रिभव ऋषि का बिचौलिया था विक्रम वधवा, 132 बार फोन पर बातचीत; हरियााण में 504 के घोटाले में जमानत नहीं
हरियाणा के 504 करोड़ रुपये के सरकारी फंड घोटाले में रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वधवा की जमानत याचिका खारिज हो ...और पढ़ें

रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वधवा।
HighLights
विक्रम वधवा की जमानत याचिका सीबीआई कोर्ट से खारिज।
504 करोड़ के सरकारी फंड घोटाले में बिचौलिए की भूमिका।
विक्रम वधवा को 37.82 करोड़ रुपये मिलने के सबूत मिले।
जागरण संवाददाता, पंचकूला। हरियाणा के सरकारी विभागों के खातों से करीब 504 करोड़ रुपये के घोटाले मामले में गिरफ्तार रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वधवा को अदालत से राहत नहीं मिली है।
सीबीआई की विशेष अदालत ने मामले में मुख्य सह आरोपित विक्रम वधवा की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि आरोपित की भूमिका और उसके खिलाफ जांच में सामने आए साक्ष्यों को देखते हुए उसे राहत नहीं दी जा सकती।
सीबीआई के अनुसार, हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों की राशि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और निजी बैंक में जमा थी। खातों और एफडीआर में गड़बड़ी सामने आने के बाद जांच शुरू हुई थी।
बाद में राज्य सरकार के निर्देश पर मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। जांच में करीब 504 करोड़ रुपये सरकारी खातों से निकालकर फर्जी कंपनियों के माध्यम से ट्रांसफर किए गए।
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अधिकारियों के साथ संपर्क साधने का काम करता था वधवा
जांच एजेंसी के मुताबिक चंडीगढ़ के सेक्टर-36डी निवासी विक्रम वधवा मुख्य आरोपित रिभव ऋषि के लिए बिचौलिए की भूमिका निभाता था। उस पर सरकारी अधिकारियों से संपर्क साधने, बैंक खातों और फंड ट्रांसफर में मदद करने और कथित हेराफेरी की रकम को ठिकाने लगाने का आरोप है।
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सीबीआई का दावा है कि उसे कुल 37.82 करोड़ रुपये मिले, जिनमें 4.57 करोड़ रुपये नकद और करीब 33.25 करोड़ रुपये शेल कंपनियों के जरिये खातों में आए। इसके अलावा पांच अचल संपत्तियों में करीब 55 करोड़ रुपये निवेश करने की बात भी सामने आई है।
विक्रम और रिभव ऋषि के बीच जून 2024 से जनवरी 2026 के दौरान 132 बार फोन पर बातचीत हुई। आरोपित के नाम और रकम का उल्लेख एक अन्य आरोपित के मोबाइल में मिले नोट में भी था।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि विक्रम का बैंक या सरकारी विभागों से कोई संबंध नहीं था और उसके लेनदेन सामान्य कारोबारी गतिविधियों का हिस्सा थे। हालांकि अदालत ने मामले की गंभीरता, आरोपित की कथित भूमिका और बड़ी रकम के लेनदेन को देखते हुए उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई।