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कम बारिश और अल नीनो की दोहरी मार, चावल उत्पादन में 1 करोड़ टन की आ सकती है कमी

Published: Sun, 20 Sep 2026 07:19 PM (IST)

मॉनसून की कम बारिश और अल नीनो के प्रभाव से इस साल धान उत्पादन में एक करोड़ टन की कमी ...और पढ़ें

चावल उत्पादन में 1 करोड़ टन की आ सकती है कमी(प्रतीकात्मक तस्वीर)

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मानसून की वापसी शुरू होने के साथ ही इस बार धान के उत्पादन घटने की चिंता बढ़ गई है। पहले बारिश की कमी के चलते धान का रकबा घटा और अब फसल तैयार होने के समय नमी की कमी से प्रति हेक्टेयर पैदावार प्रभावित होने का खतरा बढ़ा है। इसी बीच अल नीनो भी आने वाले महीनों में मौसम को अत्यधिक चुनौतीपूर्ण बना सकता है।

पिछले साल देश में रिकार्ड 15.4 करोड़ टन चावल का उत्पादन हुआ था, जिसमें इस बार एक करोड़ टन की कमी आ सकती है। कृषि मंत्रालय का अनुमान लगभग 14.4 करोड़ टन चावल उत्पादन का है। यह पिछले एक दशक के दौरान चावल उत्पादन की सबसे बड़ी गिरावट होगी।

ऐसे में नई फसल में कमी से बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है और निर्यात भी महंगा हो सकता है। मगर सुकून की बात है कि पर्याप्त मात्रा में बफर स्टाक है। सितंबर तक राज्यों के पास चावल का कुल सरकारी भंडार करीब 5.96 करोड़ टन था, जो जरूरत से काफी अधिक है। इसलिए उत्पादन घटने के बावजूद घरेलू आपूर्ति और निर्यात को तुरंत झटका लगना जरूरी नहीं है।

मानसून में 15 प्रतिशत कम हुई बारिश

भारत में एक जून से अब तक मानसूनी बारिश सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम रही है। कई प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्रों में कमी 42 प्रतिशत तक पहुंची है। 19 सितंबर से पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी भी शुरू हो गई है। इसका मतलब है कि धान की फसल के लिए बारिश का मुख्य दौर लगभग समाप्त हो चुका है। बारिश में कमी का असर सिर्फ पैदावार पर नहीं पड़ा है।

कृषि मंत्रालय के हालिया आंकड़ों के अनुसार, धान की खेती का क्षेत्र पिछले साल के 445.92 लाख हेक्टेयर से घटकर 429.28 लाख हेक्टेयर रह गया है। यानी 16.64 लाख हेक्टेयर में इस बार धान की बुवाई नहीं हुई है।

प्रतिशत में यह गिरावट 3.73 है। खरीफ के मौसम में बोया जाने वाला धान देश के कुल चावल उत्पादन में करीब 80 प्रतिशत से अधिक योगदान देता है। इसलिए रकबे में यह कमी सीधे कुल उत्पादन पर दबाव डालती है।

खरीफ फसल पर भी पड़ेगा असर

बारिश में कमी का असर सिर्फ धान तक सीमित नहीं है। इस साल खरीफ का कुल रकबा पिछले वर्ष के 1118.95 लाख हेक्टेयर से घटकर 1103.90 लाख हेक्टेयर रह गया है। यानी 15 लाख हेक्टेयर की कमी है।

मक्का का रकबा 2.23 प्रतिशत और सोयाबीन का 0.72 प्रतिशत घटा है। मूंग का रकबा भी कम हुआ है। हालांकि अरहर और उड़द में वृद्धि हुई है। इसका मतलब है कि कमजोर मानसून का असर कई प्रमुख खरीफ फसलों पर पड़ा है।

आईएमडी का आंकड़ा बताता है कि देश के 792 जिलों में से 327 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। इनमें 320 जिले ऐसे हैं जहां कमी 20 से 59 प्रतिशत के बीच है।

सात जिलों में बारिश की कमी 60 प्रतिशत से भी अधिक है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों के जिले इससे प्रभावित हैं।

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