महंगा क्रूड, दोगुना किराया... वैश्विक तनाव के बाच कैसे पूरी होगी भारत की तेल आपूर्ति?
सऊदी अरब और रूस पर हमलों से भारत की कच्चे तेल की आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। ढुलाई भाड़ा और ...और पढ़ें
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सऊदी-रूस हमलों से भारत की कच्चे तेल आपूर्ति बाधित

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और रूस की प्रमुख रिफाइनरियों पर हुए हमलों ने भारत की कच्चे तेल की आपूर्ति पर दबाव बढ़ा दिया है।
हाल के महीनों में दोनों देशों से संयुक्त तौर पर भारत ने अपने कुल तेल आयात का 45-50 प्रतिशत से ज्यादा क्रूड खरीदा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने के बाद सऊदी अरब ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन से ही तेल की बिक्री कर रहा था।
पाइपलाइन पर हमलों के बाद सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको ने भारतीय रिफाइनरियों को टर्म सप्लाई फिलहाल रोक दी है। युद्ध शुरू होने के बाद सऊदी भारत की कुल जरूरत का करीब नौ प्रतिशत तेल दे रहा था।
इसी तरह रूस की रिफाइनिंग क्षमता घटी और निर्यात उपलब्धता कम हुई है। सितंबर में भारत का रूसी तेल आयात अगस्त के मुकाबले कम रहने का अनुमान है।
सऊदी-रूस हमलों से भारत की कच्चे तेल आपूर्ति बाधित
रूस अभी भी सबसे बड़ा सप्लायर है, लेकिन लोडिंग घटी।रिफाइनरी अब उपलब्धता को कीमत से ज्यादा चिंता का विषय बता रहे हैं। वैकल्पिक आपूर्ति यूएई, इराक, पश्चिम अफ्रीका और वेनेजुएला जैसे स्रोतों से उपलब्ध है, लेकिन महंगी पड़ रही है।
पश्चिम एशिया में हालात फिर से बिगड़ने से तेल आयातक कंपनियों को ढुलाई के लिए जहाज नहीं मिल रहे हैं। उपलब्ध जहाजों का भाड़ा और बीमा प्रीमियम बहुत ज्यादा है।
अरब खाड़ी से कच्चे तेल की ढुलाई करने वाले विशालकाय जहाजों (वीएलसीसी-एक बार में 20 लाख बैरल ढुलाई की क्षमता) का किराया 14 सितंबर को 61-62 डॉलर प्रति टन रहा, जो पिछले महीने अगस्त (34.6 डॉलर) के मुकाबले करीब दोगुना और फरवरी (10.6 डॉलर) के मुकाबले छह गुना है।
भारत का तेल आयात बिल 48% बढ़कर $74.8 अरब हुआ
सऊदी के रास तनुरा पोर्ट से भाड़ा अगस्त में 4.34 डॉलर प्रति बैरल रही जबकि फरवरी में 0.85 डॉलर था। रूस से तेल ढुलाई का किराया भी हाल के महीनों में 10-15 प्रतिशत तक बढ़ा है। फरवरी, 2026 में यह एक डॉलर प्रति बैरल से भी कम था जो अब 4.50 डॉलर प्रति बैरल तक जा चुका है।
अगस्त में भारत ने 31 देशों से तेल और गैस खरीदा मार्च से अगस्त के दौरान भारत ने 31 देशों से तेल और गैस की खरीद की। भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत जून में औसतन 83.22 डॉलर प्रति बैरल, जुलाई में 82.04 डॉलर और अगस्त में 90.19 डॉलर रही।
सितंबर में यह तेजी से बढ़कर 111 डॉलर से ऊपर और कुछ समय के लिए 131 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। अप्रैल-अगस्त में भारत ने 10.07 करोड़ टन कच्चा तेल आयात किया, जो पिछले साल की समान अवधि के लगभग बराबर है। हालांकि, इस दौरान आयात बिल 48 प्रतिशत बढ़कर 74.8 अरब डॉलर हो गया है।
