कानपुर [जागरण संवाददाता]। बारिश के बाद गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी तो हुई है लेकिन प्रदूषण का स्तर नहीं घटा है। वहीं जलीय जीव जंतुओं की मौत से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। प्रदूषण का कारण जानने को गंगा जल के नमूने लिए गये हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

दो दिन पहले फतेहपुर और रायबरेली के कुछ गंगाघाटों पर भारी संख्या में मछलियां मरी हुई पाई गई थीं। कयास लगाए जा रहे थे कि कानपुर की टेनरियों और फैक्ट्रियों से आए हुए प्रदूषित पदार्थो की वजह से मछलियां मरी हैं। लेकिन जब कानपुर, फतेहपुर जिलों के कुछ घाटों से गंगाजल लेकर जांच की गई तो पता चला कि कानपुर से ऐसा कोई घुलित द्रव्य नदी में नहीं मिला। वजह बताई गई कि यदि यह कानपुर से मिलता तो यहां के जलीय जीव भी मरते लेकिन यहां सब सुरक्षित हैं। फतेहपुर और रायबरेली की गंगा इलाहाबाद प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अंतर्गत आने के कारण वहां की टीम जांच कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

उधर बारिश से गंगा के जलस्तर में कुछ सुधार होने के बाद भी अबतक पानी की गुणवत्ता में कुछ खास बदलाव नहीं हुआ। अभी भी पानी का प्रदूषण कम नहीं हुआ है। जुलाई में प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा लिये गये आंकड़ों के मुताबिक बिठूर घाट पर कलर 3.0, पीएच 8.3, डीओ .10, बीओडी 3.2। कोयलाघाट पर कलर 3.0, पीएच 8.19, डीओ 6.8, बीओडी 4.5। जानागांव में कलर 3.0, पीएच 8.14, डीओ 6.3, बीओडी 6.3 रहा।

प्रदूषण नियंत्रण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी टीयू खान ने बताया कि कानपुर में गंगा नदी के प्रदूषण का असर फतेहपुर और रायबरेली के जिलों में दिखाई पड़ने का कोई मतलब नहीं है। यदि ऐसा होता तो कानपुर में ही मछलियां मर जातीं। वह वहीं का स्थानीय स्तर में फैला हुआ प्रदूषण होगा। वह क्षेत्र इलाहाबाद के अंर्तगत आता है वहां की टीम पड़ताल कर रही है।

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