जून में सिर्फ 90% बारिश का अनुमान, यूपी-बिहार समेत 8 राज्यों में टूटेंगे गर्मी के सारे रिकॉर्ड; IMD ने बढ़ाई टेंशन
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए अपना दूसरा पूर्वानुमान जारी किया है, जिसमें जून में सामान्य से ...और पढ़ें

मानसून पर अल नीनो का साया(फोटो: एएनआई)

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने शुक्रवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के लिए अपना दूसरा दीर्घकालिक पूर्वानुमान जारी कर दिया है। मौसम विभाग ने देश के कई महत्वपूर्ण हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका जताई है। इसके साथ ही जून की शुरुआत से ही कई राज्यों में भीषण लू का प्रकोप देखने को मिल सकता है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मौसम विज्ञान के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि जून से सितंबर के दौरान पूरे देश में दीर्घकालिक औसत की 90 प्रतिशत बारिश होने की उम्मीद है, जिसमें 4 प्रतिशत का उतार-चढ़ाव हो सकता है।

देश के बड़े हिस्से में कम बरसेंगे बादल
आईएमडी के क्षेत्रीय पूर्वानुमान के अनुसार, इस मानसून सीजन में देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का मिजाज कुछ ऐसा रहेगा कि यहां सामान्य बारिश होने की उम्मीद है, जो एलपीए का 94 से 106 प्रतिशत तक हो सकती है।
मध्य भारत, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत, उत्तर-पश्चिम भारत और मानसून के मुख्य क्षेत्र में इस बार सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है।

जून महीने का हाल
जून के महीने को लेकर डॉ. महापात्र ने कहा कि देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की शुरुआत धीमी रहेगी और बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका है। हालांकि, उत्तर-पश्चिम भारत, उत्तर-पूर्व भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ चुनिंदा इलाकों में सामान्य या उससे अधिक बारिश देखी जा सकती है।
मौसम विभाग ने जून के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान जताया है। अधिकतम तापमान के साथ-साथ रात का न्यूनतम तापमान भी सामान्य से ऊपर बना रहेगा।
आईएमडी ने चेतावनी दी है कि जून के महीने में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में सामान्य से अधिक दिनों तक लू चलेगी। वही, महाराष्ट्र, तेलंगाना और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में भी लू की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

अल नीनो का बढ़ता खतरा
समुद्र की स्थिति पर बात करते हुए डॉ. महापात्र ने बताया कि प्रशांत महासागर में न्यूट्रल इंसो की स्थिति अब अल नीनो की तरफ बढ़ रही है। जून तक अल नीनो सक्रिय होने की संभावना बढ़कर 82 प्रतिशत हो जाएगी, जो जुलाई और अगस्त आते-आते 90 प्रतिशत को पार कर सकती है।
आमतौर पर अल नीनो के सक्रिय होने से भारतीय मानसून कमजोर पड़ता है। दूसरी ओर, हिंद महासागर द्विध्रुव की स्थिति पूरे मानसून सीजन में न्यूट्रल बनी रहेगी।
हालांकि, राहत की बात यह है कि मई के महीने में देश भर में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है, और 27 मई तक संचयी मौसमी बारिश भी सामान्य से 1 प्रतिशत ऊपर रही है।

मानसून का सफर
मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 16 मई को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में दस्तक दे दी थी, जो कि अपनी सामान्य तारीख से चार दिन पहले है। इसके बाद यह दक्षिण अरब सागर और लक्षद्वीप तक आगे बढ़ चुका है। अगले एक सप्ताह के भीतर इसके केरल और पूर्वोत्तर राज्यों में पहुंचने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं।
इस बीच, आईएमडी ने उत्तर-पश्चिम भारत के लोगों को भीषण गर्मी से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद भी जताई है। पश्चिमी विक्षोभ और पूर्वी हवाओं के प्रभाव के कारण अगले तीन दिनों में कई इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और ओलावृष्टि होने की संभावना है, जिससे तापमान में गिरावट आएगी।
मध्य प्रदेश में मौसम का दोहरा मिजाज
मध्य प्रदेश में नौतपा के चौथे दिन भी भीषण गर्मी और लू का प्रकोप जारी रहा, जहां खजुराहो 46.5 डिग्री सेल्सियस के साथ राज्य का सबसे गर्म स्थान रहा और भोपाल में पारा 43.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हालांकि, मौसम विभाग ने शुक्रवार से प्री-मानसून गतिविधियों के कारण मौसम में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं।
प्रशांत महासागर में रिकॉर्ड वार्मिंग
दूसरी ओर, वैश्विक जलवायु में एक चिंताजनक बदलाव देखा जा रहा है, जहां जनवरी 2026 से अब तक मध्य प्रशांत महासागर का औसत तापमान 1 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ चुका है, जो इस सदी का सबसे तेज़ वार्मिंग ट्रेंड है। महासागर के नीनो 3.4 इंडेक्स का तापमान मई 2024 के बाद पहली बार +0.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो एनसो न्यूट्रल से 'अलनीनो' फेज की शुरुआत का संकेत देता है।
ऐतिहासिक रूप से, 1950 के बाद से केवल 6 बार 'सुपर अलनीनो' की स्थिति बनी है, जिसके कारण भारत में मानसून पर गंभीर असर पड़ा है। उदाहरण के लिए, 1972 के सबसे मजबूत सुपर अलनीनो के दौरान समुद्री तापमान 2.3 डिग्री सेल्सियस बढ़ने से केवल 76% बारिश हुई थी, और 1982 के मध्यम अलनीनो में भी देश को भारी सूखे का सामना करना पड़ा था, जिससे आगामी मानसून को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
75 साल में अलनीनो का गणित
| साल | अलनीनो की स्थिति | मानसून की दस्तक | बारिश (%) |
|---|---|---|---|
| 1951 | मोडरेट | 31 मई | 81.3% |
| 1953 | कमजोर | 7 जून | 110% |
| 1957 | मजबूत | 1 जून | 97.6% |
| 1965 | मजबूत | 26 मई | 81.8% |
| 1969 | कमजोर | 17 मई | 100% |
| 1972 | मजबूत | 18 जून | 76.1% |
| 1987 | मजबूत | 2 जून | 80.6% |
| 1997 | मजबूत | 9 जून | 102% |
| 2004 | कमजोर | 4 जून | 86.2% |
| 2009 | कमजोर | 23 मई | 78.2% |
| 2015 | मजबूत | 5 जून | 86.2% |
| 2018 | कमजोर | 29 मई | 90.6% |
| 2023 | मजबूत | 8 जून | 94.4% |
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