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गरीबी, ताने-बच्चे से दूरी फिर RAS का सफर, वकील को थप्पड़ मारने वाली DSP अंजू यादव ने दिया UPSC का सक्सेस मंत्र

Published: Thu, 15 Oct 2026 07:16 PM (IST)

डीएसपी अंजू यादव, जिन्होंने गरीबी और चुनौतियों का सामना कर शिक्षक से आरएएस अधिकारी तक का सफर तय किया, हाल ...और पढ़ें

अंजू यादव का गरीबी से आरएएस अधिकारी बनने का प्रेरणादायक सफर।

अंजू यादव का गरीबी से आरएएस अधिकारी बनने का प्रेरणादायक सफर।

HighLights

  1. अंजू यादव का गरीबी से आरएएस अधिकारी बनने का प्रेरणादायक सफर।

  2. किशनगढ़ में वकील को थप्पड़ मारने के बाद डीएसपी अंजू यादव APO।

  3. पति के निधन के बावजूद RAS परीक्षा में सफलता, बनीं मिसाल।

डिजिटल डेस्क, जयपुर। अजमेर के किशनगढ़ में वकील बाबूलाल बागोरिया को थप्पड़ मारने के बाद से DSP अंजू यादव काफी चर्चा में हैं। 13 अक्टूबर को पुलिस ने उनके खिलाफ कार्रवाई की और मुख्यमंत्री के निर्देश पर उन्हें APO कर दिया गया। लेकिन अंजू यादव कौन हैं और कैसे एक शिक्षिका से वह DSP तक पहुंची चलिए जानते हैं।

कौन हैं अंजू यादव?

अंजू का जन्म हरियाणा के नारनौल जिले के एक छोटे से गांव, ढोलेरा में एक किसान परिवार में हुआ था। गांव के सरकारी स्कूल से अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद अंजू ने नारनौल के गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज में एडमिशन लिया। हालांकि, आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी।

एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया,'एडमिशन मिलने के बाद भी मुझे कॉलेज छोड़ना पड़ा। मेरे पिता की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि मैं आगे पढ़ सकूं। लेकिन मैंने ठान लिया था कि मैं अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ूंगी इसलिए मैंने डिस्टेंस लर्निंग के जरिए अपना ग्रेजुएशन पूरा किया।'

शादी के बाद और कठिन हो गया जीवन

शादी के बाद अंजू के जीवन में एक कठिन दौर आया। ससुराल में उनका जीवन घर के कामों तक ही सिमट कर रह गया। उन्होंने बताया, 'शादी के बाद हालात अच्छे नहीं थे। घर से कोई खास सहयोग नहीं मिला। मेरा जीवन बस घर के कामों और पशुओं की देखभाल तक ही सीमित हो गया था।'

अंजू ने बताया कि 2012 में बेटे के जन्म के बाद उन्होंने अपने जीवन को बदलने के बारे में गंभीरता से सोचना शुरू किया। उन्होंने कहा, 'मेरे पास केवल दो ही रास्ते थे या तो सब कुछ जैसा चल रहा है वैसा ही चलने दूं, या फिर कड़ी मेहनत करूं और कोई सरकारी नौकरी हासिल करूं।'

अंजू ने अपने सपने को पूरा करने के लिए एक मुश्किल फैसला लिया और अपने एक महीने के बेटे के साथ वो मायके आ गई। फिर उसे वहीं अपने माता-पिता के पास छोड़कर वो जयपुर आ गई। जहां उन्होंने शिक्षक भर्ती परीक्षाओं की तैयारी शुरू की।

वो कई महीनों तक अपने बेटे से मिल नहीं पाती थी। उसकी जिंदगी के कई अहम पल में वो उसके साथ नहीं होती हैं। लेकिन उन्होंने इस पल में हर नहीं मानी और अपने सपने के लिए पूरी जान लगाकर मेहनत की।

शिक्षक से सिविल सेवा की उम्मीदवार तक

पुलिस सेवा में आने से पहले अंजू कई सरकारी नौकरियां हासिल कर चुकी थीं। सबसे पहले, 2016 में वह मध्य प्रदेश के भिंड स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में शिक्षिका बनीं और वहां लगभग दो साल तक पढ़ाया।

बाद में, उन्होंने राजस्थान और दिल्ली में भी शिक्षण पदों के लिए योग्यता हासिल की और दिल्ली के एक सरकारी स्कूल में कई वर्षों तक शिक्षिका के रूप में काम किया। एक स्थिर सरकारी नौकरी होने के बाद भी वह कुछ और बड़ा करने का सपना देखती रहीं।

पहले ही प्रयास में हासिल की सफलता

अंजू ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा 2021 दी और अपने पहले ही प्रयास में इसे पार कर लिया। 2023 में घोषित परिणामों के बाद, उन्हें राजस्थान पुलिस सेवा में जगह मिली।

ट्रेनिंग पूरी करने के बाद, सितंबर 2025 में जयपुर स्थित राजस्थान पुलिस अकादमी में पासिंग-आउट परेड के साथ, उन्होंने आधिकारिक तौर पर पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के रूप में कार्यभार संभाला।

एक ग्रामीण छात्रा और सरकारी शिक्षिका से लेकर पुलिस अधिकारी बनने तक का उनका सफर, आज कई महिलाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा बन गया है।

पति का निधन, लेकिन नहीं रूके अंजू के कदम

साल 2021 में जब अंजू राजस्थान की प्रशासनिक सेवा के लिए तैयारी कर रही थीं उसी दौरान अंजू के पति नित्यानंद का एक बीमारी से जूझने के बाद निधन हो गया।

पति के निधन के बाद टूटने और हार मारने के बजाय उन्होंने अपना पूरा फोकस राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा की तैयारी में लगा दिया।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने बताया कि जब उन्होंने तैयारी शुरू की थी, तब उन्हें परीक्षा प्रक्रिया की बुनियादी बातों की भी जानकारी नहीं थी, यहां तक कि उन्हें RAS का पूरा नाम तक नहीं पता था।

उन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारियों को संभालते हुए अपनी पूरी लगन से पढ़ाई की, और साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प अनुभव से कहीं अधिक मायने रखता है।

क्यों खबरों में आई अंजू यादव

9 अक्टूबर को किशनगढ़ में सड़क किनारे खड़ी एक कार को लेकर वकील बाबूलाल और पुलिस अधिकारी अंजू यादव के बीच बहस हो गई, जो बाद में विवाद में बदल गई। इस दौरान महिला पुलिस अधिकारी ने वकील को थप्पड़ मार दिया।

इसके बाद वहां वकीलों की भीड़ जमा हो गई। सभी वकील ओल्ड रेलवे स्टेशन रोड स्थित ट्रैफिक चौकी पर पहुंचे और महिला अधिकारी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने लगे।

घटना के विरोध में वकील मुख्य चौराहे पर पहुंच गए और सड़क जाम कर दी। देर रात महिला अधिकारी द्वारा वकील बाबूलाल से माफी मांगने के बाद मामला सुलझ गया।

छात्रों के लिए प्रेरणा बनी अंजू यादव

एक होनहार बेटी, जिसे संसाधनों की कमी के कारण एडमिशन मिलने के बावजूद कॉलेज छोड़ना पड़ा, एक पत्नी, जिसने ससुराल वालों के ताने सहे, एक मां, जिसने बेहतर भविष्य के लिए पढ़ाई करने की खातिर अपने छोटे बेटे को पीछे छोड़ दिया । ये सब भले ही अलग-अलग कहानी लगें लेकिन ये सभी 5वें बैच की प्रोबेशनर ऑफिसर, अंजू यादव के प्रेरणादायक सफर का हिस्सा हैं।

हर साल लाखों उम्मीदवार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। अक्सर उन्हें चिंता होती है कि उन्होंने बहुत देर से शुरुआत की है, या उनके निजी हालात ऐसे हैं कि सफलता पाना असंभव है। अंजू यादव का सफर इस सोच को गलत साबित करता है और लाखों छात्रों को यह प्रेरणा देता है कि अगर मन में आप कुछ करने का ठान लो, तो कोई भी मुश्किल आपको रोक नहीं सकती है। 

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