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समुद्र में उठा तूफान 'अर्णव', 140 की रफ्तार से 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश में देगा दस्तक; चार राज्यों में हाई अलर्ट

Published: Mon, 26 Oct 2026 05:32 PM (IST)

चक्रवात 'अर्णव' बंगाल की खाड़ी में और अधिक शक्तिशाली होकर आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ रहा है, जिसके 28 ...और पढ़ें

चक्रवात 'अर्णव' 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश तट से टकराएगा (AI जेनेरेटेड)

चक्रवात 'अर्णव' 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश तट से टकराएगा (AI जेनेरेटेड)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सोमवार को केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के लिए अलर्ट जारी कर दिया है साथ ही अपनी तैयारियों को तेज कर दी हैं।

बंगाल की खाड़ी में चक्रवात 'अर्णव' और अधिक शक्तिशाली होता जा रहा है यह तूफान आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहा है। इसके 28 अक्टूबर की सुबह तट से टकराने की संभावना है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के सोमवार सुबह के बुलेटिन के अनुसार, यह चक्रवाती तूफान सुबह 5:30 बजे पूर्वी-मध्य और उससे सटे पश्चिमी-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर केंद्रित था।

यह विशाखापत्तनम से लगभग 650 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व में स्थित था और 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम की ओर बढ़ रहा था।

140 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेंगी हवाएं 

सोमवार आधी रात तक इस तूफान के और तेज होकर एक 'गंभीर चक्रवाती तूफान' में बदलने की उम्मीद है और मंगलवार तक यह और भी ताकतवर होकर एक 'बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान' का रूप ले सकता है।

IMD के अनुसार, मंगलवार दोपहर तक इसके आंध्र प्रदेश और यनम के तटों को पार करने का अनुमान है; यह बापटला और विशाखापत्तनम के बीच, यनम के पास से गुजरेगा।

इस दौरान हवा की गति 115–125 किमी प्रति घंटा रहने की संभावना है, जबकि हवा के झोंके 140 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकते हैं।

केंद्र और राज्य प्रशासन हाई अलर्ट पर 

तूफान के आने से पहले केंद्र ने तैयारियों की समीक्षा की। तूफान के करीब आने के बीच कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने तैयारियों का जायजा लेने और राहत कार्यों में तालमेल बिठाने के लिए 'नेशनल क्राइसिस मैनेजमेंट कमिटी' (NCMC) की एक बैठक की अध्यक्षता की।

भारी बारिश के पूर्वानुमान को देखते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के अधिकारियों को भी सतर्क रहने के लिए कहा गया है। नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) और स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF) की टीमों को तैनात कर दिया गया है, और अतिरिक्त कर्मियों को स्टैंडबाय पर रखा गया है। सेना, नौसेना, वायु सेना और भारतीय तटरक्षक बल ने भी अपनी बचाव और राहत टीमों को तैयार रखा है।

सोमनाथन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे निवासियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें, संपत्ति के नुकसान को कम से कम करें और यह सुनिश्चित करें कि जरूरी सेवाएं बिना किसी रुकावट के मिलती रहें। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अगर सेवाएं बाधित होती हैं, तो उन्हें तुरंत बहाल किया जाना चाहिए।

मछुआरों को सलाह दी गई है कि वे 26 अक्टूबर (सोमवार) से 29 अक्टूबर (गुरुवार) के बीच समुद्र में न जाएं। गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और IMD स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं और संबंधित राज्यों के साथ तालमेल बिठा रहे हैं।

आंध्र प्रदेश और ओडिशा में तैयारियां

आंध्र प्रदेश और ओडिशा ने चक्रवात से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को चौबीसों घंटे सतर्क रहने, जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाने और तटीय गांवों के लोगों को लगातार अलर्ट जारी करने का निर्देश दिया है।

मछली पकड़ने वाली नावों को वापस किनारे पर लौटने के लिए कहा गया है। साथ ही जिन गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी की तारीख नजदीक है, उन्हें पहले ही अस्पतालों में पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। राज्य में NDRF की 10 टीमें तैनात की गई हैं, जबकि देश भर में 16 और टीमें स्टैंडबाय पर रखी गई हैं।

विशाखापत्तनम जिला प्रशासन ने बचाव कर्मियों को तैनात किया है और नौसेना तथा तटरक्षक बल को भी अलर्ट कर दिया है। राज्य के ऊर्जा विभाग ने बिजली आपूर्ति में संभावित रुकावटों से निपटने के लिए 25000 बिजली के खंभे और अन्य जरूरी सामान तैयार रखे हैं।

ओडिशा में, छह दक्षिणी जिलों - गंजाम, गजपति, रायगडा, मलकानगिरी, कोरापुट और नबरंगपुर को संवेदनशील माना गया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने तैयारियों की निगरानी के लिए आठ मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी है। संवेदनशील इलाकों में NDRF, ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF), दमकल विभाग और पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है।

राज्य सरकार ने एहतियात के तौर पर इन छह जिलों में मछली पकड़ने पर रोक लगा दी है और पहाड़ी इलाकों, झरनों और बांधों में पर्यटकों के जाने पर पाबंदी लगा दी है।

बंगाल-झारखंड में होगी भारी बारिश

बंगाल, झारखंड और बिहार में भी बारिश होने की संभावना है। चक्रवात 'अर्णव' का असर पूर्वी तट के राज्यों से आगे तक फैल सकता है। IMD ने पश्चिम बंगाल के कई जिलों में 28 से 30 अक्टूबर के बीच भारी बारिश का अनुमान जताया है।

दक्षिण 24 परगना, पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर, झारग्राम, बांकुरा और पुरुलिया में भारी बारिश हो सकती है। उप-हिमालयी क्षेत्र के दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी में भी 29 और 30 अक्टूबर को भारी बारिश हो सकती है, साथ ही दार्जिलिंग के लिए भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की चेतावनी भी जारी की गई है।

कोलकाता में भी होगी बारिश 

कोलकाता, हावड़ा, हुगली और दक्षिण बंगाल के अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की उम्मीद है। मछुआरों को सलाह दी गई है कि वे 26 अक्टूबर से पश्चिम बंगाल के तट के पास समुद्र में न जाएं, क्योंकि 35-45 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है, जो 55 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं।

IMD ने आने वाले दिनों में तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश और झारखंड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, विदर्भ तथा पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी बारिश का अनुमान जताया है। अंडमान द्वीप समूह में भी 26 और 27 अक्टूबर को बारिश होने की संभावना है।

बंगाल की खाड़ी में मौसम प्रणाली के तीव्र होने के कारण, तमिलनाडु और पुडुचेरी के नौ बंदरगाहों पर चक्रवात चेतावनी संकेत लगा दिए गए हैं। इन बंदरगाहों में चेन्नई, नागपट्टिनम, कुड्डालोर, कराईकल, पंबन और थूथुकुडी शामिल हैं। ये चेतावनी संकेत बंदरगाह अधिकारियों, जहाज संचालकों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े अन्य लोगों को बदलते मौसम के प्रति सतर्क रहने का संदेश देते हैं।

इस चक्रवात का नाम 'अर्णव' क्यों रखा गया है?

'अर्णव' नाम का सुझाव बांग्लादेश ने दिया था। यह नाम विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और एशिया-प्रशांत के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (UNESCAP) द्वारा अपनाई गई चक्रवातों के नामों की सूची में शामिल है।

'अर्णव' शब्द का संबंध आमतौर पर बंगाली भाषा में 'महासागर' या 'समुद्र' से माना जाता है। हालांकि, आधिकारिक सूची में इस नाम का कोई निश्चित अर्थ नहीं बताया गया है।

इस सूची में भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका सहित 13 देशों द्वारा दिए गए 169 नाम शामिल हैं। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में आने वाले चक्रवातों के लिए इन नामों का उपयोग एक निश्चित क्रम में किया जाता है। नामों की यह प्रणाली अलग-अलग तूफानों की पहचान करने और मौसम संबंधी चेतावनियों को आसानी से पहुंचाने में मदद करती है।

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