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‘बैलेट पेपर पर चुनाव लड़कर दिखाएं’, हिमंत सरमा की कांग्रेस को चुनौती; केरलम, कर्नाटक और तेलंगाना की सरकारों से मांगा इस्तीफा

Published: Mon, 12 Oct 2026 10:39 PM (IST)

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी को चुनौती दी है कि अगर कांग्रेस शासित राज्य सरकारें इस्तीफा ...और पढ़ें

हिमंत सरमा ने राहुल गांधी को बैलेट पेपर चुनाव की चुनौती दी

हिमंत सरमा ने राहुल गांधी को बैलेट पेपर चुनाव की चुनौती दी

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने SIR और 'वोट चोरी' के खिलाफ INDI गठबंधन के विरोध प्रदर्शन के बीच कांग्रेस पर निशाना साधा है।

सरमा ने राहुल गांधी को सीधे चुनौती दी कि अगर केरल, तेलंगाना और कर्नाटक की कांग्रेस सरकारें इस्तीफा दे दें, तो वह बैलेट पेपर से चुनाव लड़ने को तैयार हैं।

गुवाहाटी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने राहुल और कांग्रेस पर हमला करते हुए चुनौती दी, 'अगर राहुल गांधी और कांग्रेस अपनी सरकारों के इस्तीफे के लिए तैयार हैं, तो मैं बैलेट पेपर से चुनाव लड़ने को तैयार हूं।

केरल, कर्नाटक और तेलंगाना की सरकारों को इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वे सरकारें भी ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में 'वोट चोरी' के जरिए बनी थीं।'

हिमंत ने राहुल गांधी को चुनौती दी

हिमंत ने आगे कहा, 'आज कांग्रेस के पास दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करने के लिए भी पर्याप्त लोग नहीं हैं। उन्हें असम और देश भर से लोगों को बुलाना और इकट्ठा करना पड़ा... मैं तैयार हूं।'

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा, 'प्रस्ताव रखिए; मैं एक ऐसा उदाहरण पेश करना चाहता हूं जिसमें मैं सांसद पद से इस्तीफा दूं और फिर एक आंदोलन शुरू करूं।' उन्होंने SIR का बचाव करते हुए कहा, 'भारत में SIR की जरूरत है।

बड़े पैमाने पर अवैध घुसपैठ के कारण असम, पश्चिम बंगाल और झारखंड की डेमोग्राफी (जनसांख्यिकीय संरचना) बदल गई है। अवैध घुसपैठ हर दिन हो रही है, और अगर हम वोटर लिस्ट से उनके नाम नहीं हटा पाए, तो भारत की डेमोग्राफी बदल जाएगी।'

उन्होंने कहा, 'मेरी मांग है कि हर पांच साल में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) होना चाहिए। तभी भारतीय लोकतंत्र बच पाएगा। उन्होंने कांग्रेस के 'वोट चोरी' विरोध प्रदर्शन को बिना जनता के समर्थन के सत्ता बदलने की कोशिश बताया।

'वोट चोरी' विरोध को जन-समर्थन रहित बताया

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, 'बिना किसी जन-समर्थन के, राहुल गांधी के साथ सिर्फ़ 2,000-3,000 लोग ही जुड़ रहे हैं। यह पूरा विरोध प्रदर्शन कुछ निराश लोगों और 'दिमागी नक्सलियों' द्वारा किया जा रहा है, जो नहीं चाहते कि भारत तरक्की करे।'

यह घटनाक्रम तब हुआ है जब सोमवार को INDIA गठबंधन ने राहुल और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। उन्होंने वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) से जुड़ी कथित चुनावी गड़बड़ियों का विरोध किया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

यह विरोध प्रदर्शन तब हुआ जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं से मिलने से इनकार कर दिया; उन्होंने कहा कि चूंकि मामला पहले से ही लंबित है, इसलिए उन्हें कानूनी तरीकों से अदालत का रुख करना चाहिए।

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