जल्दबाजी में भेजा गया इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस? क्या है एक्सपर्ट्स की राय
बॉलीवुड एक्टर इमरान खान को मुंबई पुलिस और FRRO से भारत छोड़ने का नोटिस मिला है, जिस पर कानूनी विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है।

एक्टर इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस (फोटो-पीटीआई)
HighLights
इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस।
कानूनी विशेषज्ञ नोटिस पर बंटे हुए हैं।
कुछ इसे मनमाना, कुछ कानूनी रूप से सही मानते हैं।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉलीवुड एक्टर इमरान खान को मुंबई पुलिस और फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) की तरफ से 28 अक्टूबर 2026 तक भारत छोड़ने का नोटिस मिला है। इस नोटिस को लेकर कानूनी विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है।
इमरान खान को देश छोड़ने का नोटिस मिलने को लेकर कुछ लोग इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इतनी जल्दबाजी में क्यों नोटिस दिया गया। वहीं कुछ अन्य लोग इस कदम को कानूनी रूप से सही मान रहे हैं।
इमरान खान को मिले नोटिस पर एक्सपर्ट्स की राय
दिल्ली के वरिष्ठ वकील सोराब कृपाल ने कहा, 'FRRO का खान को भारत छोड़ने का आदेश बहुत ही असंगत है। सिर्फ इसलिए कि अधिकारियों के पास 'भारत छोड़ो नोटिस' जारी करने की शक्ति है, इसका मतलब यह नहीं है कि वे बिना किसी ठोस कारण के इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।'
दिल्ली के वरिष्ठ वकील सोराब कृपाल ने कहा, 'भारत में OCI (ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया) कार्डधारक को अनुच्छेद 19(1) के तहत विरोध-प्रदर्शन करने का अधिकार नहीं है। हालांकि, ऐसे व्यक्ति को भी अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) के तहत संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त है, जो सरकार की मनमानी और भेदभावपूर्ण कार्रवाई के खिलाफ है।
कृपाल ने आगे कहा, 'इस कानून के तहत जब तक सरकार यह साबित न कर दे कि भारत में विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने वाले हर OCI कार्डधारक के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई की गई है, तब तक OCI कार्डधारक समानता के मौलिक अधिकार का हवाला दे सकता है, जो विदेशियों पर भी लागू होता है।'
वरिष्ठ वकील ने आगे कहा, 'अगर अदालत को लगता है कि सरकार की कार्रवाई प्रथम दृष्टया मनमानी है, तो वह आगे की सुनवाई तक इस पर अंतरिम रोक लगा सकती है।'
वरिष्ठ वकील प्रणव बढेका ने कहा कि सरकार का यह कदम एक जल्दबाजी में लिया गया फैसला लगता है, जिसका मकसद दूसरों की आवाज दबाना हो सकता है।
नोटिस जारी करने का हक है या नहीं?
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अभय ओका ने कहा, 'सरकार के पास ऐसा आदेश जारी करने की स्पष्ट शक्ति है। लेकिन, ऐसे आदेशों को अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के उल्लंघन के आधार पर चुनौती दी जा सकती है, क्योंकि यह अधिकार गैर-नागरिकों पर भी लागू होता है।'
मुंबई के वकील नितिन प्रधान ने कहा, 'सरकार की यह कार्रवाई 'इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025' के अनुरूप है और कानूनी रूप से सही है, क्योंकि वह एक विदेशी नागरिक हैं।'
प्रधान ने आगे कहा, 'दुनिया में कहीं और भी यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा कि कोई गैर-नागरिक ऐसे विरोध-प्रदर्शन में शामिल हो, जो पूरी तरह से राजनीतिक हो और सरकार की नीतियों के खिलाफ हो।'
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