CRPF में फिर लौटेंगे 'लांस नायक' और 'नायक' के पद, जवानों के प्रमोशन और अग्निवीरों के लिए बना प्लान
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) 30 साल पहले खत्म किए गए 'लांस नायक' और 'नायक' जैसे सैन्य रैंकों को फिर से लागू करने पर विचार कर रहा है।

CRPF में 'लांस नायक' और 'नायक' की रैंक को वापस बहाल करने की तैयारी (फोटो-एएनआइ)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश का सबसे बड़ा अर्धसैनिक बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) 30 साल पहले खत्म किए गए 'लांस नायक' और 'नायक' जैसे सैन्य रैंकों को फिर से लागू करने पर विचार कर रहा है।
अधिकारियों ने आज शनिवार को जानकारी देते हुए बताया कि ऐसा करने का उद्देश्य पदोन्नति में हो रही देरी को दूर करना है। साथ ही सेना से रिटायर होने वाले अग्निवीरों को नए अवसर देना है।
CRPF में 'लांस नायक' और 'नायक' की रैंक
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि CRPF मुख्यालय ने देशभर में मौजूद अपनी सैकड़ों फील्ड इकाइयों से कहा है कि वे दो दिनों के भीतर सैनिक सम्मेलनों या हितधारकों की बैठकें आयोजित करें और इस संबंध में जवानों की राय लें।'
अधिकारियों ने बताया कि 'लांस नायक' और 'नायक' रैंकों को फिर से लागू करने का उद्देश्य कांस्टेबलों को 'हेड कांस्टेबल' रैंक तक पहुंचने से पहले दो और पदोन्नति के अवसर देना है। इससे न केवल उनकी शिकायतों को दूर करने में मदद मिलेगी, बल्कि उनका मनोबल भी बढ़ेगा।
गृह मंत्रालय (MHA) के एक आदेश के जरिए 1997 में CRPF से 'लांस नायक' और 'नायक' रैंकों को हटा दिया गया था और इन्हें पुलिस के 'कांस्टेबल' और 'हेड कांस्टेबल' रैंकों में मिला दिया गया था। ये दोनों रैंक अभी भी सेना में मौजूद हैं।
CRPF में अग्निवारों की होगी एंट्री
अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का एक मकसद CRPF की सेवा को सेना के अग्निवीरों के लिए आकर्षक बनाना भी है। अग्निवीरों का पहला बैच इस साल के अंत में रिटायर होना शुरू हो जाएगा और वे CRPF सहित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में शामिल होने के पात्र बन जाएंगे।
अग्निवीर वे अल्पकालिक सैन्य कर्मी हैं, जिन्हें केंद्र सरकार की 'अग्निपथ योजना' के तहत चार साल के लिए तीनों सेनाओं में भर्ती किया जाता है।
फिलहाल, CAPF में एक अस्थायी व्यवस्था है, जिसके तहत कांस्टेबलों की वर्दी पर 'सीनियर कांस्टेबल' का रैंक (जो आधिकारिक तौर पर स्वीकृत नहीं है) लगाया जाता है। इससे वे 'लांस नायक' रैंक के बराबर हो जाते हैं। अभी 'नायक' रैंक के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
'एक्स-पैरामिलिट्री पर्सनल एसोसिएशन' के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा, 'प्रस्तावित योजना से जवानों को तभी फायदा होगा, जब उन्हें समयबद्ध तरीके से प्रमोशन मिले, वरना यह पूरी कवायद बेकार साबित होगी।'
CRPF के एक वरिष्ठ कमांडेंट ने कहा, 'सेना के इन दो रैंकों को फिर से लागू करना सिर्फ दिखावे के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बटालियन का अनुशासन बना रहे।'
कैसे होता है प्रमोशन?
पदानुक्रम (hierarchy) के अनुसार, एक जवान जो कांस्टेबल के रूप में बल में शामिल होता है, उसे पांच साल में पहला प्रमोशन 'लांस नायक' के रूप में मिलता है, फिर दस साल में 'नायक' के रूप में और बीस साल में 'हेड कांस्टेबल' के रूप में पदोन्नति मिलती है।
फिलहाल, लगभग 3.25 लाख कर्मियों वाले CRPF में इन रैंकों पर पदोन्नति को लेकर भारी ठहराव (stagnation) है, क्योंकि एक कांस्टेबल को अपना पहला प्रमोशन मिलने में औसतन 22 से 25 साल लग जाते हैं।
एक ही रैंक पर लंबे समय तक बने रहने के कारण जवानों में असंतोष पैदा हो सकता है। इसके लिए ही नियमों में बदलाव करने पर विचार किया जा रहा है।
CRPF और सीमा सुरक्षा बल (BSF) में पहले सेना की इन्फैंट्री बटालियनों की तर्ज पर ये रैंक हुआ करते थे। कमांडेंट ने बताया कि अभी 1,000 से ज्यादा पुरुषों और महिलाओं वाली एक बटालियन में 20 से अधिक अधीनस्थ अधिकारी (subordinate officers) होते हैं। इसलिए, ऐसी किसी भी नीति को बनाते समय यूनिट की संगठनात्मक संरचना और उसकी कार्यक्षमता का ध्यान रखना चाहिए।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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