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'एक साल तक सोना न खरीदें', पीएम मोदी की अपील से कैसे बढ़ेगा विदेशी मुद्रा भंडार?

Published: Tue, 12 May 2026 10:09 PM (IST)

प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद, आर्थिक थिंक टैंक जीटीआरआई ने विदेशी मुद्रा बचाने और सोने की खपत कम करने ...और पढ़ें

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में विदेशी मुद्रा बचाने के लिए लोगों से एक वर्ष तक सोने की खरीद नहीं करने की अपील की है।

इस बीच आर्थिक थिंक टैंक जीटीआरई ने कहा है कि सोने की खपत को कम करने के लिए सरकार को अपनी इस कीमती धातु संबंधी आयात नीति की समीक्षा करनी चाहिए।

सोना न खरीदने से क्या होगा?

संयुक्त अरब अमीरात के साथ हुए व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (सीईपीए) में कीमती धातुओं को टैरिफ छूट का उदाहरण देते हुए जीटीआरआइ ने कहा कि इसके बाद दुबई से सोना आयात काफी बढ़ा है।

भारत-यूएई के बीच सीईपीए मई 2022 में लागू हुआ था। समझौते के तहत भारत ने टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) प्रणाली के माध्यम से संयुक्त अरब अमीरात से सोने के आयात पर सामान्य आयात शुल्क से एक प्रतिशत कम टैरिफ की अनुमति दी।

यह कोटा सालाना 120 टन से शुरू हुआ और 2027 तक बढ़कर 200 टन हो जाएगा, जो भारत के सोने के आयात का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा कवर करेगा।

जीटीआरआइ के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि 2024 के बजट में भारत ने सामान्य सोने के आयात शुल्क को 15 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया।

इसके परिणामस्वरूप, दुबई से आयातित सोना असल में भारत में केवल पांच प्रतिशत शुल्क पर ही प्रवेश कर पाया। तब से दुबई से आयात में भारी बढ़ोतरी हुई है।

यूएई से भारत के सोने के बार (छड़) का आयात 2022 में 2.9 अरब डॉलर से बढ़कर 2023 में 6.7 अरब डॉलर और 2025 में 16.5 अरब डालर तक पहुंच गया। सीईपीए लागू होने से पहले भारत के सोना आयात में दुबई की हिस्सेदारी 7.9 प्रतिशत थी, जो 2025 में बढ़कर 28 प्रतिशत पर पहुंच गई।

श्रीवास्तव ने कहा कि यह रुझान चिंता पैदा करता है क्योंकि यूएई न तो सोने का खनन करता है और न ही वहां कोई बड़ी प्रसंस्करण गतिविधि होती है। इससे प्रतीत होता है कि इस व्यापार का एक बड़ा हिस्सा तीसरे देशों से सोने को दुबई के रास्ते भारत भेजना है, ताकि भारत के कम टैरिफ का फायदा उठाया जा सके।

जीटीआरआइ ने भारत के व्यापार संतुलन और विदेशी मुद्रा भंडार की रक्षा के लिए कीमती धातुओं के मूल-स्थान संबंधी नियमों को और कड़ा करने, एफटीए के तहत कीमती धातुओं पर दी गई रियायतों की समीक्षा करने और भविष्य के व्यापार समझौतों से सोना, चांदी, प्लेटिनम और हीरे को बाहर रखने की सिफारिश की है।

बीते वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत का सोना आयात मात्रा के लिहाज से 4.76 प्रतिशत घटकर 721.03 टन रहा है। लेकिन मूल्य के लिहाज से यह 24 प्रतिशत बढ़कर 71.98 अरब डालर रहा है। भारत के कुल सोना आयात में स्विट्जरलैंड की सबसे अधिक 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके बाद दुबई और दक्षिण अफ्रीका का स्थान है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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