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15 महीने में भारतीय वायुसेना को मिले 450 Nagastra-1R ड्रोन, क्या है इस स्वदेश तकनीक की ताकत?

Published: Wed, 14 Oct 2026 11:38 PM (IST)

भारतीय सेना को सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (एसडीएएल) से रिकॉर्ड 15 महीनों में 450 स्वदेशी 'नागास्त्र-1आर' ड्रोन की पहली खेप मिली है।

नागास्त्र-1आर ड्रोन

नागास्त्र-1आर ड्रोन

HighLights

  1. 450 नागास्त्र-1आर ड्रोन 15 माह में सेना को मिले।

  2. एसडीएएल ने स्वदेशी लोइटरिंग म्यूनिशंस की आपूर्ति की।

  3. 'आत्मनिर्भर भारत' की रक्षा क्षमता का ऐतिहासिक प्रमाण।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सैन्य साजो-सामान के क्षेत्र में भारत ने एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर छू लिया है। कुछ समय पूर्व 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान सरहद पर जिस शिद्दत से आधुनिक ड्रोन और कामिकेज म्यूनिशन्स (लोइटरिंग म्यूनिशंस) की आवश्यकता महसूस की गई थी, उसी रणनीतिक सबक को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना ने बड़ा कदम उठाया।

इस जरूरत को पूरा करने के लिए जून 2025 में सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (एसडीएएल) को स्वदेशी 'नागास्त्र-1आर' ड्रोन के निर्माण का ऑर्डर सौंपा गया था।

हैरान करने वाली बात यह है कि वैश्विक रक्षा निर्माण के इतिहास में अभूतपूर्व गति दिखाते हुए कंपनी ने महज 15 महीने के भीतर यानी सितंबर 2026 तक सेना को सभी 450 नागास्त्र-1आर लोइटरिंग म्यूनिशंस की पहली और सबसे बड़ी एकल खेप (सिंगल-बैच सप्लाई) की डिलीवरी सफलतापूर्वक सौंप दी है।

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, रक्षा मंत्रालय और सेना की ओर से कड़े तकनीकी परीक्षण आयोजित किए गए थे। कंपनी के सूत्रों के अनुसार, इन ट्रायल्स में चार प्रमुख रक्षा कंपनियों ने हिस्सा लिया था, लेकिन एसडीएएल एकमात्र ऐसी कंपनी साबित हुई जिसने भारतीय सेना द्वारा निर्धारित सभी कठिन और सूक्ष्म परिचालन मानदंडों को शत-प्रतिशत पूरा करके दिखाया।

लाइव ट्रायल्स के दौरान हथियारों की सटीकता, लक्ष्य भेदने की क्षमता और तकनीकी स्थिरता का कड़ाई से मूल्यांकन किया गया, जिसमें यह स्वदेशी प्रणाली हर पैमाने पर खरी उतरी।

वर्तमान भू-राजनीतिक हालात, विशेष तौर पर ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष और पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए युद्ध की विधा तेजी से बदल रही है।

ऐसे समय में कम लागत वाले और सटीक मारक क्षमता वाले हथियारों की जरूरत और अधिक बढ़ जाती है। नागास्त्र-1आर इसी आधुनिक युद्धक शैली को ध्यान में रखकर पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर विकसित किया गया है।

गौरतलब है कि एसडीएएल के चेयरमैन सत्यनारायण नुवाल ने हाल ही में देश की बढ़ती रक्षा क्षमताओं पर संतोष जताते हुए 'भार्गवास्त्र' काउंटर-ड्रोन सिस्टम का भी जिक्र किया है। इस स्वदेशी तकनीक को वर्ष 2030 तक भारत के अत्यंत महत्वाकांक्षी "सुदर्शन चक्र" एयर डिफेंस सिस्टम के विकास की दिशा में एक मजबूत नींव माना जा रहा है।

बहरहाल, महज 15 महीने के रिकार्ड समय में 450 नागास्त्र-1आर की आपूर्ति इस बात का जीवंत प्रमाण है कि भारतीय रक्षा उद्योग अब विदेशी निर्भरता को त्यागकर पूरी तरह से 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को जमीन पर उतारने के लिए तैयार है।

अन्य महंगे हथियारों की तुलना में बेहद किफायती

इस कामिकेज ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत इसका 'शार्ट-रेंज' आपरेशंस के अनुकूल होना और इसका अनूठा 'एबार्ट एंड रिकवरी' विकल्प है।

यानी, यदि हमला करने के बाद भी ऑपरेशनल परिस्थितियों के तहत लक्ष्य को नष्ट करने की आवश्यकता न हो, तो इस म्यूनिशन को वापस सुरक्षित रिकवर किया जा सकता है। यह खूबी इसे अन्य महंगे हथियारों की तुलना में बेहद किफायती और सामरिक रूप से लचीला बनाती है।

(समाचार एजेंसी एएनआइ के इनपुट के साथ)

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