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टी-लवर के लिए जरूरी खबर: चायपत्ती कितनी सुरक्षित, FSSAI ला रहा नया नियम

Published: Mon, 19 Oct 2026 05:32 PM (IST)

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने चाय पत्ती में कीटनाशकों की अधिकतम अवशेष सीमा (MRL) तय करने का प्रस्ताव दिया है।

FSSAI ने चाय में कीटनाशकों की MRL तय करने का प्रस्ताव दिया

FSSAI ने चाय में कीटनाशकों की MRL तय करने का प्रस्ताव दिया

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने चाय पत्ती में कीटनाशकों की अधिकतम अवशेष सीमा (एमआरएल) तय करने का प्रस्ताव दिया है। यह कदम चाय की सुरक्षा को और मजबूत करने और उपभोक्ताओं को संभावित जोखिम से बचाने की दिशा में उठाया गया है।

चाय बागानों में दीमक समेत कई तरह के कीड़े पौधों पर हमला करते हैं और पत्तियों को नुकसान पहुंचाते हैं। इनसे बचाव के लिए किसान एसिटामिप्रिड और इमिडाक्लोप्रिड जैसे कीटनाशकों का छिड़काव करते हैं। प्रोसेसिंग के बाद भी पत्तियों में इन रसायनों की कुछ मात्रा रह जाती है, जिसे ‘जहर’ कहा जा सकता है।

कितनी होनी चाहिए एमआरएल?

एफएसएसएआई ने चाय में एसिटामिप्रिड के लिए 20 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम (20 पीपीएम) और इमिडाक्लोप्रिड के लिए 50 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम (50 पीपीएम) की एमआरएल प्रस्तावित की है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार ये मानक वैज्ञानिक जोखिम आकलन, भारतीय आहार पैटर्न और उपलब्ध अवशेष डेटा के आधार पर तैयार किए गए हैं।

MRL क्या होता है? 

एमआरएल किसी खाद्य उत्पाद में कानूनन स्वीकृत कीटनाशक अवशेष की अधिकतम मात्रा है। यह सुनिश्चित करता है कि नियमित चाय पीने से स्वास्थ्य पर जहरीला असर न पड़े।

हाल ही में देश में 36 ब्लैक टी नमूनों की जांच में 28 नमूनों में 11 तरह के कीटनाशक पाए गए, हालांकि उनकी सटीक मात्रा नहीं बताई गई।

क्या आपकी चाय में जहर है?

उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। प्रस्ताव का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि बाजार में उपलब्ध चाय जहरीली या पीने के अयोग्य है।

यह केवल एक सुरक्षात्मक और निगरानी प्रक्रिया का हिस्सा है, जिससे भविष्य में गुणवत्ता पर और बेहतर नियंत्रण सुनिश्चित हो सके।

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