नई दिल्ली (पीटीआई)। ऑनलाइन खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने के लिए सरकार ने कुछ चीजों को जरूरी किया है। अगले साल जनवरी से ई-कॉमर्स कंपनियों को आइटमों पर अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के अलावा अन्य जानकारियां भी प्रिंट करनी होंगी। इनमें एक्सपायरी डेट और कस्टमर केयर नंबर शामिल हैं। कंपनियों को नए नियम लागू करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है।

बीते महीने उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने इस बाबत लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) रूल्स, 2011 में संशोधन किया है। नए नियम का पालन करने के लिए कंपनियों को छह महीने का समय दिया गया है।

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जैसी सुरक्षा उपभोक्ताओं को ऑफलाइन में मिलती है, ऑनलाइन के मामले में भी वे उसी तरह की सुरक्षा के हकदार हैं। अभी ऑनलाइन बिकने वाली वस्तुओं पर सिर्फ एमआरपी का जिक्र होता है। ई-कॉमर्स कंपनियों को सामान पर एमआरपी के अलावा मैन्यूफैक्चरिंग की तारीख, खराब होने की तिथि, कुल वजन, निर्माण करने वाले देश और कंज्यूमर केयर विवरण भी देने होंगे।

नए नियमों का पालन करने के लिए कंपनियों को काफी समय दिया जा चुका है। जनवरी 2018 से ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से बिकने वाले सभी उत्पादों पर ये जानकारियां देना अनिवार्य होगा। कंपनियों को ये सभी जानकारियां बड़े आकार के शब्दों में देनी होंगी जिससे उपभोक्ताओं को को पढ़ने में कोई दिक्कत न हो। सरकार ने यह कदम ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ मिल रही शिकायतों के कारण उठाया है। फ्लिपकार्ट, अमेजन इंडिया, स्नैपडील, ग्रोफर्स और बिगबास्केट जैसी कंपनियों का भारतीय ई-मार्केटप्लेस पर राज है।

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Posted By: Kishor Joshi