विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

लोकसभा में महिला आरक्षण पर सियासी ब्रेक, संसद में आधी आबादी अब भी ‘हाशिए’ पर; क्या कहते हैं आंकड़े?

Published: Sat, 18 Apr 2026 05:06 AM (GMT+05:30)Updated: Sat, 18 Apr 2026 06:55 AM (GMT+05:30)

लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक संशोधन विफल होने के बाद महिला प्रतिनिधित्व पर बहस तेज हो गई है। संसद में ...और पढ़ें

लोकसभा में महिला प्रतिनिधित्व पर फिर छिड़ी बहस। (AI Generated Image)

लोकसभा में महिला प्रतिनिधित्व पर फिर छिड़ी बहस। (AI Generated Image)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन कर सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव शुक्रवार को निचले सदन में पारित नहीं हो सका। इसके साथ ही देश में एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि आखिर भारत की विधायिकाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी कितनी न्यायसंगत है।

लोकसभा में बढ़ी मौजूदगी, लेकिन लक्ष्य से दूर

भारत में महिलाओं की संसद में भागीदारी धीरे-धीरे बढ़ी है। 1957 में जहां लोकसभा में महिलाओं की हिस्सेदारी सिर्फ 5.4 प्रतिशत थी, वहीं 2024 में यह बढ़कर 13.6 प्रतिशत हो गई है। हालांकि यह सुधार अहम है, फिर भी हर सात सांसदों में एक से भी कम महिला है।

2019 में महिलाओं की हिस्सेदारी 14.4 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर थी, जो प्रस्तावित एक-तिहाई आरक्षण से काफी कम है।

चुनाव लड़ने वाली बढ़ीं, जीतने वाली नहीं

आंकड़े बताते हैं कि चुनाव लड़ने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ रही है, लेकिन यह सफलता में तब्दील नहीं हो रही।

  • 2019 में 726 महिलाओं ने लोकसभा चुनाव लड़ा, जिनमें से 78 जीतकर संसद पहुंचीं (सफलता दर 10.7%)
  • 2024 में 800 महिलाओं ने चुनाव लड़ा, लेकिन केवल 74 ही जीत सकीं (सफलता दर 10% से कम)

यह दर्शाता है कि राजनीतिक भागीदारी बढ़ने के बावजूद जीत का प्रतिशत स्थिर या घट रहा है।

unnamed (51)

राजनीतिक दलों में भी असमानता

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के आंकड़ों के अनुसार बड़े दलों में भी महिलाओं की हिस्सेदारी सीमित है।

  • भाजपा: 1,877 में से 194 महिला जनप्रतिनिधि (करीब 10%)
  • कांग्रेस: 756 में से 72 महिलाएं (लगभग 10%)
  • डीएमके: 161 में से 9 (6%)
  • एआईएडीएमके: 66 में से 3 (5%)
  • शिवसेना: 64 में से 2 (3%)

वहीं तृणमूल कांग्रेस (AITC) सबसे आगे है, जहां 249 में से 45 महिला विधायक/सांसद हैं (करीब 18%)।

यह भी पढ़ें- 'विपक्ष को बहुत भारी पड़ेगा नारी शक्ति का अपमान', महिला आरक्षण विधेयक पारित नहीं होने पर नड्डा ने बोला हमला

यह भी पढ़ें- संसद में गिरा महिला आरक्षण बिल, अब जनता के बीच विपक्ष को घेरने की तैयारी

वैश्विक तुलना में भारत पीछे

दुनियाभर में संसदों में महिलाओं की औसत हिस्सेदारी करीब 27 प्रतिशत है।

  • रवांडा: 63.8%
  • क्यूबा: 57.2%
  • मेक्सिको: 50.4%

भारत 13.6 प्रतिशत के साथ इन देशों से ही नहीं, बल्कि यूरोप, अमेरिका और अफ्रीका के कई हिस्सों से भी पीछे है। इससे साफ है कि बिना आरक्षण के महिलाओं की भागीदारी बढ़ने की रफ्तार धीमी रहती है।

unnamed (52)

वोटर के रूप में महिलाएं आगे

जहां प्रतिनिधित्व कम है, वहीं वोटिंग में महिलाएं पुरुषों के बराबर या आगे हैं।

  • 1962: करीब 47% महिला मतदान
  • 2014: 65% से अधिक
  • 2019: 67.2% (पुरुषों से थोड़ा ज्यादा)
  • 2024: 65.8% (पुरुषों के बराबर)

यह दिखाता है कि लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी मजबूत है, लेकिन प्रतिनिधित्व में अंतर बना हुआ है।

ऑनलाइन भी दिखा मुद्दे पर जोर

महिला आरक्षण को लेकर जनता की दिलचस्पी ऑनलाइन भी बढ़ी है। गूगल ट्रेंड्स के अनुसार अप्रैल 2026 की शुरुआत में "वुमन रिजर्वेशन" को लेकर सर्च में तेज उछाल आया।

शुक्रवार को यह इंडेक्स 100 तक पहुंच गया, जो इस विषय पर सबसे ज्यादा रुचि को दर्शाता है।

कहां से आ रही है सबसे ज्यादा दिलचस्पी

1 से 16 अप्रैल 2026 के बीच सर्च डेटा के मुताबिक:

  • अरुणाचल प्रदेश सबसे आगे रहा
  • इसके बाद नागालैंड
  • दिल्ली और मिजोरम भी टॉप राज्यों में शामिल

हालांकि ये आंकड़े कुल सर्च नहीं, बल्कि अनुपातिक रुचि को दर्शाते हैं।

unnamed (53)

भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ रही है, लेकिन प्रतिनिधित्व अब भी सीमित है। चुनाव लड़ने की संख्या में वृद्धि के बावजूद जीत की दर कम होना और दलों में कम हिस्सेदारी यह संकेत देती है कि बिना ठोस नीतिगत हस्तक्षेप के लैंगिक संतुलन हासिल करना मुश्किल होगा।

इस समाचार में उपयोग किए गए क्रिएटिव ग्राफिक्स को NoteBookLM आर्टिफिशिएल इंटेलिजेंस प्रोग्राम की सहायता से बनाया गया है।

यह भी पढ़ें- ‘अंतरात्मा की आवाज सुनें’, पीएम मोदी ने महिला आरक्षण पर मतदान से पहले लोकसभा सदस्यों से की थी अपील

यह भी पढ़ें- 'महिला आरक्षण बिल का समर्थन, लेकिन परिसीमन के नाम पर साजिश मंजूर नहीं', बोलीं ममता बनर्जी