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'आज भी रो रहे हैं माता-पिता', ईरानी राजनयिक ने याद किया मीनाब स्कूल हमले का मंजर

Published: Sat, 31 Oct 2026 02:54 PM (IST)

भारत में ईरानी राजनयिक अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने मीनाब स्कूल हमले का दर्द बयां किया, जिसमें 168 बच्चों की जान गई और कई शव नहीं मिले।

भारत में ईरानी राजनयिक अब्दुल मजीद हकीम इलाही(फोटो: एएनआई)

भारत में ईरानी राजनयिक अब्दुल मजीद हकीम इलाही(फोटो: एएनआई)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान के प्राइमरी स्कूल पर हुए भीषण हमले में जान गंवाने वाले मासूम बच्चों के माता-पिता आज भी गहरे सदमे और आंसुओं में जी रहे हैं।

कई परिवार तो ऐसे हैं जिन्हें अपने बच्चों के शव तक नहीं मिल सके। एक निजी चैनल के कार्यक्रम में पहुंचे भारत में ईरानी राजनयिक अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने इस त्रासदी का दर्द बयां किया।

राजनयिक अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने बताया कि 28 फरवरी को प्राइमरी स्कूल पर दो बार हमला किया गया था, जिसमें 168 बेकसूर बच्चों की जान चली गई। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अब तक कई बच्चों के शव नहीं मिल पाए हैं। उनके माता-पिता आज भी रो रहे हैं क्योंकि उनके पास अपने बच्चों की कोई कब्र तक नहीं है, जहां जाकर वे अपने आंसुओं को बहा सकें।

नए सत्र में कॉपियां-किताबें लेकर पहुंचे थे परिजन

ईरान में 1 अक्टूबर से शुरू हुए नए शैक्षणिक सत्र का जिक्र करते हुए इलाही ने बताया कि जब स्कूल खुले, तो परिजन अपने बच्चों के लिए नई कॉपियां और किताबें लेकर पहुंचे थे। लेकिन वहां उनकी जगह केवल खालीपन था।

उन्होंने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों के लिए बहुत सारी किताबें और कॉपियां लेकर पहुंचे थे, लेकिन वहां उनके बच्चे मौजूद नहीं थे। वे आज भी इस असहनीय दर्द से जूझ रहे हैं।

अमेरिका ने नहीं मांगी माफी

इलाही ने कहा कि इस बड़े हमले के लिए अमेरिका ने अब तक कोई माफी नहीं मांगी है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से हमारे प्राइमरी स्कूल पर किए गए इस घातक हमले की भारी गलती के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका ने अब तक माफी नहीं मांगी है।

उन्होंने यह भी बताया कि संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने इस मामले की जांच के लिए एक समिति भेजी थी। इलाही के अनुसार, उस जांच रिपोर्ट में हमले के दौरान 125 बच्चों के मारे जाने की बात दर्ज की गई थी।

वैश्विक समुदाय से आवाज उठाने की अपील

ईरानी राजनयिक ने कहा कि पीड़ित परिवारों की पीड़ा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने दुनिया भर के लोगों से इस तरह की त्रासदियों के खिलाफ मुखर होने की अपील की।

इलाही ने कहा कि हम दुनिया के सभी स्वतंत्र नागरिकों और पूरी मानवता से अपील करते हैं कि वे इस भयानक त्रासदी के खिलाफ आवाज उठाएं, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न दोहराई जाएं, चाहे वह ईरान हो या दुनिया का कोई अन्य देश।

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