नई दिल्ली, कुमार जितेंद्र ज्योति। गरीब रथ देश में साइड मिडिल बर्थ वाली पहली ट्रेन है। साइड बर्थ पर RAC (रिजर्वेशन एगेंस्ट कैंसिलेशन) नहीं अलॉट करने वाली भी यह पहली ट्रेन रही। अब गरीब रथ में दो और विशेषताएं जोड़ी गई हैं। यह भी परेशानी वाली ही है। यह देश की पहली और संभवत: इकलौती ट्रेन बन गई है, जिसमें तीन RAC यात्रियों को एक बर्थ अलॉट की जाती है। पहली और संभवत: इकलौती ऐसी ट्रेन भी है, जिसमें मिडिल बर्थ पर 3 यात्रियों को बैठने दिया जाता है। और, संभवत: ऐसी भी पहली ही ट्रेन है, जिसमें यह सब होने की जानकारी यात्री को बोगी में जाने के पहले नहीं मिल सकती। पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) या ऑनलाइन टिकट जारी करने वाले इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) को भी इन एक्सक्लूसिव विशेषताओं की जानकारी नहीं, जिसके कारण RAC टिकट लेकर ट्रेन में चढ़े यात्री हैरान-परेशान हो जा रहे। IRCTC दिखाता है कि देश में अभी 56 गरीब रथ ट्रेनें चल रहीं। इसके साथ ही इंटरनेट पर लाखों सवाल-जवाब इस बात पर हैं कि गरीब रथ ट्रेनों से साइड मिडिल बर्थ हटाई जा रही हैं। लेकिन, सूचना का अधिकार (RTI) के तहत आए जवाब में रेलवे बोर्ड ने 18 फरवरी 2009 के आदेश का हवाला देते हुए लिखा है कि गरीब रथ से साइड मिडिल बर्थ नहीं हटाई गई हैं। यानी, देश में ऐसी असुविधा’ वाली यही ट्रेन बची है।

3 यात्री पर 1 बर्थ का प्रमाण है यह चार्ट

गरीब रथ में एक बर्थ पर 3 आरएसी का प्रमाण दो अलग तारीखों के बर्थ चार्ट हैं, जिनमें 10 नंबर पर तीन यात्री अलॉट किए गए हैं। इसी तरह 10 नंबर मिडिल बर्थ होने की शिकायत रेल मदद के रेफरेंस नंबर 2022071503643 और 2022071503886 और 2022071503903 पर दर्ज है। इन शिकायतों और बर्थ चार्ट की पड़ताल PRS से लेकर IRCTC तक की गई तो सामने आया कि ज्यादातर गरीब रथ ट्रेनों में साइड मिडिल बर्थ नहीं हटाई गई हैं। RTI में रेलवे बोर्ड का जवाब भी यही है, हालांकि बर्थ की उपलब्धता के कारण कई गरीब रथ ट्रेनों में बिना साइड मिडिल बर्थ वाली सामान्य एसी थ्री बोगियां भी लग रही हैं। 

साइड मिडिल बर्थ लगी होने के कारण यहां सामान्य ट्रेनों की तरह साइड बर्थ पर आरएसी यात्री अलॉट नहीं हो सकते, इसलिए हर बोगी में तीन ही आरएसी टिकट जारी होते हैं। रेलवे के अनुसार, तीन RAC यात्रियों के लिए दो बर्थ अलॉट करने का प्रावधान है, लेकिन चार्ट में साफ नजर आता है कि तीन यात्रियों के नाम और PNR के आगे एक ही बर्थ नंबर है। बिहार से शुरुआत के कारण इस ट्रेन का सबसे जबरदस्त क्रेज भी यहीं है और साइड मिडिल बर्थ को हटाने की मांग भी ज्यादातर यहीं से उठती है। ऐसे में बिहार के समस्तीपुर रेल मंडल के रेल उपभोक्ता सलाहकार समिति (DRUCC) के सदस्य राजीव वर्मा और दानापुर DRUCC के सदस्य कुंदन भारती कहते हैं- “गरीब रथ में साइड मिडिल बर्थ डालकर जितनी कमाई करनी थी, तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद के जमाने में ही कर ली गई। अब इसे हटाकर गरीब यात्रियों को राहत देने की मांग हम बार-बार कर रहे हैं। रेलवे बोर्ड तक बात पहुंची हुई है, जल्द ही बिहार के कई सांसदों के जरिए यह मांग वहां पहुंचाई जाएगी। इसी के कारण सारी परेशानी है।”

चार्ट 9 बर्थ वाले कंपार्टमेंट का, बोगी 8 वाली भी

ऑफलाइन टिकट जारी करने वाले पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) या ऑनलाइन टिकट जारी करने वाली इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) के सॉफ्टवेयर में इसके लिए 10 नंबर बर्थ तय है और 11 नंबर बर्थ को खाली रखा जाता है। इसी में कोच और बर्थ अलॉटमेंट के सिस्टम में तालमेल संकट के कारण 3 तरह की परस्थितियां सामने आ रही हैं।

लालू की ट्रेन से राहत, कॉन्सेप्ट से परेशानी

2006 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद ने मध्यवर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों को ट्रेन में एसी की किफायती यात्रा कराने के लिए गरीब रथ ट्रेन की शुरुआत की थी। पहली ट्रेन पंजाब के अमृतसर से बिहार के सहरसा के बीच चली थी। सभी थ्री एसी बोगी वाली इस ट्रेन की बाकी सारी बातों को संतोषजनक माना गया, लेकिन इससे शुरू साइड मिडिल बर्थ के कॉन्सेप्ट की शुरू से घोर निंदा हुई। साइड की लोअर बर्थ को थोड़ा नीचे और अपर बर्थ को थोड़ा ऊपर कर मिडिल बर्थ डाल दी गई थी। हर कंपार्टमेंट में इसी मिडिल बर्थ को बढ़ाकर इस ट्रेन को अन्य ट्रेनों की एसी बोगियों की कमाई के हिसाब से संतुलित बताया जाता रहा। इसी आधार पर कमाई बढ़ाने के लिए कई मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में भी यह प्रयोग किया गया। ऐसी बर्थ को जोड़ने के बाद ट्रेन परिचालन को भले ही फायदेमंद और मध्य व निम्न आय वर्ग के लिए मुफीद बताया जाता रहा, लेकिन साइड मिडिल बर्थ के कारण साइड बर्थ पाने वाले तीनों यात्रियों में से किसी की यात्रा सहज-संतोषजनक नहीं रही।

व्यापक विरोध के बाद मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों से इसे हटाया गया। RTI से हासिल जवाब के अनुसार, “18 फरवरी 2009 को रेलवे बोर्ड के पत्रांक 2007/M/C/137/9/Pt के तहत बाकी जिन ट्रेनों में साइड मिडिल बर्थ का प्रावधान किया गया था, उसे हटाया गया लेकिन गरीब रथ के लिए इसी जारी रखा गया है।” इसका विरोध लगातार जारी है। अब भी इन्हें हटाने की अनुशंसा अलग-अलग रेल जोनों से रेल मंत्रालय तक पहुंच रही हैं। नरेंद्र मोदी सरकार में थ्री एसी की बोगियों में बर्थ की संख्या बढ़ाते हुए थ्री एसी इकोनॉमी कोच लाए गए, लेकिन इसमें साइड मिडिल बर्थ का प्रावधान नहीं किया गया है।

RAC को लेकर आदेश कुछ, प्रावधान कुछ और

RTI के जवाब में रेलवे बोर्ड की जो चिट्ठियां संलग्न की गई हैं, वह बताती हैं कि 14 नवंबर 2006 को जारी आदेश के अनुसार साइड मिडिल वाली गरीब रथ के कोच में 8 यात्रियों को RAC देने का प्रावधान था। कोच के दोनों सिरों के दो-दो कंपार्टमेंट में एक-एक लोअर बर्थ RAC यात्रियों के लिए होते थे। मतलब, चार लोअर बर्थ और 8 यात्री। फिर, पत्रांक 2006/TG-I/20/P/Garib Rath के तहत 10 जनवरी 2008 को कॉमर्शियल सर्कुलर नंबर 3 जारी किया गया, जिसमें हर बोगी में RAC यात्रियों की संख्या घटाकर 3 की गई और इनके लिए बर्थ नंबर 4 और 5 को अलॉट किया गया।

RTI के अनुसार गरीब रथ में RAC के लिए यही प्रावधान लागू है, लेकिन हकीकत यह है कि ट्रेन में हर बोगी के 3 यात्रियों को बर्थ नंबर 10 अलॉट की जा रही है। रेल मंत्रालय से जुड़ी पैसेंजर एमिनिटीज कमिटी (PAC) के सदस्य सुनील राम कहते हैं- “गरीब रथ से साइड मिडिल बर्थ हटाने की मांग वर्षों से हो रही, लेकिन अब यह चौंकाने वाली बात है कि RAC में तीन यात्रियों को एक बर्थ दी जा रही है। एक तो यह बहुत गलत है और उसपर मिडिल बर्थ मिलना तो बिल्कुल अमानवीय। निश्चित रूप से कमिटी साइड मिडिल बर्थ हटाने और RAC के इस सिस्टम को बदलने के लिए दबाव बनाएगी।” गरीब रथ की इन समस्याओं के बारे में जब भारतीय रेलवे के कार्यकारी निदेशक (सूचना एवं प्रचार) अमिताभ शर्मा से बात की गई तो उन्होंने संबंधित विभाग से जानकारी लेकर बताया- “गरीब रथ एक्सप्रेस ट्रेनों में दो प्रकार के डिब्बे जोड़े जा रहे हैं- एक में प्रति कंपार्टमेंट 8 बर्थ हैं, जिनमें साइड मिडिल बर्थ नहीं है और दूसरे में साइड मिडिल बर्थ समेत 9 बर्थ हैं। 9 बर्थ प्रति कंपार्टमेंट वाली कुछ गरीब रथ ट्रेनों में बर्थ नंबर 4 और 5, जबकि कुछ में 10 और 11 नंबर बर्थ पर RAC के तीन यात्रियों को समायोजित करने का प्रावधान है।”

यात्रा की कहानी, एक यात्री की जुबानी

मिडिल बर्थ पर आरएसी देख ट्वीट किया तो अपर बर्थ मिल गई

आनंद विहार से भागलपुर जा रही 22406 गरीब रथ ट्रेन का वेटिंग टिकट जब आरएसी हुआ तो लगा, बैठकर ही सही चला जाऊंगा। लेकिन, यह क्या... 10 नंबर बर्थ! आरक्षित कंपार्टमेंट के किसी बर्थ पैटर्न पर 10 नंबर तो साइड बर्थ नहीं हो सकती- दो दशकों से ट्रेनों में अनगिनत सफर से इतना तो पक्का था। बोगी के अंदर गया तो आम आरक्षित बोगियों की तरह 10 नंबर मिडिल बर्थ ही मिली। लगा कि गलती से आरएसी दिख रहा होगा। लेकिन, तभी 30 साल के अभिनव आ गए इसी बर्थ के दूसरे आरएसी यात्री। दोनों भौंचक! इसी बीच शाम 5:20 पर ट्रेन निकल पड़ी। मन में एक ही सवाल था कि मिडिल बर्थ पर दोनों कैसे बैठेंगे या कोई एक सोए और दूसरा बैठे- यह भी तो नहीं हो सकेगा। लोअर बर्थ वाले भी अपना हिस्सा छूटने के डर से परेशान दिखे। खैर, ट्वीट की तो रेल मदद ने 6:26 बजे रेफरेंस नंबर 2022071503643 के साथ मदद का भरोसा दिलाया। लेकिन, ठीक 7 बजे में बगैर समाधान दिए इस रेफरेंस नंबर को खत्म किए जाने का मैसेज आ गया। अब सब्र टूट रहा था, क्योंकि चल टिकट निरीक्षक (टीटीई) भी समाधान करने को नहीं आए थे। रेल मदद की साइट पर जाकर भी कंप्लेन किया। इस बार 7:13 बजे रेफरेंस नंबर 2022071503886 का मैसेज आया और कुछ देर बाद कॉल भी। कॉल करने वाले ने जब मिडिल बर्थ पर दो यात्रियों को आरएसी मिलने की बात समझी तो टुंडला तक समाधान कराने की बात कही। इस शिकायत ने ग्राउंड तक काम किया। टीटीई आए और मुझे कहा कि ऊपर की बर्थ 11 नंबर खाली रहती है, उसपर आप चले जाएं। मैंने राहत की सांस ली और पटना तक के ही यात्री अभिनव भी अब संतोष कर रहे थे। मैंने तो बिना देर किए अपनी बर्थ पर जाकर चादर वगैरह बिछा ली, लेकिन कुछ देर बाद टुंडला आया तो हम सब फिर चौंक गए। उसी 10 नंबर पर एक और यात्री आ गए प्रमोद। बिहार तक का सफर इनका भी। अब वह दोनों परेशान।

दूसरे टीटीई ने आकर टिकट जांचा और कहा कि आप दोनों को इसी में एडजस्ट करना पड़ेगा। इस बीच, आरपीएफ के एक सिपाही ने इन दोनों में से एक को धमका भी दिया था कि एजेंट से टिकट लिया होगा, इसलिए यह हुआ। अब एडजस्ट ही करो, वरना क्या पता टिकट ही कैंसिल मान लें टीटीई साहब। अबतक लोअर बर्थ वाले समझ चुके थे कि यह दोनों परेशान कर सकते हैं, इसलिए उन्होंने अपना बेड तैयार कर लिया। अब आरएसी के दोनों यात्री मिडिल बर्थ पर एडजस्ट नहीं होने के कारण जैसे-तैसे ‘सफर’ करने लगे। एक बर्थ पर दो से ज्यादा आरएसी यात्रियों के बारे में सुना नहीं था, लेकिन यहां तो तीन-तीन साक्षात देख लिए थे। वह भी मिडिल बर्थ पर। 

जितेंद्र (15 जुलाई को 22406 गरीब रथ की जी 16 बोगी में बर्थ नंबर 10)

“किस्मत से 7 नंबर बर्थ के यात्री नहीं आए, वरना मैं कहां बैठता-सोता? हम तीन यात्रियों को 10 नंबर अलॉट था। दो तो आनंद विहार से आ रहे थे, मैं टुंडला में भागलपुर गरीब रथ पर चढ़ा। 7 नंबर वाले यात्री नहीं आए तो मुझे यह मिल गया। एक 10 और दूसरे 11 नंबर पर सो गए। यह तो जानबूझकर परेशान किया जाना है।”

संत कुमार, (29 जुलाई को 22406 गरीब रथ की जी 10 बोगी में बर्थ नंबर 10)

Edited By: Kumar Jitendra Jyoti