इनकम टैक्स में नहीं मिलेगी राहत, चुनावी राज्यों के लिए हो सकती हैं घोषणाएं... आज पेश होगा देश का बजट
सरकार का आगामी बजट वैश्विक चुनौतियों के बीच मैन्यूफैक्चरिंग और घरेलू मांग बढ़ाने पर केंद्रित होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ...और पढ़ें

राज्यों में सुधार के लिए रोडमैप लाए जा सकते हैं और उनके सुधार को इंसेटिव से जोड़ा जा सकता है

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। वैश्विक चुनौतियों के बीच रविवार को पेश होने वाले बजट में सरकार का जोर मैन्यूफैक्चरिंग और घरेलू मांग को बढ़ाने पर हो सकता है। विकास दर बढ़ाने के लिए यह उपाय सबसे कारगर दिख रहे हैं। मैन्यूफैक्चरिंग बढ़ाने से आयात में भी कमी आएगी और निर्यात बढ़ाने का भी मौका मिलेगा। हालांकि वर्तमान वैश्विक हालात में आगामी वित्त वर्ष में निर्यात बढ़ाना थोड़ा चुनौतीपूर्ण लग रहा है।
आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सुबह 11 बजे लोकसभा में अपना नौवां बजट करेंगी जिसमें शहरी सुविधा और स्वास्थ्य सेवा को बेहतर बनाने से जुड़े उपायों की भी घोषणा हो सकती है। स्थानीय निकायों को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्यों को उनके राजस्व मॉडल का सुझाव दिया जा सकता है। किसानों की उत्पादकता बढ़ाने व उन्हें व्यावसायिक फसल उगाने के लिए प्रोत्साहित करने को लेकर वित्त मंत्री घोषणा कर सकती है।

इनकम टैक्स में राहत नहीं
इनकम टैक्स और जीएसटी में राहत देने के कारण चालू वित्त वर्ष 2025-26 में टैक्स से मिलने वाले राजस्व की बढ़ोतरी दर पिछले वित्त वर्ष की तुलना में कम है, इसलिए सरकार की तरफ से इस साल इनकम टैक्स में किसी भी प्रकार की राहत देने की संभावना काफी कम है। सरकार खाद्य, खाद व मनरेगा के मद में दी जाने वाली लगभग 4.5 लाख करोड़ की सब्सिडी भी जारी रखेगी। इसलिए राजस्व जुटाने के लिए सरकार संपदा के मौद्रीकरण व विनिवेश के मोर्चे पर भी बजट में घोषणाएं कर सकती है।
राज्यों में सुधार के लिए रोडमैप लाए जा सकते हैं और उनके सुधार को इंसेटिव से जोड़ा जा सकता है। किफायती आवास के निर्माण एवं उनकी खरीदारी को आसान बनाने के लिए भी बजट में घोषणाएं संभावित है। आगामी वित्त वर्ष के बजट में पिछले चार-पांच बजट की तरह पूंजीगत खर्च के मद में आवंटन में बढ़ोतरी देखी जा सकती है। इंफ्रस्ट्रक्चर के विकास के लिए पूंजीगत खर्च का आवंटन किया जाता है। इससे कई लाभ होते हैं।

चुनावी राज्यों पर बरसेगी कृपा
रोजगार निकलते हैं और उत्पादन लागत में कमी आती है। रोजगार निकलने पर मांग बढ़ती है। सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे नवीनतम सेक्टर के उद्योग की बजट में अनदेखी नहीं की जा सकती है।
एक बार फिर से अनुसंधान व विकास के लिए इन सबके अलावा पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु जैसे राज्यों में इस साल चुनाव भी है और पिछले साल बिहार की तरह इन राज्यों के लिए भी बजट में कोई न कोई सौगात हो सकती है। आगामी वित्त वर्ष में सरकार अपने पुराने वादे के हिसाब से फिस्कल डिफसिट को चालू वित्त वर्ष में जीडीपी के 4.4 प्रतिशत के लक्ष्य से और कम करना चाहेगी।
