युद्ध का 27वां दिन: होर्मुज से किन देशों को मिलेगी एंट्री, भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण? पूरी रिपोर्ट
ईरान ने पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारत सहित मित्र देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की आधिकारिक अनुमति दे ...और पढ़ें

भारत समेत मित्र देशों को होर्मुज इस्तेमाल करने की अनुमति। (रॉयटर्स)

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। 27दिनों से जारी पश्चिम एशिया तनाव की वजह से ऊर्जा संकट के खतरे से जूझते भारत के लिए एक शुभ खबर यह है कि ईरान ने आधिकारिक तौर पर भारत सहित अपने 'मित्र देशों' को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे दी है।
वैसे ईरान सरकार युद्ध के बावजूद अभी तक चार भारतीय जहाजों को होर्मुज से निकलने की इजाजत दी थी लेकिन अब आधिकारिक घोषणा होने के बाद उम्मीद है कि होर्मुज के पश्चिम हिस्से में फंसे भारत के 20 और जहाजों के भी वहां से जल्द निकलने की स्थिति बनेगी।
भारत ने ईरान की उक्त घोषणा पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन विदेश मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय और जहाजरानी मंत्रालयों के अधिकारी लगातार ईरान की संबंधित एजेंसियां के साथ संपर्क में हैं।
भारत सहित मित्र देशों को होर्मुज से गुजरने की मंजूरी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने बयान जारी कर कहा है कि हमने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति मित्र देशों चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान को दे दी है। जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन दुश्मन देशों (अमेरिका और इजराइल तथा उनके सहयोगियों) के जहाजों के लिए बंद रहेगा। साफ है कि मित्र देशों के जहाजों को रास्ता तो मिलेगा, लेकिन पहले जैसी स्वतंत्र आवाजाही नहीं होगी।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए होर्मुज अत्यंत महत्वपूर्ण
अरागची ने कहा कि जहाजों को ईरानी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना होगा और समन्वय के साथ गुजरना पड़ेगा। भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए होर्मुज अत्यंत महत्वपूर्ण है। देश का 90 फीसद आयातित गैस और 60 फीसद आयातित कच्चा तेल इसी मार्ग से आता है। पश्चिम एशिया संकट के बीच यह अनुमति भारत के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।

वर्तमान में 22 भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम (फारस की खाड़ी) में फंसे हुए हैं। इनमें कुल 17 लाख टन ऊर्जा कार्गो लदा है, जिसमें 16.7 लाख टन कच्चा तेल, 3.2 लाख टन एलपीजी, दो लाख टन एलएनजी है। जहाजरानी मंत्रालय का कहना है कि इन 22 जहाजों पर कुल 611 भारतीय नाविक सवार हैं और सभी सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
शुक्रवार को भारत पहुंच जाएंगे दो एलपीजी टैंकर
भारतीय एलपीजी टैंकर ( जग वासंत और पाइन गैस) ईरानी अनुमति के बाद सफलतापूर्वक गुजर चुके हैं और इनके शुक्रवार सुबह तक भारतीय बंदरगाह पहुंच जाएंगे। फारस की खाड़ी में कुल लगभग 500 टैंकर (क्रूड, प्रोडक्ट, केमिकल आदि) फंसे हुए हैं, लेकिन भारत के 22 जहाज ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण हैं।
भारत और ईरान के बीच संवाद जारी
भारत ने ईरान के साथ उच्च-स्तरीय बातचीत के जरिए यह छूट हासिल की है, जबकि कई अन्य देश अभी भी इंतजार कर रहे हैं। वैसे मौजूदा अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक होर्मुज से गुजरने के लिए किसी की देश के जहाज को ईरान से खास “अनुमति'' की जरूरत नहीं है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए व्यावहारिक रूप से ईरान के साथ समन्वय से जहाज सुरक्षित रूप से गुजर रहे हैं। यही वजह है कि पीएम नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ईरान में अपने समकक्षों के साथ संवाद बनाये हुए हैं।
