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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 12, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कांग्रेस में हमेशा ही समस्याएं खड़ी करते रहेंगे पार्टी के पाले हुए ये नेता

By Kamal VermaEdited By:
Published: Tue, 12 Dec 2017 10:40 AM (IST)Updated: Tue, 12 Dec 2017 10:42 AM (IST)

प्राप्त जानकारी के अनुसार मणिशंकर अय्यर ने डिनर मीटिंग का आयोजन किया था जिसमें पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी के साथ उसके उच्चायुक्त भी मौजूद थे।

कांग्रेस में हमेशा ही समस्याएं खड़ी करते रहेंगे पार्टी के पाले हुए ये नेता
कांग्रेस में हमेशा ही समस्याएं खड़ी करते रहेंगे पार्टी के पाले हुए ये नेता

अवधेश कुमार

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात की चुनाव सभा में यह आरोप लगाया कि मणिशंकर अय्यर के घर पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री और उच्चायुक्त के साथ कांग्रेसी नेताओं की बैठक हुई है तो कांग्रेस ने तुरत इसका खंडन किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने तो प्रधानमंत्री को इसे साबित करने की ही चुनौती दे दी। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि देश के सर्वोच्च पद पर बैठकर मोदी जी बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। मोदी जी चिंतित, हताश और गुस्से में हैं। ऐसे बयान में कोई सच्चाई या तथ्य नहीं है। ऐसा व्यवहार प्रधानमंत्री को शोभा नहीं देता। आम कांग्रेसी यह कहने लगे कि या तो प्रधानमंत्री इसे साबित करें या इसके लिए माफी मांगें। देश के आम लोगों के लिए यह दुविधा की स्थिति थी कि वे किसकी बातों को स्वीकार करें। हमारे सामने मूल प्रश्न यह था कि क्या प्रधानमंत्री बिना पुख्ता जानकारी के इतना बड़ा आरोप लगा सकते हैं और उसमें भी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम लेते हुए? प्रधानमंत्री ने पूर्व उपराष्ट्रपति के भी बैठक में होने की चर्चा की।

साफ है कि भले चुनावी सभा हो प्रधानमंत्री बिना पूरी सूचना के इस तरह की बात नहीं कह सकते। यही सच साबित हुआ है। पूर्व सेनाध्यक्ष दीपक कपूर ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि यह बैठक हुई थी जिसमें वे स्वयं भी मौजूद थे। हां, उन्होंने यह जरूर कहा कि इस बैठक में भारत-पाकिस्तान संबंधों के अलावा अन्य किसी मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई। जो जानकारी सामने आई है उसके अनुसार मणिशंकर अय्यर ने डिनर मीटिंग का आयोजन किया था जिसमें पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी के साथ पाकिस्तान के उच्चायुक्त भी मौजूद थे। उसमें मनमोहन सिंह थे और पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी भी। इसके अलावा पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह, पूर्व राजनयिक सलमान हैदर, टीसीए राघवन, शरत सभरवाल और के शंकर वाजपेयी भी मौजूद थे।

ध्यान रखिए वाजपेयी, राघवन और सभरवाल पाकिस्तान में भारतीय उच्चायुक्त भी रह चुके हैं। वहां क्या बातें हुईं यह तो बैठक में शामिल लोग ही जानें। हम भी यह नहीं मानते कि वहां कोई भारत विरोधी चर्चा हुई होगी, किंतु अगर यह बैठक हुई तो कांग्रेस ने इसे नकारा क्यों? आखिर उसे किस बात का भय था? वह क्या छिपाना चाहती थी? और क्यों? अगर प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया तो कांग्रेस कह सकती थी कि बैठक हुई थी या रात्रिभोज में सब एकत्रित हुए थे, लेकिन उसका गुजरात चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है, किंतु तथ्य दबाकर कांग्रेस नेताओं ने खुद को फंसा दिया है। लोगों के अंदर ऐसे व्यवहार से आशंका पैदा होती है कि कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है।

वैसे यह सच है कि मणिशंकर अय्यर का व्यवहार पाकिस्तान और कश्मीर के संदर्भ में कई बार देश की सोच से परे चला जाता है। वे भारत-पाकिस्तान संबंधों के असामान्य होते हुए भी पाकिस्तान जाते रहते हैं। वहां कई बार ऐसी बात बोल जाते हैं जिस पर आश्चर्य होता है कि वे पूर्व राजनयिक और केंद्रीय मंत्री रहे हैं। दो वर्ष पहले जब वह पाकिस्तान गए थे तो उन्होंने वहां एक चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि पाकिस्तान से संबंध सुधारने के लिए पहले मोदी को हटाना पड़ेगा। उनके शब्द थे, ‘इसके लिए मोदी को हटाइए’। इसका क्या मतलब था? किसे कह रहे थे हटाने के लिए? पाकिस्तान को? राजनीतिक मतभेद या विरोध देश के अंदर होता है। देश की सीमा पार करते ही आप भारत के नागरिक होते हैं। ऐसे में आपका दायित्व भारत के हितों को ध्यान में रखते हुए कुछ बोलने का होता है। वैसे भी पाकिस्तान के साथ संबंध भारत के कारण नहीं बिगड़े हैं।

क्या मणिशंकर अय्यर को पता नहीं था कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के कारण भारत को पाकिस्तान के साथ बातचीत का सिलसिला आरंभ करके रोकना पड़ा? तो फिर वहां उन्होंने ये बातें उठाई क्यों नहीं? वह बोल सकते थे कि ताली केवल एक हाथ से नहीं बजती, पाकिस्तान को अपने रवैये में सुधार करने की आवश्यकता है। वह आतंकवाद को सीमा पार करने से रोके तो भारत के साथ संबंध सामान्य हो जाएंगे, किंतु उनके बयान से निष्कर्ष यह निकला कि पाकिस्तान के साथ संबंध खराब होने के लिए केवल भारत जिम्मेदार है। आखिर नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं। उनको हटाने की बात पाकिस्तानियों से करने का क्या मतलब था? यह ऐसा बयान था जिसके खिलाफ कांग्रेस पार्टी को कड़ा रवैया अपनाना चाहिए था, लेकिन आश्चर्य देखिए कि कांग्रेस ने इस पर कोई बयान तक नहीं दिया।

कांग्रेस के रणनीतिकारों को समझना चाहिए कि उन्होंने ऐसे नेताओं को पाल रखा है जो उनके लिए समस्याएं पैदा करते रहेंगे और इससे जनता में उनका समर्थन भी घटेगा। हालांकि इस समय मणिशंकर अय्यर प्रधानमंत्री को नीच कहने के कारण पार्टी से निलंबित हैं, लेकिन उनको पाकिस्तान और कश्मीर संबंधी कारगुजारियों के लिए कभी डांट तक नहीं पड़ी। मणिशंकर अय्यर राजीव गांधी के करीबी रहे हैं। आज भी उस परिवार के वे विश्वासपात्र हैं। राहुल गांधी ने संचार रणनीति के लिए जो समिति बनाई थी उसमें उनको शामिल किया था। क्या ऐसा करते समय राहुल को मणिशंकर अय्यर के विचारों और कारगुजारियों का पता नहीं था? अवश्य था।

जाहिर है, यह जानते हुए आप ऐसे व्यक्ति को महत्व देते हैं तो इसका अर्थ होता है कि कांग्रेस उनके विचारों और व्यवहारों को प्राकारांतर से स्वीकार करती है। कल्पना करिए, यदि प्रधानमंत्री ने वर्तमान बैठक का खुलासा नहीं किया होता तो फिर इसकी चर्चा भी नहीं होती। कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं को या तो इसका पता नहीं था या था तो उन्होंने गुजरात चुनाव में इसकी प्रतिकूल प्रतिक्रिया का ध्यान रखते हुए इसे छिपाने की कोशिश की। यह भी देश के साथ अपराध ही माना जाएगा, किंतु जो हुआ वह तो छिप नहीं सकता। आखिर सरकार के पास इंटेलिजेंस है। अगर ऐसे आयोजनों तक की रिपोर्ट सरकार तक न पहुंचे तो फिर सरकार की आंखों में धूल झोंककर कुछ भी हो सकता है। कम से कम अब कांग्रेस को सामने आकर दोबारा स्पष्टीकरण देना चाहिए।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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