'सीएम का काफिला मरीज की जान से बड़ा नहीं'; असम में एम्बुलेंस रोकने पर हिमंत बिस्वा सरमा ने मांगी माफी
असम के सिलचर में मुख्यमंत्री के काफिले के लिए एम्बुलेंस रोकने के आरोप में चार ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है।
HighLights
सिलचर में एम्बुलेंस रोकने पर चार ट्रैफिक पुलिसकर्मी निलंबित।
मुख्यमंत्री के काफिले के लिए एम्बुलेंस 4 मिनट तक रोकी गई।
सीएम ने आपातकालीन सेवाओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
डिजिटल डेस्क, दिसपुर। असम के सिलचर में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के काफिले को निकालने के लिए गंभीर रूप से बीमार मरीज को ले जा रही एम्बुलेंस को रास्ते में रोकने के आरोप में गुरुवार को चार ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया।
यह कार्रवाई 47 वर्षीय मरीज की सिलचर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (SMCH) में इलाज के दौरान हुई मौत के बाद सामने आई है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने मामले की जांच के आदेश देते हुए पीड़ित परिवार से सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी थी।
काफिले के लिए 4 मिनट तक रोकी गई थी एम्बुलेंस
लिवर सिरोसिस से पीड़ित राजराज चक्रवर्ती को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया जा रहा था। इसी दौरान रामनगर आईएसबीटी के पास मुख्यमंत्री के काफिले को रास्ता देने के लिए पुलिस ने एम्बुलेंस को करीब 4 मिनट तक रोके रखा।
इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मुख्यमंत्री के संज्ञान में यह मामला आया।
'वीआईपी मूवमेंट से ज्यादा जरूरी है आपातकालीन सेवा': मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घटना पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी वीआईपी आवाजाही की तुलना में आपातकालीन चिकित्सा सेवा को हमेशा प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में वीआईपी काफिले के लिए एम्बुलेंस या आपातकालीन वाहनों को नहीं रोका जाना चाहिए। नए असम में वीआईपी संस्कृति की कोई जगह नहीं है। मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति केवल मुख्य सेवक है। वीआईपी मूवमेंट से जुड़े दिशा-निर्देशों का पूरी तरह से पालन होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने मरीज की मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मरीज गंभीर बीमारी से जूझ रहा था और अस्पताल पहुंचने में हुई कुछ मिनटों की देरी का उसकी मौत से सीधा संबंध नहीं था।
पीड़ित परिवार ने लगाई मदद की गुहार
मृतक चक्रवर्ती अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनकी पत्नी ने दुख व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री से आर्थिक सहायता की अपील की है।
उन्होंने कहा कि उनके पति अपने पीछे दो छोटे बच्चे छोड़ गए हैं, और परिवार के सामने अब जीवन-यापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
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