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नवनिर्वाचित माननीयों में हर तीसरा आपराधिक पृष्ठभूमि का

लोकसभा चुनाव में इस बार जो सांसद चुने गए हैं उनमें हर तीसरे की आपराधिक पृष्ठभूमि है। इसका रहस्योद्घाटन उनके द्वारा नामांकन के समय दाखिल शपथ पत्र से हुआ है। कुल 543 में से 541 सीटों पर जीते हुए प्रत्याशियों का नेशनल इलेक्शन वाच (एनईडब्ल्यू) एवं एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉ‌र्म्स (एडीआर) के विश्ले

By Edited By: Published: Sun, 18 May 2014 08:37 PM (IST)Updated: Mon, 19 May 2014 11:47 AM (IST)

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में इस बार जो सांसद चुने गए हैं उनमें हर तीसरे की आपराधिक पृष्ठभूमि है। इसका रहस्योद्घाटन उनके द्वारा नामांकन के समय दाखिल शपथ पत्र से हुआ है।

कुल 543 में से 541 सीटों पर जीते हुए प्रत्याशियों का नेशनल इलेक्शन वाच (एनईडब्ल्यू) एवं एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉ‌र्म्स (एडीआर) के विश्लेषण से पता चलता है कि 186 यानी 34 फीसद नवनिर्वाचित सांसद ने अपने चुनाव शपथ पत्र में बताया है कि उनके खिलाफ आपराधिक मामले हैं। वर्ष 2009 में लोकसभा के 30 फीसद सदस्यों खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज थे।

इस बार इसमें चार फीसद बढ़ोतरी हुई है। विश्लेषण के अनुसार, वर्ष 2014 के चुनाव में आपराधिक मामले वाले प्रत्याशी की जीत की 13 फीसद संभावना थी जबकि वैसे प्रत्याशी जिनका रिकॉर्ड साफ सुथरा था उनके जीतने के पांच फीसद मौके थे। 186 नए सदस्यों में 112 (21 फीसद) के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने, महिला के खिलाफ अपराध जैसे गंभीर आपराधिक मामले हैं।

दलगत तौर पर देखें तो भाजपा के सर्वाधिक 98 यानी 281 विजेताओं में से 35 फीसद सांसदों ने अपने शपथ पत्र में अपने खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने की घोषणा की है। कांग्रेस के 44 में आठ (18 फीसद), अन्नाद्रमुक के 37 में छह (16 फीसद), शिवसेना के 18 में 15 (83 फीसदी) और तृणमूल कांग्रेस के 34 सांसदों में से सात (21 फीसद) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामला लंबित होने का खुलासा किया है।

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