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नेपाल के लिए संकटमोचक बना भारत, बड़े राहत पैकेज की तैयारी; 2015 के भूकंप में भी बना था मददगार

Published: Sun, 30 Aug 2026 08:18 PM (IST)Updated: Sun, 30 Aug 2026 09:22 PM (IST)

भारत नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन से हुई तबाही के बाद एक बड़े राहत पैकेज पर विचार कर रहा है।

भारत नेपाल के लिए बड़े राहत पैकेज पर विचार कर रहा

भारत नेपाल के लिए बड़े राहत पैकेज पर विचार कर रहा

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बीच भारत पड़ोसी देश के लिए एक बड़ा राहत पैकेज देने पर विचार कर रहा है।

फिलहाल नई दिल्ली राहत सामग्री, बचाव दल और तकनीकी मदद भेज रही है। वित्तीय पैकेज की औपचारिक घोषणा हालात के पूर्ण आकलन के बाद ही होने की संभावना है।

पीएम नरेन्द्र मोदी के विेदश दौरे से वापस आने के बाद इस बारे में फैसला संभव है। पीएम मोदी ने आपदा के तुरंत बाद नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से बात की थी और हर संभव सहायता का भरोसा दिया।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया है कि रविवार तक नेपाल के आपदा प्रभावित इलाकों से 149 भारतीयों को सकुशल बाहर निकाला गया है। इनके नामों की सूची भी सोशल मीडिया पर जारी की गई है।

68.5 टन राहत सामग्री-विशेषज्ञ दल नेपाल भेजे

उसके बाद भारतीय वायुसेना के विमान लगातार काठमांडू के लिए रवाना हो रहे हैं। अब तक चार उड़ानों में करीब 68.5 टन राहत सामग्री पहुंच चुकी है।

इसमें तंबू, कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, स्वच्छता किट, सोलर लैंप, दवाइयां, खाद्य पैकेट, जनरेटर, पानी शुद्ध करने वाली गोलियां और जल निकासी पंप शामिल हैं। केवल सामान नहीं, भारत की विशेषज्ञ टीमें भी भेजी गई हैं।

डाक्टर-पैरामेडिक दल के साथ बिजली परियोजनाओं से जुड़े सुरंग में फंसे लोगों की टोह लेने वाली टीम और डीएनए जांच के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञ नेपाल पहुंच चुके हैं।

आपदा में त्रिशुली जिल में 11 बिजली पनबिजली परियोजनाओं के प्रभावित होने की सूचना मिली है। इन सभी परियोजनाओं में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के सुरंग में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।

भारत नेपाल के लिए बड़े राहत पैकेज पर विचार कर रहा

भारत ने संपर्क मार्ग बहाल करने के लिए बेली ब्रिज का सामान भी भेज दिया है। एक ब्रिज पहले से नेपाल में है, जबकि और पुलों के उपकरण व तकनीकी दल रविवार को पहुंचे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत इस समय मानवीय सहायता, चिकित्सा मदद और बचाव सहयोग पर केंद्रित है।

अलग वित्तीय पैकेज की घोषणा अभी नहीं की गई है। नुकसान का पैमाना, पुनर्निर्माण की जरूरत और काठमांडू की मांग साफ होने के बाद ही अगला कदम तय होगा।

कई भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं, जिनके बचाव और पहचान का काम जारी है। सरकारी सूत्रों के अनुसार जरूरत पड़ी तो भारत पुनर्वास और बुनियादी ढांचे की बहाली के लिए बड़ा पैकेज भी दे सकता है।

ऑपरेशन मैत्री चलाकर की थी मदद

वर्ष 2015 के भूकंप के समय भी भारत नेपाल का सबसे बड़ा मददगार बना था। तब तत्काल राहत के साथ बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण सहायता दी गई थी। अधिकारियों का कहना है कि इस बार भी पड़ोसी पहले सिद्धांत के तहत भारत मदद जारी रखेगा।

तब भारत ने नेपाल की मदद के लिए ऑपरेशन मैत्री की शुरुआत की थी। भूकंप से राहत के तौर पर एक अरब डालर की मदद दी गई थी। इसके अलावा दूसरी विकास परियोजनाओं के लिए भी एक अरब डालर की मदद दी गई थी।

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