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IIT कैंपस में गहराता संकट: दो दशकों में 171 छात्रों ने की आत्महत्या, जिम्मेदार कौन?

Published: Tue, 22 Sep 2026 11:26 PM (IST)

आईआईटी से जुड़े आंकड़ों ने चौंकाया है, जिसमें पिछले दो दशकों में 171 छात्रों की आत्महत्या या असमय मौतें दर्ज की गई हैं।

दो दशकों में 171 आईआईटी छात्रों ने आत्महत्या की या असमय मौत हुई

दो दशकों में 171 आईआईटी छात्रों ने आत्महत्या की या असमय मौत हुई

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के शीर्ष तकनीकी शिक्षण संस्थानों यानी आइआइटी से जुड़े एक आंकड़े ने पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। एक पूर्व छात्र संगठन द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो दशकों में आईआईटी के 171 छात्रों ने आत्महत्या या असमय मौत का रास्ता चुना है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इनमें से लगभग 70 प्रतिशत मौतें पिछले एक दशक में ही दर्ज की गई हैं, जो इन परिसरों में लगातार बढ़ते मानसिक दबाव और गंभीर होती स्वास्थ्य समस्या की ओर इशारा करती हैं।

1 दशक में 120 मौतें 

'ग्लोबल आईआईटी एलुमनी सपोर्ट ग्रुप' के संस्थापक और आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र धीरज सिंह द्वारा संकलित आंकड़ों (वर्ष 2006 से सितंबर 2026 तक) के मुताबिक, साल 2006 से 2015 के बीच 51 छात्रों ने आत्महत्या की थी, जबकि 2016 से सितंबर 2026 के इस दशक में यह संख्या बढ़कर 120 हो गई।

विश्लेषण से यह भी सामने आया है कि इनमें से लगभग 82 प्रतिशत आत्महत्याएं सीधे आइआइटी परिसरों के भीतर हुईं। परीक्षा और परिणाम घोषित होने के समय आत्महत्या के मामलों में सबसे ज्यादा उछाल देखा गया, जबकि सेमेस्टर के छुट्टियों के दौरान इनमें गिरावट दर्ज की गई।

सरकार से रोडमैप की मांग  

यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब पिछले दो महीनों में आईआईटी दिल्ली (ऋषिकेश कुमार) और आईआईटी बांबे (साहिल वाकोडे) जैसी जगहों पर हुई छात्रों की मौतों ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया है।

अध्ययन में यह भी बताया गया है कि सामान्य वर्ग की तुलना में एससी और एसटी वर्ग के छात्र कम उम्र में और लगभग दोगुनी दर से इस त्रासदी का शिकार हुए हैं।

कोविड के बाद के दौर में तो यह असमानता और गहरी हुई है। विशेषज्ञों ने अकादमिक तनाव और सामाजिक असमानताओं से निपटने के लिए सीनियर्स और पूर्व छात्रों के साथ मेंटरिंग, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षकों के प्रशिक्षण सहित 14 सूत्रीय नीतिगत रोडमैप की मांग की है।

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