म की छुट्टी वाले आदेश के खिलाफ याचिका दायर की। 20, नवंबर, 2025 को कर्नाटक सरकार ने एक आदेश जारी किया था, जिसमें हर महीने एक दिन की सवेतन मासिक धर्म की छुट्टी का प्रविधान था।
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि इस खास छुट्टी को देने में पुरुषों और महिलाओं के बीच जो अंतर किया गया है, उसका काम की जगह पर समानता लाने के लक्ष्य से कोई तार्किक संबंध नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि इस अनिवार्य छुट्टी की वजह से महिलाओं को नौकरी पर रखने में भेदभाव हो सकता है, जिससे एंप्लॉयर उन्हें पुरुषों के मुकाबले कम काबिल मान सकते हैं।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यह नोटिफिकेशन संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है, जो समानता के अधिकार की गारंटी देता है।
समानता के नाम पर रूढ़ियों को बढ़ाना देने का आरोप
उन्होने तर्क दिया कि समानता को बढ़ावा देने के बजाय, इसने उन रूढ़ियों को और मजबूत किया है जो महिलाओं को कमजोर दिखाती हैं, जिससे समानता से जुड़े कानूनों का मूल उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह नीति भलाई के नाम पर होने वाले लिंगभेद का एक उदाहरण है। जो सुरक्षा की आड़ में पितृसत्तात्मक सोच को बढ़ावा देती है।
जस्टिस हेगड़े की बैंच में सुनवाई
इस मामले की सुनवाई जस्टिस अनंत रामनाथ हेगड़े की बेंच के सामने हुई। जस्टिस हेगड़े ही एंप्लॉयर के संगठन द्वारा सरकारी नोटिफिकेशन के विरोध में दायर की गई याचिकाओं की भी सुनवाई कर रहे हैं।
