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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 30, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

आतंकवाद समर्थकों से सख्ती से निपटेंगे भारत-जर्मनी

By Manish NegiEdited By:
Published: Tue, 30 May 2017 08:48 PM (IST)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और जर्मनी एक दूसरे के लिए ही बने हैं।

आतंकवाद समर्थकों से सख्ती से निपटेंगे भारत-जर्मनी
आतंकवाद समर्थकों से सख्ती से निपटेंगे भारत-जर्मनी

बर्लिन, प्रेट्र। भारत और जर्मनी ने मंगलवार को आतंकवाद को बढ़ावा, समर्थन और वित्त पोषण करने वालों के खिलाफ कड़े कदम उठाने का संकल्प व्यक्त किया। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल के साथ व्यापार, कौशल विकास, साइबर सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे प्रमुख मसलों पर भी व्यापक बातचीत की। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जर्मनी एक दूसरे के लिए ही बने हैं।

मर्केल के साथ चौथी भारत-जर्मनी इंटरगवर्नमेंटल कंसल्टेशन (आइजीसी) की बैठक के बाद संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में मोदी ने कहा, 'हमारे रिश्तों के विकास की गति तेज है, दिशा सकारात्मक और मंजिल स्पष्ट है। जर्मनी हमेशा भारत को एक शक्तिशाली, पूर्णत: तैयार और क्षमतावान साझीदार पाएगा।' वहीं, मर्केल ने कहा कि भारत एक विश्वसनीय साझीदार साबित हुआ है और दोनों ही पक्ष सहयोग बढ़ाने में कामयाब रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच विकास योजनाओं में सहयोग के लिए एक अरब यूरो का निवेश किया जा रहा है। 

दर्जनभर समझौतों पर हस्ताक्षर

वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने विभिन्न क्षेत्रों में दर्जनभर सहमति पत्रों और समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इनमें साइबर नीति, विकास योजनाएं, स्थायी शहरी विकास, क्लस्टर प्रबंधन का निरंतर विकास और कौशल विकास, डिजिटलाइजेशन, रेलवे सुरक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देने जैसे क्षेत्र शामिल हैं। साथ ही जर्मनी ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारतीय सदस्यता के दावे का समर्थन किया। इसके अलावा दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधारों की तत्काल जरूरत पर बल दिया।

वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने आतंकवाद के बढ़ते खतरे पर चिंता व्यक्त की और आतंकी हिंसा के सभी प्रकारों की निंदा की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक समझौते को अंतिम रूप देकर उसे अपनाने का आह्वान किया। मोदी ने कहा कि इस समस्या का आने वाली पीढि़यां भी सामना करेंगी इसलिए मानवतावादी सभी ताकतों को इसका सामना करने के लिए एकजुट होना होगा। प्रधानमंत्री ने कहा, 'भारत और जर्मनी के आर्थिक रिश्तों में बड़ी बढ़त और परिणामोन्मुख गति बनती हुई देखी जा सकती है। आइजीसी की पिछली बैठक में हमने जर्मन कंपनियों के भारत में निवेश के लिए फास्ट ट्रैक सिस्टम बनाया था और उसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं, खासकर मध्यम दर्जे की कंपनियों के मामले में।' 

यूरोपीय यूनियन की एकता का आह्वान

मोदी ने यूरोपीय यूनियन की एकता का आह्वान करते हुए कहा, 'यूरोप और विश्व कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और भारत का मानना है कि इनसे निपटने के लिए दुनिया को चांसलर मर्केल के मजबूत नेतृत्व की जरूरत है।' प्रधानमंत्री ने कहा कि कौशल विकास के क्षेत्र में अपनी दक्षता से जर्मनी भारत के 80 करोड़ युवाओं की मदद कर सकता है। 

फुटबॉल का किया जिक्र

मोदी ने कहा कि भारतीय युवा जर्मनी के कड़े फुटबॉल प्रशिक्षण कौशल का लाभ भी उठा सकते हैं। उन्होंने इस बात का खास तौर पर जिक्र किया कि जर्मन फुटबॉल लीग बुंडेसलीगा के भारत में भी काफी संख्या में प्रशंसक हैं। जर्मनी की बुंडेसलीगा यूरोप की शीर्ष फुटबॉल लीग एसोसिएशनों में से एक है। 

अफगानिस्तान और ओबीओआर पर भी चर्चा 

इससे पहले सोमवार को भी दोनों नेताओं में करीब तीन घंटे तक क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई थी। इसमें ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से निकलने के कारण भारत और जर्मनी पर पड़ने वाले प्रभावों पर विचार किया गया। बातचीत में चीन की 'वन बेल्ट वन रोड' (ओबीओआर) और अफगानिस्तान का मसला भी उठा। इस दौरान मर्केल ने ओबीओआर परियोजना में जर्मनी की भागीदारी को लेकर स्थिति साफ की तो भारत ने इस पर फिर अपना विरोध प्रकट किया।

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