डेढ़ हजार की नौकरी से 590 करोड़ के घोटाले तक, रियल एस्टेट इन्वेस्टर विक्रम वधवा की हैरान करने वाली कहानी
चंडीगढ़ का रियल एस्टेट निवेशक विक्रम वधवा हरियाणा के सरकारी विभागों के 590 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में आरोपित ...और पढ़ें

चंडीगढ़ का रियल एस्टेट इन्वेस्टर विक्रम वधना फरार। एसीबी को तलाश।
HighLights
बैंक घोटाले में विक्रम वधवा आरोपित।
एसीबी की टीम को तलाश, छापेमारी जारी।
लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया।
राजेश ढल्ल, चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी विभागों के खातों से जुड़े 590 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में चंडीगढ़ के रियल एस्टेट इन्वेस्टर 52 वर्षीय विक्रम वधवा का नाम जुड़ा है। हरियाणा एंट्री क्रप्शन ब्यूरो (एसीबी) को उसकी तलाश है।
हवाई अड्डों, समुद्री बंदरगाहों और स्थलीय सीमाओं पर निगरानी के लिए लुकआउट सर्कुलर जारी किया है। प्राथमिकी दर्ज होने से पहले ही वह फरार हो गया। उसके एक ठिकाने से डीवीआर जब्त की गई है।
वधवा की गिरफ्तारी से कई नामी व्यक्तियों और आईएएस अफसरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हम पढ़ाते हैं केयर टेकर से ट्राईसिटी में 100 करोड़ से अधिक की संपत्ति का मालिक बनने और डेढ़ हजार की नौकरी से 590 कराेड़ रुपये के घोटाले के सरगना बनने तक की वधवा की कहानी...

जब पंजाब के मलोट से चंडीगढ़ आया
पंजाब के मलोट निवासी वधवा ने बारहवीं तक की पढ़ाई करने के बाद वर्ष 1990 के दशक में चंडीगढ़ का रुख किया। उसके पिता सरकारी स्कूल में अध्यापक थे। माता गृहिणी थीं। प्रारंभिक दिनों में उसने अपने मामा के गेस्ट हाउस में केयर टेकर का काम देखा। यहीं से उसने वीआईपी, रसूखदारों और आईएएस समेत बड़े अफसरों के साथ मेलजोल बढ़ाया।
इसके बाद रियल एस्टेट की तरफ रुख किया। 2008 में चंडीगढ़ के सेक्टर-22 स्थित एक होटल खरीदा और एक अन्य होटल कंपनी में निदेशक के रूप में भी जुड़ा रहा। सेक्टर 7 में डिस्कोथेक चलाया, लेकिन वह कोरोना काॅल के दौरान बंद हो गया।
समय के साथ अपने संपर्क बढ़ाता गया और व्हाइट मनी को ब्लैक में करने के धंधा भी शुरू कर दिया। रियल एस्टेट में लोगों का पैसा इन्वेस्ट करने लगा और 590 करोड़ के घोटाले को अंजाम दिया।
ऐसे किया करोड़ों का घोटाला
प्रारंभिक जांच के अनुसार वधवा ने हरियाणा सरकार के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से निकटता का लाभ उठाया। आरोप है कि उसने कुछ विभागाध्यक्षों को सरकारी धनराशि एक निजी बैंक में सावधि जमा के रूप में रखने के लिए प्रेरित किया। बैंक अधिकारियों से कथित सांठगांठ के बाद जमा धनराशि को फर्जी कंपनियों के माध्यम से दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया गया।
जांच में सामने आया है कि बड़ी रकम को महंगी संपत्तियां खरीदने और अन्य परिसंपत्तियों में लगाने के लिए उपयोग किया गया। करीब 100 करोड़ रुपये शहर के प्रमुख आभूषण विक्रेताओं को सोना खरीदने के लिए भेजे गए। लगभग 10 करोड़ रुपये रिश्तेदारों और सहयोगियों के खातों में स्थानांतरित किए गए, जिन्हें बाद में नकद के रूप में वापस लिया गया।
परिवार के सदस्यों के भी अब मोबाइल फोन बंद
सूत्रों के अनुसार स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट नामक खाते के जरिए भी धनराशि स्थानांतरित की गई। अब वधवा की तलाश में एसीबी छापेमारी जारी है। परिवार के सदस्यों से संपर्क करने के प्रयास भी सफल नहीं हो सके हैं, क्योंकि उनके फोन बंद आ रहे हैं। एसीबी के अफसरों का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं।
वधवा के बारे में ये भी जानें
- सेक्टर 33 में दो कनाल का मकान
- सेक्टर 21 और 36 में एक-एक कनाल के मकान
- न्यू चंडीगढ़ में एक फार्म हाउस भी खरीदा।
- मोहाली में तीन सीमित देयता भागीदारी फर्मों में नामित भागीदार।
- महंगी घड़ी, लक्जरी वाहन और विदेशी यात्राओं का शौकीन।
- एक बेटे ने लंदन में उच्च शिक्षा प्राप्त की है।
- दूसरा बेटा गुरुग्राम में रियल एस्टेट के काराेबार से जुड़ा है।
