नई दिल्ली। फ्रांस के रक्षा मंत्री ज्यां-ईव ली द्रियान तीन दिवसीय यात्रा पर सोमवार को भारत आ रहे हैं। यात्रा के दौरान वह अपने भारतीय समकक्ष मनोहर पार्रिकर से वार्ता तथा अटके पड़े अरबों डॉलर के रॉफेल लड़ाकू विमान करार के लिए नए सिरे से प्रयास करेंगे। दरअसल, उनकी यात्रा का उद्देश्य भारत के साथ रक्षा सहयोग को और मजबूत करने तथा कई शस्त्र प्रणालियों की आपूर्ति पर चल रही बातचीत को आगे बढ़ाना है। रक्षा सूत्रों ने बताया कि द्रियान का भारत आना यूएई सहित कुछ अन्य देशों की आधिकारिक यात्रा का एक हिस्सा है। द्रियान गत वर्ष नवंबर के अंत में भी भारत आकर पार्रिकर से मिले थे।

सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ महीने बाद फ्रांस की यात्रा पर जाने वाले हैं। फ्रांसीसी रक्षा मंत्री की कोशिश है कि मोदी की यात्रा से पहले ही रॉफेल समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाए। हालांकि पार्रिकर ने हाल ही में रॉफेल करार के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने से इन्कार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि इस विषय पर कांट्रैक्ट निगोशियेशंस कमेटी (सीएनसी) में विचार-विमर्श चल रहा है।

इस बीच पार्रिकर ने सीएनसी को इस बारे में प्रक्रिया तेज करने को कहा है। भारतीय वायु सेना प्रमुख ने मध्यम आकार वाले बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान की जरूरत पर जोर दिया था। इसके लिए रॉफेल को चुना गया था।

गौरतलब है कि मूल्य निर्धारण को लेकर उठे विवाद के बाद पिछले हफ्ते फ्रांसीसी रक्षा मंत्री ने अनुबंध पर जल्द हस्ताक्षर की उम्मीद जताते हुए कहा था कि इसकी कीमत दिए गए शुरुआती प्रस्ताव के अनुरूप ही होगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि दिसंबर में दोनों देशों के बीच बातचीत के तहत सौदे को अंतिम रूप देने के लिए एक सक्षम टीम पहले ही भारत आया हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सौदे पर अंतिम निर्णय जल्द ही ले लिया जाएगा।

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Posted By: Sanjay Bhardwaj

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