नई दिल्‍ली [स्‍पेशल डेस्‍क]। भारतीय सेना के लिए बीते दिन काफी अहम रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि इन तीन दिनों में सरकार ने जो फैसले लिए उसने सेना को नई ताकत दी है। लिहाजा इसमें कोई शक नहीं है कि आने वाले समय में भारतीय सेना की ताकत कई गुणा बढ़ जाएगी। यह फैसले सेना की ताकत में इजाफा तो करेंगे ही साथ ही यह सेना को अत्‍याधुनिक करने में भी सक्षम होंगे। आइए डालते हैं इन अहम फैसलों पर एक नजर

सेना को मिलेंगी 72 से अधिक असाल्ट राइफल्‍स

सेना की ताकत में इजाफे के लिए हथियारों की खरीद को गति दे रही सरकार ने बड़ी संख्या में असाल्ट रायफलें और कारबाइनें खरीदने का फैसला किया है। रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) ने इसके लिए 3500 करोड़ रुपये से अधिक की सैन्य खरीद को मंजूरी दी है। इस फैसले के बाद सीमा पर पाकिस्तानी आतंक और घुसपैठ का मुकाबला कर रही सेना की तात्कालिक जरूरतों के मद्देनजर 72 हजार से अधिक असाल्ट रायफलें और 93 हजार से ज्यादा कारबाइन खरीदी जाएंगी। इस कदम से सेना के आधुनिकीकरण की दिशा में तेज गति से बढ़ना आसान हो जाएगा। इसके तहत मोर्चे पर तैनात सेना की जरूरतों के लिए कुल 3547 करोड़ रुपये की रकम को मंजूरी दी गई है।

आसान बनेगी मेक-2 प्रक्रिया

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई डीएसी की अहम बैठक में मेक-2 प्रक्रिया को भी आसान बनाने का निर्णय लिया गया है, जिससे ताकि देशी कंपनियां देश की रक्षा जरूरतों और उपकरणों पर शोध करके उनका निर्माण कर सकें। प्रक्रिया को आसान बनाए जाने से भारतीय कंपनियां रक्षा क्षेत्र के उपकरणों और हथियारों के निर्माण के लिए आगे आएंगी।

प्रकिया आसान बनाने का फायदा

सरकार ने बदलाव में इस पहलू का ध्यान रखा गया है कि मेक इन इंडिया के तहत निजी कंपनियों पर सरकारी बंदिशें ज्यादा न हों। इसकी वजह से रक्षा मंत्रलय को रक्षा उद्योग क्षेत्र ही नहीं स्टार्ट अप कंपनियों से सीधे रक्षा निर्माण प्रस्ताव स्वीकार करने का अवसर मिलेगा। स्वदेशी कंपनियों को टेंडर में शामिल होने की पात्रता शर्तो में भी ढील दी गई है। अब पात्रता में आने वाली सभी कंपनियों को हथियारों का प्रोटोटाइप डिजाइन बनाने का मौका दिया जाएगा। डीएसी की मुहर के बाद मेक-2 परियोजना की सभी मंजूरी सर्विस हेडक्वार्टर के स्तर पर ही मिल जाएगी। खास बात यह है कि एक बार रक्षा परियोजना को मंजूरी मिल जाएगी तो आपूर्तिकर्ता कंपनी के डिफाल्टर होने की स्थिति को छोड़ अन्य किसी भी हालत में सौदा रद नहीं किया जाएगा।

बराक मिसाइलों की खरीद को मंजूरी

भारत ने नौसेना के लिए 460 करोड़ रुपये की लागत से जिन 131 बराक मिसाइलों को खरीदने की मंजूरी दी है। इससे ना सिर्फ सामुद्री ताकत में इजाफा होगा बल्कि हवाई सुरक्षा पुख्ता होगी। इजराइल की कंपनी राफेल इनकी सप्लाई करेगी। धरती से हवा में मार करने वाली इन मिसाइलों का इस्तेमाल पोतों पर मिसाइल रोधी प्रणाली के रूप में किया जाएगा।

इस मिसाइल की खासियत

बराक-8 सिस्टम खास तकनीक एम-स्‍टार (मल्टीफंक्शन सर्विलांस एंड थ्रेट अलर्ट रडार) से लैस है। इसका डाटा लिंक वेपन सिस्टम मैक्सिमम 100 किमी की रेंज तक दुश्मन की मौजूदगी भांपकर उसे 70 किमी के दायरे में तबाह कर देता है। बराक 8 जहाजों पर लगानेवाला एक एयर डिफेंस सिस्टम है जिससे जहाज को एंटी शिप मिसाइल, लड़ाकू विमान, मानव रहित विमान और हेलीकॉप्टर से रक्षा करता है। बराक 8 मल्टीलेयर्ड डिफेंस सिस्टम नहीं है। यह सिंगल इंटरसेप्टर मिसाइल है। बराक 8 को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वह किसी भी गति में रहनेवाले क्रूज मिसाइल को एयरक्राफ्ट को इंटरसेप्ट कर सके। इसे अपने लक्ष्य को निशाना बनाने में कोई दिक्कत नहीं आती, जो तेजी से अपनी जगह बदल रहा होता है। इस पर लंबी दूरी के एक्टिव रडार लगे होते हैं।

‘सबमरीन किलर्स’ और खरीदेगी भारतीय नौसेना

भारतीय नौसेना निगरानी और पनडुब्बी को नष्ट करने में सक्षम विमान ‘बोइंग पी-8आइ’ की और अधिक खरीद करने की योजना बना रही है। हवाई निगरानी की क्षमता नौसेना अभियानों के लिए महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि नौसेना इन विमानों की और ज्यादा खरीद करेगी। पूर्व नौसेना प्रमुख ने लंबी दूरी की समुद्री टोह (एलआरएमआर) लेने वाले 30 विमानों की जरूरत बताई थी। इनमें से नौसेना आठ विमानों की खरीद चुकी है। इसके अलावा चार और विमानों को खरीदने का आर्डर दे चुकी है। पी-8आइ (आइ का मतलब इंडिया) विमानों के अधिग्रहण ने नौसेना को दुश्‍मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उसे नष्ट करने की बहुत मजबूत आक्रामक क्षमता प्रदान की है। समकालीन हथियार प्रौद्योगिकी के संदंर्भ में पी-8आइ को अक्सर ‘सबमरीन किलर्स’ कहा जाता है।

बन सकती है स्‍पाइक मिसाइल पर बात

इजरायल की टैंक रोधी मिसाइल स्पाइक को लेकर भारत ने अपने दरवाजे पूरी तरह से बंद नहीं किए हैं। हो सकता है कि दोनों देशों के बीच स्पाइक मिसाइल सौदे के लिए नए सिरे से बातचीत हो। इजरायल इस मिसाइल का निर्माण भारत के साथ मिलकर करने को तैयार है। माना जा रहा है कि सौदे को बचाने के लिए स्पाइक मिसाइल बनाने वाली कंपनी राफेल एडवांस डिफेंस सिस्टम लिमिटेड ने आकर्षक प्रस्ताव किया है। संभावना इस बात की है कि भारत पहले के मुकाबले कम स्पाइक मिसाइलें खरीदे। स्‍पाइक का मुद्दा भारत आए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी उठाया है। उनके साथ आने वाले दल में यह मिसाइल बनाने वाली कंपनी के सीईओ भी भारत आए हुए हैं। आपको बता दें कि पूर्व में भारत ने 50 करोड़ डॉलर के इस सौदे को रद कर दिया था। दुनियाभर में करीब 12 देशों की सेनाएं इस मिसाइल का इस्‍तेमाल कर रही हैं।

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Posted By: Kamal Verma