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7 राज्य, 20 हजार रुपये... हैदराबाद में एग डोनेशन रैकेट का खुलासा; महिलाओं को फंसाने की इनसाइड स्टोरी

Published: Mon, 02 Nov 2026 03:19 PM (IST)

हैदराबाद पुलिस ने एक बड़े अंतर-राज्यीय अवैध एग डोनेशन रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसमें 43 महिलाओं को बचाया गया। ...और पढ़ें

(सांकेतिक फाइल तस्वीर)

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डिजिटल डेस्क, हैदराबाद। हैदराबाद के मल्काजगिरी पुलिस कमिश्नरेट ने एक बड़े अंतर-राज्यीय अवैध एग डोनेशन रैकेट का पर्दाफाश किया है। जांच अधिकारियों के अनुसार, जरूरतमंद महिलाओं को अलग-अलग राज्यों से लाकर ग्राहकों की मांग के मुताबिक जैसे जाति, धर्म, रंग, कद, शिक्षा और क्षेत्र के आधार पर चुना जाता था।

पुलिस ने कई ठिकानों पर छापामारी कर 43 महिलाओं को सुरक्षित बाहर निकाला है, इस मामले में हॉस्टल संचालक समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए देशव्यापी नेटवर्क

पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के तार देश के कई राज्यों में फैले हुए थे। मुख्य आरोपी अमित शर्मा और उसके सहयोगी अन्य राज्यों के अवैध एजेंटों के साथ व्हाट्सएप ग्रुप और डिजिटल माध्यमों से जुड़े रहते थे।

जब भी कोई दंपती एग डोनर की तलाश में संपर्क करता, तो उसकी पसंद के अनुसार महिलाओं की तस्वीरें और विवरण इन ग्रुपों में साझा किए जाते थे।

बेगमपेट के इंस्पेक्टर पी. सैदुलु ने बताया कि आरोपी आर्थिक तंगी से जूझ रही महिलाओं की लाचारी का फायदा उठाकर इस अवैध धंधे को चला रहे थे।

पसंद के हिसाब से तय होती थी कीमत

जांच में खुलासा हुआ है कि ग्राहकों की मांग जितनी खास होती थी, महिलाओं को मिलने वाला पैसा और एजेंटों की फीस उतनी ही बढ़ जाती थी। आमतौर पर महिलाओं को प्रति साइकिल 20000 से 30000 रुपये देने का वादा किया जाता था।

वहीं, गोरे रंग, विशेष जाति या शैक्षणिक योग्यता जैसी चुनिंदा मांगों के लिए यह रकम 50000 तक पहुंच जाती थी। अधिकांश ग्राहक डोनर के रंग-रूप और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि को लेकर खास मांग रखते थे।

वर्किंग विमेन हॉस्टल की आड़ में चल रहा था धंधा

महिलाओं को पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, दिल्ली, असम, उत्तर प्रदेश, झारखंड और ओडिशा जैसे सात राज्यों से हैदराबाद लाया गया था। गिरोह ने इन महिलाओं को रखने के लिए वर्किंग विमेन हॉस्टलों को अपना ठिकाना बनाया हुआ था।

पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर सरूरनगर स्थित शेट्टी वर्किंग विमेंस हॉस्टल पर छापा मारा, जिसका संचालन एमिरीशेट्टी दुर्गा प्रसाद कर रहा था। इसके बाद प्रकाश नगर, बेगमपेट, एर्रागड्डा और गोपालपुरम सहित कई इलाकों में छापामारी कर कुल 43 महिलाओं को मुक्त कराया गया।

हार्मोनल इंजेक्शन और दवाइयां जब्त

छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से हार्मोनल इंजेक्शन, टैबलेट्स, सीरिंज, सुइयां, मोबाइल फोन और कई दस्तावेज जब्त किए हैं। जब्त की गई दवाओं और सीरिंज को जांच के लिए गांधी अस्पताल भेजा गया है।

पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या महिलाओं को अनधिकृत रूप से हार्मोनल इंजेक्शन दिए जा रहे थे और क्या इन प्रक्रियाओं के दौरान स्वास्थ्य सुरक्षा व सहमति के कानूनी नियमों का पालन किया गया था।

आईवीएफ केंद्रों की भूमिका की जांच

मल्काजगिरी की पुलिस आयुक्त बी. सुमति ने बताया कि हॉस्टल संचालक दुर्गा प्रसाद सहित नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब इस बात की भी गहन जांच कर रही है कि क्या निजी आईवीएफ केंद्र और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (एआरटी) बैंक भी इस गैर-कानूनी नेटवर्क से सीधे तौर पर जुड़े थे।

पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग से भी पूछा है कि आईवीएफ केंद्रों ने डोनर्स के पहचान पत्रों और दस्तावेजों की कितनी जांच की थी।मामले में सरूरनगर और बेगमपेट पुलिस स्टेशनों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी रेगुलेशन एक्ट 2021 की संबंधित धाराओं के तहत तीन अलग-अलग केस दर्ज किए गए हैं।

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