अरबों का नुकसान, ग्लोबल ट्रेड पर ब्रेक... अल नीनो बढ़ा रहा प्रशांत महासागर में दुनिया की मुश्किलें
लगातार मजबूत हो रहे अल नीनो के कारण प्रशांत महासागर में जानलेवा तूफानों की संख्या बढ़ी है, जिससे सैकड़ों लोगों ...और पढ़ें

अल नीनो बढ़ा रहा प्रशांत महासागर में दुनिया की मुश्किलें(प्रतीकात्मक तस्वीर)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लगातार मजबूत हो रहा अल नीनो प्रशांत महासागर में टाइफून और समुद्री तूफानों का एक खतरनाक रूप ले रहा है। इन तूफानों की वजह से अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है और अरबों डॉलर का भारी नुकसान हुआ है।
सोमवार को एक और तूफान जापान के करीब पहुंच गया, और मौसम विशेषज्ञों के अनुसार नवंबर तक इस क्षेत्र में ऐसे और भी तूफान आने की आशंका है।
यह खतरनाक स्थिति अटलांटिक महासागर के बिल्कुल उलट है, जहां 1941 के बाद से अब तक की सबसे शांत शुरुआत देखी गई है। प्रशांत महासागर में आए इन चक्रवातों के कारण अप्रैल से अब तक 230 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
अमेरिकी सरकार के आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ चीन में प्राकृतिक आपदाओं की वजह से अकेले जुलाई महीने में लगभग 8.5 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान हुआ है।
बंदरगाहों पर जाम की वजह से व्यापार पर असर
इन तूफानों का असर केवल उन समुदायों तक सीमित नहीं है, जो सीधे इसकी चपेट में आए हैं। दुनिया की जानी-मानी कंटेनर शिपिंग कंपनी मर्स्क ने इस महीने एक एडवाइजरी जारी कर बताया है कि लगातार आए कई गंभीर तूफानों के कारण क्षेत्र के कुछ सबसे बड़े बंदरगाहों पर कंजेशन लग गया है। इसके कारण मालवाहक जहाजों के समय पर पहुंचने की दर में काफी कमी आई है।
अल नीनो का बढ़ता प्रभाव
इस विनाशकारी मौसम के पीछे महासागर की गर्मी के दो प्रमुख कारण एक साथ काम कर रहे हैं। अल नीनो भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के गर्म होने और उसके ऊपर के वायुमंडल की प्रतिक्रिया से उत्पन्न होता है, जून में अपने उभरने के बाद से लगातार मजबूत हो रहा है। यह पूरे प्रशांत महासागर के बड़े हिस्से में ऐसी स्थितियां पैदा कर रहा है जो उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के लिए बेहद अनुकूल हैं।
हांगकांग वेधशाला के अनुसार, अगस्त महीने में प्रशांत बेसिन और दक्षिण चीन सागर में कुल 12 उष्णकटिबंधीय चक्रवात बने, जो 1961 के बाद से किसी भी एक महीने में बनने वाले चक्रवातों की सबसे बड़ी संख्या है।
इसके अलावा, मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में कम से कम 17 सिस्टम ट्रॉपिकल स्टॉर्म के स्तर तक पहुंच चुके हैं। इनमें से छह बड़े समुद्री तूफान में तब्दील हो गए और चार तूफान अत्यंत गंभीर श्रेणी में पहुंच गए, जिनमें हवा की रफ्तार 179 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे भी अधिक दर्ज की गई।
