चुनाव आयुक्त संधू और जोशी ने उठाए थे ये 4 सवाल, EC ने जारी किए सभी जवाब
भारतीय निर्वाचन आयोग ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा पिछले 10 महीनों में उठाए गए 14 मुद्दों पर सुधारों की घोषणा की है।
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नए मतदाता पंजीकरण फॉर्म-6 में बदलावों पर आयोग ने स्पष्टीकरण दिया

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय निर्वाचन आयोग ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से पिछले 10 महीने में आंतरिक संवाद के दौरान उठाए गए मुद्दों पर सुधारों की घोषणा की है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
इनमें नए मतदाताओं के पंजीकरण के फार्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची के डाटाबेस तक पहुंच, आईटी व्यवस्था और मतदाताओं के नाम जोड़ने-हटाने से जुड़े सवाल शामिल थे। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, संधू और जोशी की शनिवार को हुई बैठक में इन मुद्दों पर आगे की कार्रवाई तय की गई।
फार्म-6 में बदलाव
नए मतदाता के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फार्म-6 में बदलाव को लेकर जोशी ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित इस कानूनी फार्म में नियमों में संशोधन के बिना बदलाव नहीं किया जा सकता। संधू ने भी उनकी आपत्ति का समर्थन किया।
बाद में ईसीआइनेट पर फार्म-6 के आनलाइन संस्करण में एसआइआर से जुड़ी घोषणा जोड़े जाने पर संधू ने फिर सवाल उठाया और इसे हटाने की मांग की।
आयोग का जवाब
अतिरिक्त घोषणा-पत्र विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआइआर) के लिए था और सुप्रीम कोर्ट ने इसे सही ठहराया है। इसके तहत नए मतदाताओं को पिछली एसआइआर में तैयार मतदाता सूची में अपनी, माता-पिता या दादा-दादी की प्रविष्टि की जानकारी देनी होती है। एसआइआर के अलावा सामान्य पंजीकरण में नियम, 1960 के तहत निर्धारित फार्म का ही इस्तेमाल होगा।
मतदाता डाटाबेस की पहुंच और निगरानी
संधू और जोशी ने मतदाता सूची के केंद्रीय डाटाबेस और राज्य के संबंधित चुनाव अधिकारियों की उस तक पहुंच पर सवाल उठाए थे।
जोशी ने यह सुनिश्चित करने के लिए आडिट का प्रस्ताव दिया कि अधिकृत अधिकारियों के अलावा किसी को डाटाबेस में बदलाव की अनुमति न हो। संधू ने राज्य अधिकारियों की पहुंच पर लगी पाबंदियों पर सवाल किया था।
आयोग का जवाब
फील्ड अधिकारियों को उनके कानूनी अधिकारों के आधार पर ईसीआइनेट पर सूची आधारित पहुंच मिलती है। एक वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति ईसीआइनेट की समीक्षा करेगी।
इसमें आइ या ट्रिपल का स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा। समिति चुनाव कानूनों और नियमों के पालन की दोबारा जांच करेगी। जरूरत के अनुसार फील्ड अधिकारियों को अतिरिक्त सुविधा देने पर भी विचार किया जाएगा।
गोवा के 97 मतदाताओं का मामला
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गोवा में तार्किक गड़बड़ियों के कारण चिह्नित मतदाताओं के मामलों की जांच की गई। इसमें 97 मतदाता ऐसे पाए गए, जिनके नाम सूची में शामिल किए जाने योग्य थे।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, साफ्टवेयर में ईआरओ के फैसले को दर्ज कर इन नामों को वापस जोड़ने का विकल्प नहीं था। गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने आठ बार रोलबैक विकल्प मांगा, लेकिन ये नाम अंतिम सूची से बाहर रह गए।
आयोग का जवाब
बूथ लेवल अधिकारियों को ऐसे मतदाताओं के घर जाकर फार्म लेने के निर्देश दिए गए हैं। 97 में से 81 मतदाता फार्म-6 भर चुके हैं।
चल रहे एसआईआर में भी बीएलओ अनमैप्ड या तार्किक गड़बड़ियों के कारण नोटिस पाने वाले मतदाताओं से दस्तावेज लेकर ईसीआइनेट पर अपलोड करेंगे। सामान्य तौर पर उन्हें ईआरओ या सहायक ईआरओ के सामने पेश होने की जरूरत नहीं होगी।
पूर्ण आयोग की मंजूरी के बिना संवाद
संधू ने सवाल उठाया था कि पूर्ण आयोग की मंजूरी के बिना आयोग के नाम से संवाद जारी किए जा रहे हैं। जोशी ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए भविष्य में जरूरी मंजूरी सुनिश्चित करने की मांग की थी।
आयोग के 26 सितंबर के प्रेस नोट में इस पर सीधे कोई टिप्पणी नहीं की गई। हालांकि, इसमें कहा गया है कि आयोग की बैठकों के एजेंडे पहले से प्रसारित किए जाएंगे और बैठक का ब्यौरा जारी किया जाएगा। अधिकारियों को आयुक्तों के निर्देशों का पूरी सख्ती से पालन करने को कहा गया है।
चुनाव आयोग में जानकारी के बगैर बदलावों पर कैबिनेट सचिव से शिकायत
आईटी विभाग की निगरानी
संधू और जोशी ने कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को पत्र लिखकर व्यवस्था में काम के बंटवारे में बदलाव पर आपत्ति जताई थी।
उनका कहना था कि ये बदलाव उनकी जानकारी के बिना किए गए और इससे डिवीजन की निगरानी प्रभावित हुई।आयोग ने कहा कि विवादित आदेश लागू ही नहीं किए गए और डिवीजन पर उप चुनाव आयुक्त की निगरानी कभी हटाई नहीं गई।
मतदाताओं के नाम बहाल करने के खिलाफ अपील
संधू ने बंगाल में न्यायिक अधिकारियों के आदेश से मतदाता सूची में शामिल किए गए नामों को हटाने के खिलाफ दायर अपीलों पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने अपील दायर करने के अधिकार और प्रक्रिया की जानकारी मांगी थी।
आयोग के 26 सितंबर के प्रेस नोट में इन अपीलों का सीधे उल्लेख नहीं है। आयोग ने कहा कि एसआइआर के दौरान या बाद में छूटे नामों को ईआरओ के पास आवेदन देकर शामिल कराया जा सकता है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी और ईआरओ को ऐसे मतदाताओं के लिए विशेष नामांकन अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है।
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