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एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनें आ जाएं तो क्या होगा? समझिए रेलवे के 'कवच 4.0' का पूरा मैकेनिज्म

Published: Fri, 25 Sep 2026 08:28 PM (IST)

भारतीय रेलवे ने दक्षिण मध्य रेलवे में 'कवच 4.0' प्रणाली शुरू की है, जो ट्रेन सुरक्षा को मजबूत करेगी।

दक्षिण मध्य रेलवे में 'कवच 4.0' प्रणाली का शुभारंभ

दक्षिण मध्य रेलवे में 'कवच 4.0' प्रणाली का शुभारंभ

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ट्रेनों की सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता बनाने के लिए दक्षिण मध्य रेलवे में पहली बार 'कवच 4.0' शुरू किया है। यह ट्रेन की रफ्तार और सिग्नल पर लगातार नजर रखता है।

कवच के रहते अगर लोको पायलट समय पर ब्रेक न लगाए तो यह अपने आप ब्रेक लगा सकता है। नए वर्जन में ट्रेन की लोकेशन और सिग्नल की जानकारी ज्यादा सटीक होगी।

क्या होता है कवच सिस्टम?

यह स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है। इसका काम ट्रेन को सुरक्षा की अतिरिक्त लेयर देना है। ट्रेन तय गति से तेज या रेड सिग्नल की तरफ बढ़े तो यह चेतावनी देता है।

रेड सिग्नल पर 'कवच' कैसे करेगा काम?

ट्रैक पर लगे टैग ट्रेन की जगह बताते हैं। स्टेशन का सिस्टम आगे के सिग्नल, ट्रैक और रास्ते की स्थिति की जानकारी भेजता है। कवच इन जानकारियों के साथ ट्रेन की रफ्तार देखता रहता है। रेड सिग्नल आने पर लोको पायलट ब्रेक न लगाए तो सिस्टम ब्रेक लगा सकता है।

दो ट्रेनों की टक्कर रोक सकता है कवच?

कवच का मकसद ऐसी स्थिति का खतरा कम करना भी है। एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनें एक-दूसरे की तरफ बढ़ें तो सिस्टम उन्हें रोकने के लिए निर्देश दे सकता है। हालांकि कवच हर तरह के हादसे को रोकने वाला सिस्टम नहीं है।

कवच 4.0 पुराने 3.2 से कितना बेहतर?

चार बड़े बदलाव हैं। ट्रेन की लोकेशन ज्यादा सटीक पता चलेगी। बड़े रेलवे यार्ड में सिग्नलों की जानकारी बेहतर होगी। दो स्टेशनों के कवच सिस्टम ऑप्टिकल फाइबर से सीधे जुड़ेंगे। नया वर्जन मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम से सीधे जानकारी ले सकेगा।

कोहरे से बचाएगा कवच 4.0?

हां। कोहरे या कम विजिबिलिटी में लोको पायलट को बाहर का सिग्नल देखने में मुश्किल होती है। कवच जरूरी सिग्नल की जानकारी इंजन के भीतर ही दिखा सकता है।

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