IIT बॉम्बे छात्र आत्महत्या मामला: मानसिक स्वास्थ्य सुधारों की गूंज और प्रोफेसर पर छिड़ी बहस
आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद परिसर में मानसिक स्वास्थ्य सुधारों और वेलनेस सेल को मजबूत करने की मांग उठी है।

मानसिक स्वास्थ्य सुधारों की गूंज और प्रोफेसर पर छिड़ी बहस। (पीटीआई)
HighLights
आईआईटी बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या से परिसर में रोष।
छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य सुधार और वेलनेस सेल मजबूत करने की मांग की।
प्रोफेसर पर दर्ज मामले को लेकर छात्रों-शिक्षकों में मतभेद सामने आए।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी बॉम्बे के परिसर में पसरा सन्नाटा और सुलगता रोष आज हर संवेदनशील दिल को झकझोर रहा है। ऊर्जा विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के 22 वर्षीय मेधावी छात्र साहिल वाकोडे की असमय और दर्दनाक मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।
18 सितंबर की उस मनहूस शाम को जब साहिल का शव उसके हास्टल के कमरे में पंखे से लटका मिला, तो किसी को यकीन नहीं हुआ कि एक हंसता-खेलता भविष्य इस तरह बुझ जाएगा। इस हृदयविदारक घटना के बाद से ही संस्थान के भीतर जो दर्द और आक्रोश उमड़ा है, वह केवल एक छात्र की क्षति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आईआईटी के भीतर की व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं पर भी गहरे सवाल खड़े करता है।
आत्महत्या के मामले के बाद उठी चिंताओं का हवाला देते हुए छात्र संस्थान के स्टूडेंट वेलनेस सेल में बदलाव और मानसिक स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान देने की मांग कर रहे हैं।
साहिल के इस कदम के पीछे कथित तौर पर मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन (चैटजीपीटी के इस्तेमाल) से जुड़ा एक विवाद बताया जा रहा है। इस त्रासदी के बाद छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा और परिसर में प्रदर्शन शुरू हो गए।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुंबई पुलिस ने साहिल के परिवार की शिकायत पर प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के खिलाफ एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाने) के तहत मामला दर्ज किया है।
परिसर में वेलनेस सेल को मजबूत किया जाए- छात्र
इस पूरे घटनाक्रम के बीच छात्रों का एक बड़ा वर्ग बेहद परिपक्व और गंभीर रुख अपनाए हुए है। छात्रों का कहना है कि वे किसी भी तरह के शैक्षणिक कदाचार का समर्थन नहीं करते, लेकिन साहिल की मौत ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि संस्थान की मौजूदा प्रणालियों में भारी खामियां हैं।
छात्रों ने मांग की है कि परिसर में वेलनेस सेल को मजबूत किया जाए, मनोचिकित्सकों (सायकियाट्रिस्ट) की उपलब्धता बढ़ाई जाए और अकादमिक तनाव से निपटने के लिए एक संवेदनशील व्यवस्था बने। छात्रों का यह भी दर्द था कि नीतिगत फैसलों में उनकी आवाज को भी सुना जाना चाहिए।
प्रोफेसर डूला के समर्थन में आया फैकल्टी फोरम
दूसरी ओर, इस मामले में प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला पर हुई कार्रवाई को लेकर छात्रों और शिक्षकों के बीच अलग-अलग राय देखने को मिली है। एक तरफ जहां कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रोफेसर के कार्यकाल के दौरान कड़े नियमों और निलंबन के रवैये से छात्रों में भय का माहौल रहता था, वहीं दूसरी ओर छात्र प्रतिनिधियों और शिक्षकों के एक बड़े समूह ने प्रोफेसर का खुलकर समर्थन किया है।
फैकल्टी फोरम और कई छात्रों का साफ कहना है कि प्रोफेसर ने केवल सीनेट द्वारा अनुमोदित परीक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया था और उन्हें इस मामले में घसीटना या उन पर जातिगत भेदभाव का आरोप लगाना पूरी तरह गलत और निराधार है।
छात्रों का मानना है कि मीडिया में दिखाए जा रहे कुछ जातिगत कोण वास्तविकता से परे हैं। तनाव यकीनन इंजीनियरिंग की कठिन पढ़ाई का हिस्सा होता है, लेकिन व्यवस्था को और अधिक समावेशी और क्षमाशील होना चाहिए।
साहिल के पिता ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
इस बीच, साहिल के पिता रविंद्र वाकोडे ने अपने बेटे को खोने के असहनीय दर्द के साथ प्रशासन की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, जिससे उनके बेटे को न्याय मिल सके। यवतमाल का रहने वाला साहिल अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी यह विदाई आईआईटी परिसरों में पिसते युवा मानसिक स्वास्थ्य और अकादमिक दबाव के मानवीय पहलुओं पर एक लंबी बहस छोड़ गई है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
